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Bhiwani News: दर्दनाक हादसे में महिला समेत चार लोगों की मौत से मुंढाल में मचा कोहराम
Sat, 08 Jul 2023 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 08 Jul 2023 10:28 PM IST
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भिवानी: गांव मुंढाल खुर्द में सड़क हादसे की सूचना के बाद सुनसान पड़ी गली।
मुंढाल (भिवानी)। जींद जिले में हुए दर्दनाक हादसे में किसी परिवार की पांच तो किसी की तीन बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं बूढ़े माता-पिता की आंखों के सामने ही दूसरे बेटे की अर्थी घर से उठती देखकर जिंदगी भी मौत से बदतर हो गई। एक हादसे ने हंसते खेलते परिवार को उजाड़ डाला। महिला हीरा भी घर से अपने दोहते के जन्म पर हंसी खुशी खाना लेकर अस्पताल में अपनी बेटी के पास जा रही थी। लेकिन उसे क्या पता था कि उसका ये आखिरी मौत का सफर होगा। एक ही गांव में चार लोगों की मौत से गांव में कोहराम मच गया।
भिवानी-जींद मार्ग पर गांव बीबीपुर के समीप शनिवार सुबह भिवानी डिपो की रोडवेज बस और क्रूजर गाड़ी की आमने सामने की टक्कर हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि क्रूजर गाड़ी के परखचे उड़ गए। वहीं इसमें सवार मुंढाल निवासी महिला हीरा (45), मनोज ढुल (45), क्रूजर का चालक प्रदीप (45) और मुंढाल के बांड़ाहेड़ी पाना निवासी सुखबिंद्र (30) की मौके पर ही मौत हो गई। इस सड़क हादसे में करीब आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई। वहीं घायलों को पहले जींद और फिर पीजीआई ले जाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृतकों के शवों को जींद के नागरिक अस्पताल भेज दिया। सड़क हादसे की सूचना गांव मुंढाल खुर्द में पहुंची। इसके बाद परिजनों में भी कोहराम मच गया। शनिवार शाम को गांव मुंढाल के तीन अलग-अलग श्मशान घाटों में चार चिताएं जलाई गईं। इस दौरान ग्रामीणों भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
चालक प्रदीप भी परिवार के गुजर बसर के लिए काफी सालों से मुंढाल से जींद तक क्रूजर गाड़ी चलाकर सवारियां ढोने का काम करता था। एक हादसे ने एक ही गांव के चार लोगों को मौत के आगोश में सुला डाला। मुंढाल में शनिवार का दिन मातम में बदल गया। सगे संबंधी और परिजन शवों को लेने के लिए जींद अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े, वहीं पड़ोसियों का उनके घर मातम में तांता लग गया। संवाद
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मनोज जींद में करता था फाइनेंस का काम
हादसे में मृतक मनोज ढुल का जींद में फाइनेंस कंपनी का काम था। वह रोजाना की तरह ही गांव के प्रदीप की क्रूजर गाड़ी में बैठकर जींद जा रहा था। मनोज की पांच बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। मनोज के छोटे भाई की करीब तीन साल पहले ही मौत हो गई थी। इसके बाद मनोज ही बूढ़े पिता सतबीर और मां का इकलौता सहारा था। मनोज की सड़क हादसे में मौत की खबर सुनकर मां बेहोश हो गई और पिता भी सन्न रह गया। उसके दिमाग पर गहरी ठेस पहुंची। सतबीर अपनी आंखों के सामने दूसरे बेटे की घर से अर्थी देखकर अपनी सुधबुध खो बैठा। मनोज की गांव में थोड़ी बहुत खेती की जमीन भी है, मगर वह कई सालों से फाइनेंस का काम करता था, जबकि खेत को बटाई पर दे देता था। दोनों बेटों की मौत के बाद अब बूढ़े सतबीर के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी है।
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हीरा की बेटी को हुआ था लड़का, खाना देने जा रही थी जींद
गांव मुंढाल खुद की 45 वर्षीय हीरा भी तीन बच्चों की मां है। उसकी दो लड़की और एक लड़का है। तीनों बच्चे शादीशुदा हैं। उसकी बेटी को दो दिन पहले ही लड़का पैदा हुआ था। जो एक अस्पताल में भर्ती है। शनिवार सुबह हीरा घर से खाना बनाकर अपनी बेटी को देने के लिए अस्पताल में जा रही थी। इसी दौरान मौत ने उसे आ जकड़ा। बेटी के परिवार और हीरा के घर पर भी लड़के के जन्म की खुशी मातम में बदल गई।
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प्रदीप कई सालों से था गाड़ी चालक
क्रूजर का चालक मुंढाल खुर्द निवासी प्रदीप ने भी होश संभालने के बाद मुंढाल से जींद के लिए सवारियां ढोने का काम शुरू किया था। उसकी सात साल की बड़ी लड़की और चार साल का एक लड़का है। प्रदीप का भाई भी गाड़ी चलाने का काम करता है।
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पीडब्ल्यूडी विभाग में डॉटा एंट्री ऑपरेटर था सुखबिंद्र
बांड़ाहेड़ी निवासी 30 साल का सुखबिंद्र जींद में पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय में बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर कार्य करता था। रोजाना की तरह ही वह घर से जींद में अपने कार्यालय में काम पर जा रहा था। सुखबिंद्र शादीशुदा और तीन लड़कियों का पिता था। सुखबिंद्र की मौत से तीन बेटियों के सिर से पिता का साया उठा गया।
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भिवानी-जींद मार्ग पर गांव बीबीपुर के समीप शनिवार सुबह भिवानी डिपो की रोडवेज बस और क्रूजर गाड़ी की आमने सामने की टक्कर हो गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि क्रूजर गाड़ी के परखचे उड़ गए। वहीं इसमें सवार मुंढाल निवासी महिला हीरा (45), मनोज ढुल (45), क्रूजर का चालक प्रदीप (45) और मुंढाल के बांड़ाहेड़ी पाना निवासी सुखबिंद्र (30) की मौके पर ही मौत हो गई। इस सड़क हादसे में करीब आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई। वहीं घायलों को पहले जींद और फिर पीजीआई ले जाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृतकों के शवों को जींद के नागरिक अस्पताल भेज दिया। सड़क हादसे की सूचना गांव मुंढाल खुर्द में पहुंची। इसके बाद परिजनों में भी कोहराम मच गया। शनिवार शाम को गांव मुंढाल के तीन अलग-अलग श्मशान घाटों में चार चिताएं जलाई गईं। इस दौरान ग्रामीणों भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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चालक प्रदीप भी परिवार के गुजर बसर के लिए काफी सालों से मुंढाल से जींद तक क्रूजर गाड़ी चलाकर सवारियां ढोने का काम करता था। एक हादसे ने एक ही गांव के चार लोगों को मौत के आगोश में सुला डाला। मुंढाल में शनिवार का दिन मातम में बदल गया। सगे संबंधी और परिजन शवों को लेने के लिए जींद अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े, वहीं पड़ोसियों का उनके घर मातम में तांता लग गया। संवाद
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मनोज जींद में करता था फाइनेंस का काम
हादसे में मृतक मनोज ढुल का जींद में फाइनेंस कंपनी का काम था। वह रोजाना की तरह ही गांव के प्रदीप की क्रूजर गाड़ी में बैठकर जींद जा रहा था। मनोज की पांच बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। मनोज के छोटे भाई की करीब तीन साल पहले ही मौत हो गई थी। इसके बाद मनोज ही बूढ़े पिता सतबीर और मां का इकलौता सहारा था। मनोज की सड़क हादसे में मौत की खबर सुनकर मां बेहोश हो गई और पिता भी सन्न रह गया। उसके दिमाग पर गहरी ठेस पहुंची। सतबीर अपनी आंखों के सामने दूसरे बेटे की घर से अर्थी देखकर अपनी सुधबुध खो बैठा। मनोज की गांव में थोड़ी बहुत खेती की जमीन भी है, मगर वह कई सालों से फाइनेंस का काम करता था, जबकि खेत को बटाई पर दे देता था। दोनों बेटों की मौत के बाद अब बूढ़े सतबीर के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी है।
हीरा की बेटी को हुआ था लड़का, खाना देने जा रही थी जींद
गांव मुंढाल खुद की 45 वर्षीय हीरा भी तीन बच्चों की मां है। उसकी दो लड़की और एक लड़का है। तीनों बच्चे शादीशुदा हैं। उसकी बेटी को दो दिन पहले ही लड़का पैदा हुआ था। जो एक अस्पताल में भर्ती है। शनिवार सुबह हीरा घर से खाना बनाकर अपनी बेटी को देने के लिए अस्पताल में जा रही थी। इसी दौरान मौत ने उसे आ जकड़ा। बेटी के परिवार और हीरा के घर पर भी लड़के के जन्म की खुशी मातम में बदल गई।
प्रदीप कई सालों से था गाड़ी चालक
क्रूजर का चालक मुंढाल खुर्द निवासी प्रदीप ने भी होश संभालने के बाद मुंढाल से जींद के लिए सवारियां ढोने का काम शुरू किया था। उसकी सात साल की बड़ी लड़की और चार साल का एक लड़का है। प्रदीप का भाई भी गाड़ी चलाने का काम करता है।
पीडब्ल्यूडी विभाग में डॉटा एंट्री ऑपरेटर था सुखबिंद्र
बांड़ाहेड़ी निवासी 30 साल का सुखबिंद्र जींद में पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय में बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर कार्य करता था। रोजाना की तरह ही वह घर से जींद में अपने कार्यालय में काम पर जा रहा था। सुखबिंद्र शादीशुदा और तीन लड़कियों का पिता था। सुखबिंद्र की मौत से तीन बेटियों के सिर से पिता का साया उठा गया।