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कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को एडवांस में छात्रवृत्ति दे सरकार : डॉ. सुशील गुप्ता
Wed, 01 Jan 2025 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 01 Jan 2025 11:24 PM IST
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भिवानी। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने लोहारू के एक गांव में छात्रा के आत्महत्या के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये बेहद ही दुखद बात है कि एक बेटी को कॉलेज की फीस न भर पाने के कारण पेपर से वंचित होकर आत्महत्या करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भाजपा सरकार एडवांस में छात्रवृत्ति दे। पहले कानून था कि अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चे की छात्रवृत्ति सीधे स्कूल और कॉलेज में आती थी और बच्चे को फीस नहीं देनी पड़ती थी। फिर भाजपा सरकार ने कानून बनाया कि छात्र पहले काॅलेज में फीस देगा, उसके बाद सरकार उसकी फीस को वापस कर देगी। लेकिन सरकार दो-तीन साल तक फीस वापस नहीं करती। इस कारण अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चे या तो शिक्षा से वंचित हो जाते हैं या इस बच्ची की तरह आत्महत्या कर लेते हैं।
उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि आरोप क्या है, लेकिन पीड़ित परिवार जो कहता है उसको समझ कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और हरियाणा सरकार को अपने सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए। जो बच्चा कॉलेज जाता है उसको एडवांस में देनी चाहिए। जब सरकार को फीस देनी ही है तो दो-तीन साल तक क्यों लटकाते हैं।
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उन्होंने कहा कि कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भाजपा सरकार एडवांस में छात्रवृत्ति दे। पहले कानून था कि अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चे की छात्रवृत्ति सीधे स्कूल और कॉलेज में आती थी और बच्चे को फीस नहीं देनी पड़ती थी। फिर भाजपा सरकार ने कानून बनाया कि छात्र पहले काॅलेज में फीस देगा, उसके बाद सरकार उसकी फीस को वापस कर देगी। लेकिन सरकार दो-तीन साल तक फीस वापस नहीं करती। इस कारण अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चे या तो शिक्षा से वंचित हो जाते हैं या इस बच्ची की तरह आत्महत्या कर लेते हैं।
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उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि आरोप क्या है, लेकिन पीड़ित परिवार जो कहता है उसको समझ कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और हरियाणा सरकार को अपने सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए। जो बच्चा कॉलेज जाता है उसको एडवांस में देनी चाहिए। जब सरकार को फीस देनी ही है तो दो-तीन साल तक क्यों लटकाते हैं।
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