हरियाणा सरकार का कमाल: मिड डे मील के लिए रोजाना देगी सात रुपये, अभिभावक बोले-इसमें बस पानी ही पी पाएंगे
पहली से पांचवीं कक्षा तक 4.97 रुपये और छठी से आठवीं तक 7.47 रुपये प्रतिदिन के हिसाब के देने की व्यवस्था की है। इस हिसाब में महीने भर की बात करें तो उन्हें पहली से पांचवीं तक 149.10 रुपये और छठी से आठवीं तक 224.10 रुपये की राशि बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसमें से रविवार और सरकारी अवकाश के रुपये के बारे में अभी स्पष्ट निर्देश नहीं आए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा सरकार ने मिड डे मील के लिए जो राशि जारी की है, उससे बच्चे एक समय का भोजन नहीं, बल्कि सिर्फ एक गिलास पानी ही पी सकते हैं। सरकार ने मिड डे मील के लिए महज पांच से सात रुपये जारी किए हैं।
सरकारी स्कूलों में अब तक पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक 70085 दाखिले हो चुके हैं। सरकार ने शिक्षा विभाग को मिड डे मील के विशेष बजट जारी किया था। इसके अनुसार पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं तक दो विभाग बनाकर राशि जारी करने का प्रावधान किया है। इसके तहत पहली से पांचवीं कक्षा तक 4.97 रुपये और छठी से आठवीं तक 7.47 रुपये प्रतिदिन के हिसाब के देने की व्यवस्था की है। इस हिसाब में महीने भर की बात करें तो उन्हें पहली से पांचवीं तक 149.10 रुपये और छठी से आठवीं तक 224.10 रुपये की राशि बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसमें से रविवार और सरकारी अवकाश के रुपये के बारे में अभी स्पष्ट निर्देश नहीं आए हैं।
70 हजार बच्चों की सेहत को खतरा
भिवानी में अब तक पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक 70085 दाखिले हो चुके हैं। सरकारी स्कूलों में मिड डे मील में जो भोजन दिया जाता है, उसमें प्रत्येक दिन अलग-अलग व्यंजन बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें दाल, सब्जी, हलवा, खीर, पूड़ी, दलिया, दूध सहित अन्य पौष्टिक आहार बच्चों को दिए जाते हैं। मगर विभाग द्वारा जारी होने वाले राशि में बच्चों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पाएगा। शहर में अगर सामान्य ढाबे या भोजनालय की बात करें तो भी वहां 50 से 70 रुपये की एक थाली मिलती है। साथ ही रेहड़ी पर गोलगप्पे बेचने वाले भी दस रुपये के चार गोलगप्पे दे रहे हैं। ऐसे में बच्चे सरकार द्वारा जारी राशि से महज दो गोलगप्पे ही खा पाएंगे।
साढ़े तीन माह से नहीं आया मिड डे मील
सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं कक्षा मिड डे मील दिया जाता है। मगर साढ़े तीन माह से बच्चों को न मिड डे मील का सूखा राशन मिला है और न ही इसकी राशि मिल पाई है। ऐसे में बच्चों के अभिभावकों पर भोजन का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते ज्यादातर अभिभावकों का रोजगार छिन गया है। ऐसे में सरकार आर्थिक मदद देने की बजाय जो योजना चल रही है, उन्हें अनदेखा कर रही है। सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा बच्चों और अभिभावकों को भुगतान पड़ रहा है।
खाद्य सामग्री का भाव प्रति किलो या प्रति लीटर के अनुसार
चावल 30-50
दाल 100-120
गेहूं 20-22
आटा 22-25
तेल 140-160
सब्जी 25 से अधिक
दूध 50 से 60
लस्सी 20 से 30
दही 80
कक्षानुसार विद्यार्थियों की संख्या
कक्षा विद्यार्थी
पहली 7047
दूसरी 9122
तीसरी 8627
चौथी 8909
पांचवीं 9543
छठी 8873
सातवीं 8906
आठवीं 9058
ये बोले अभिभावक
लंबे समय से सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था चली आ रही है। इसके माध्यम से बच्चों को स्कूल में ही दोपहर का भोजन निशुल्क मिलता है। मगर तीन माह से अधिक समय से अब तक बच्चों को न तो सूखा राशन मिला है और न ही पैसे। साथ ही मिड डे मील के लिए जो राशि जारी कर रहे हैं वह बहुत कम है। इतने रुपये में बच्चा सिर्फ पानी पी सकता है, खाना तो दूर की बात है। - बिजेंद्र शर्मा, अभिभावक।
कोरोना संक्रमण के कारण काम-धंधे प्रभावित हैं। सरकार आर्थिक मदद की बजाय बच्चों के मिड डे मील के व्यवस्था को भी रोके हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों पर अतिरिक्त भार आ रहा है। सरकार ने बच्चों के दोपहर के भोजन के लिए बहुत कम राशि जारी की है। इसके बारे में सरकार को फिर से विचार करना चाहिए, ताकि बच्चों को ठीक राशि में पौष्टिक आहार मिल सके। - मुकेश कुमार, अभिभावक।
कोरोना संक्रमण के चलते सरकारी स्कूल बंद हैं। सरकार के आगामी आदेशों के बाद फिर से स्कूल सुचारु रूप से शुरू कर दिए जाएंगे। पहली से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की मिड डे मील की व्यवस्था के लिए स्कूल स्टाफ लगा हुआ है। जल्द ही सभी बच्चों की जानकारी एकत्रित कर मिड डे मील की राशि उनके खातों में भेज दी जाएगी। बच्चों की शिक्षा के लिए विभाग लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। - रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।