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Bhiwani News: पोर्टल में उलझी सरकारी योजना, भटकते रहे लोग
Mon, 23 Sep 2024 06:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 23 Sep 2024 06:12 AM IST
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भिवानी। सरकारी योजनाएं पोर्टल और सर्वर में उलझकर रह गईं हैं। लोग अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए भटक रहे हैं। सरकारी योजनाओं को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ दिया है, लेकिन कभी सर्वर डाउन रहता है तो कभी पोर्टल ठीक से काम नहीं करता। ऐसे में लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) और प्रॉपर्टी आईडी में खामियों की वजह से भी लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। आमदनी अधिक दर्ज होने के कारण भी कई परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
भिवानी जिले में 3,25,000 से अधिक परिवार हैं, जिन्हें पीपीपी के साथ जोड़ दिया गया है। आधार कार्ड के बाद पीपीपी के दायरे में आए ये परिवार अब योजनाओं से ऑनलाइन जुड़ रहे हैं। इसके लिए सरकार ने कई मानक तय किए हैं। जिन परिवारों की आमदनी ज्यादा है वे परिवार पात्र होते हुए भी योजनाओं से नहीं जुड़ पा रहे हैं। इसे पोर्टल की गलती कहें या फिर अधिकारियों की मनमानी। खामियाजा जरूरतमंद परिवार ही भुगत रहे हैं।
सरल केंद्र और नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रिड) के समक्ष भी रोजाना करीब ढाई सौ से तीन सौ शिकायतें आ रहीं हैं। इनमें से अधिकतर तो पीपीपी में अपनी आमदनी की गड़बड़ी सुधारने के लिए पहुंच रहे हैं। राशन कार्ड और अन्य त्रुटियां भी पीपीपी में बड़ी परेशानी बनी हैं।
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पीपीपी के डाटा से ही बुढ़ापा पेंशन और अन्य सभी सरकारी योजनाएं जुड़ गईं हैं। अगर इनमें कोई दिक्कत है तो पात्र परिवार योजना से वंचित रह जाता है। लोग अपने अभिलेखों की गलतियों को ठीक कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कभी सर्वर डाउन बताया जाता है तो कभी पोर्टल ठप। ऐसे में लोगों की सिरदर्दी भी अधिक बढ़ गई है। सरकार को कोई भी पोर्टल लांच करने से पहले सभी पहलुओं को देखते हुए व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। -सुखबीर सिंह।
पोर्टल और सर्वर सरकारी विभागों की एक ऐसी प्रक्रिया हो गई है, जिसमें अधिकतर लोगों की शिकायतें अटकी रह जाती हैं। सरकारी कार्यालयों में बैठे लिपिक भी लोगों को कभी सर्वर तो कभी पोर्टल नहीं चलने का हवाला देकर वापस भेज देते हैं जबकि ये व्यवस्थाएं सरकार को अपने स्तर पर दुरुस्त करानी चाहिए। मैनुअल आवेदन के बजाय लोगों से ऑनलाइन आवेदन कराना जनता की सुविधा के लिए है, लेकिन ये सुविधा ही उनकी बड़ी दुविधा बन गई है। - प्रवीन कुमार।
कई लोगों की उम्र में अगर गलती है। इस कारण उनकी पेंशन समय पर नहीं बन पाती। ऑनलाइन आवेदन के लिए हर बार सीएससी तक जाना पड़ता है जबकि सरकार के समक्ष परिवार की समस्त सूचनाएं, जानकारी, डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है। ऐसे में पात्र लोगों तक योजनाएं स्वत: पहुंचनी चाहिए लेकिन इसके विपरीत हो रहा है। ऑनलाइन आवेदन कर रहे पात्र लोगों को अपात्र दिखा दिया जाता है। ऑनलाइन व्यवस्था की इस खामी को जल्द सुधारा जाना चाहिए। -सुमन।
किसी भी सरकारी विभाग में चले जाओ सब जगह ऑनलाइन सिस्टम लागू किया गया है। इसके बावजूद कई बार मैनुअल आवेदन भी कराए जा रहे हैं। लोगों को सरकारी कार्यालय में पहुंचकर अपनी शिकायतें व्यक्तिगत तौर पर मैनुअल दर्ज करनी पड़ रहीं हैं जबकि सिस्टम ऑनलाइन है। ऑनलाइन सिस्टम को पूरी तरह से विकसित किया जाना चाहिए। सभी संबंधित पक्षों की जरूरतों के अनुरूप रिकॉर्ड दुरुस्त होने तक लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा। -दुर्गेश।
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भिवानी जिले में 3,25,000 से अधिक परिवार हैं, जिन्हें पीपीपी के साथ जोड़ दिया गया है। आधार कार्ड के बाद पीपीपी के दायरे में आए ये परिवार अब योजनाओं से ऑनलाइन जुड़ रहे हैं। इसके लिए सरकार ने कई मानक तय किए हैं। जिन परिवारों की आमदनी ज्यादा है वे परिवार पात्र होते हुए भी योजनाओं से नहीं जुड़ पा रहे हैं। इसे पोर्टल की गलती कहें या फिर अधिकारियों की मनमानी। खामियाजा जरूरतमंद परिवार ही भुगत रहे हैं।
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सरल केंद्र और नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रिड) के समक्ष भी रोजाना करीब ढाई सौ से तीन सौ शिकायतें आ रहीं हैं। इनमें से अधिकतर तो पीपीपी में अपनी आमदनी की गड़बड़ी सुधारने के लिए पहुंच रहे हैं। राशन कार्ड और अन्य त्रुटियां भी पीपीपी में बड़ी परेशानी बनी हैं।
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पीपीपी के डाटा से ही बुढ़ापा पेंशन और अन्य सभी सरकारी योजनाएं जुड़ गईं हैं। अगर इनमें कोई दिक्कत है तो पात्र परिवार योजना से वंचित रह जाता है। लोग अपने अभिलेखों की गलतियों को ठीक कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कभी सर्वर डाउन बताया जाता है तो कभी पोर्टल ठप। ऐसे में लोगों की सिरदर्दी भी अधिक बढ़ गई है। सरकार को कोई भी पोर्टल लांच करने से पहले सभी पहलुओं को देखते हुए व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। -सुखबीर सिंह।
पोर्टल और सर्वर सरकारी विभागों की एक ऐसी प्रक्रिया हो गई है, जिसमें अधिकतर लोगों की शिकायतें अटकी रह जाती हैं। सरकारी कार्यालयों में बैठे लिपिक भी लोगों को कभी सर्वर तो कभी पोर्टल नहीं चलने का हवाला देकर वापस भेज देते हैं जबकि ये व्यवस्थाएं सरकार को अपने स्तर पर दुरुस्त करानी चाहिए। मैनुअल आवेदन के बजाय लोगों से ऑनलाइन आवेदन कराना जनता की सुविधा के लिए है, लेकिन ये सुविधा ही उनकी बड़ी दुविधा बन गई है। - प्रवीन कुमार।
कई लोगों की उम्र में अगर गलती है। इस कारण उनकी पेंशन समय पर नहीं बन पाती। ऑनलाइन आवेदन के लिए हर बार सीएससी तक जाना पड़ता है जबकि सरकार के समक्ष परिवार की समस्त सूचनाएं, जानकारी, डाटा ऑनलाइन उपलब्ध है। ऐसे में पात्र लोगों तक योजनाएं स्वत: पहुंचनी चाहिए लेकिन इसके विपरीत हो रहा है। ऑनलाइन आवेदन कर रहे पात्र लोगों को अपात्र दिखा दिया जाता है। ऑनलाइन व्यवस्था की इस खामी को जल्द सुधारा जाना चाहिए। -सुमन।
किसी भी सरकारी विभाग में चले जाओ सब जगह ऑनलाइन सिस्टम लागू किया गया है। इसके बावजूद कई बार मैनुअल आवेदन भी कराए जा रहे हैं। लोगों को सरकारी कार्यालय में पहुंचकर अपनी शिकायतें व्यक्तिगत तौर पर मैनुअल दर्ज करनी पड़ रहीं हैं जबकि सिस्टम ऑनलाइन है। ऑनलाइन सिस्टम को पूरी तरह से विकसित किया जाना चाहिए। सभी संबंधित पक्षों की जरूरतों के अनुरूप रिकॉर्ड दुरुस्त होने तक लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा। -दुर्गेश।