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Bhiwani News: फर्जीवाड़ा...पोर्टल पर मेवात के ठगों ने भिवानी में कराया फसल पंजीकरण
Tue, 16 Sep 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:08 AM IST
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गांव तालू में फसल का फर्जी पंजीकरण दिखाते पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान।
भिवानी। जिले में बाढ़ से किसानों की फसलें भले ही बर्बाद हो चुकी हों लेकिन इस आपदा को भी कुछ ठग अवसर में बदलकर फर्जीवाड़ा करने से नहीं चूक रहे। ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर फसल पंजीकरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का नया मामला सामने आया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि भिवानी जिले के कई गांवों की जमीनों पर मेवात और अन्य जिलों के ठगों ने फर्जी तरीके से फसल पंजीकरण करा लिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक लगी तो हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के सहारे चल रही है।
अब जिला प्रशासन ने दूसरे जिलों के किसानों द्वारा किए गए पंजीकरण पर सख्ती बरतने का फैसला लिया है। ऐसे मामलों में तहसीलदार के माध्यम से विशेष सत्यापन (स्पेशल वेरिफिकेशन) कराए जाने के बाद ही पंजीकरण स्वीकार किया जाएगा। जिले में करीब दो साल पहले भी इसी तरह का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था जिसमें 100 से अधिक लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज कराए गए थे और जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।
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दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसान
भिवानी जिले में अब तक ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर 1,13,281 किसानों ने 6,06,309 एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है जबकि 25,153 एकड़ भूमि का पंजीकरण अभी लंबित है। किसान तब चौंक गए जब वे अपनी फसल का पंजीकरण कराने पहुंचे और उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जमीन पर तो पहले से किसी अन्य व्यक्ति के नाम से पंजीकरण दर्ज है। ऐसे किसान अब कृषि विभाग और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
ऑनलाइन रिकाॅर्ड से लीक हो रहा डाटा :
कृषि विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि इस काम में एक गिरोह सक्रिय है। गिरोह पहले ऐसे किसानों की पहचान कर रहा है जो पंजीकरण नहीं कराते या फिर अपनी जमीन पर खेती नहीं करते। आशंका यह भी जताई जा रही है कि राजस्व विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड से जमीन संबंधी डेटा लीक हो रहा है। क्योंकि ऑनलाइन पंजीकरण से पहले भूमि संबंधी विवरण डिजिटल रिकॉर्ड से लिया जाता है। हालांकि वे यह बात ऑन कैमरा नहीं बताना चाहते।
मेवात निवासी व्यक्ति के नाम मिला पंजीकरण
गांव तालू निवासी पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने बताया कि पिछले 20 सालों से वह अपनी पुश्तैनी जमीन को ठेके या बटाई पर देता आ रहा है। खेतों में अभी जलभराव बना हुआ है। सोमवार को जब वह सीएससी पर क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबा दर्ज कराने गया तो हैरान रह गया। उसकी छह एकड़ भूमि पर मेवात निवासी एक व्यक्ति ने अपने नाम से ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करा रखा था जबकि उसकी खुद के नाम पर मात्र एक एकड़ जमीन का पंजीकरण हुआ। पोर्टल पर आरोपी का फोटो और मोबाइल नंबर तक दर्ज था। ईश्वर मान ने तत्काल समाधान शिविर में इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अधिकारियों ने संज्ञान लिया। उन्होंने आरोपियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों के साथ यह एक बड़ा धोखा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।
कई खंडों में पहले भी उजागर हुआ था घोटाला
करीब दो साल पहले भी भिवानी, बहल, तोशाम, कैरू, लोहारू और बवानीखेड़ा खंडों में फसल पंजीकरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस मामले में फर्जी किसानों के नाम पर पंजीकरण कराकर सरकारी भुगतान भी फर्जी खातों में पहुंचा दिया गया था। मामला जब जिला कष्ट निवारण समिति में तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के सामने पहुंचा तो तत्काल जांच के आदेश दिए गए। जांच प्रशासन से होते हुए स्टेट क्राइम ब्रांच तक पहुंची। इस घोटाले में 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और करोड़ों रुपये की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराई गई। हालांकि जांच अभी जारी है लेकिन फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा। सीएससी के माध्यम से यह धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। इसमें न केवल फर्जी किसान बनाए गए बल्कि फर्जी बैंक खाते खोलकर सरकारी भुगतान भी हड़पने की साजिश रची जा रही है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस संबंध में मैंने कृषि निदेशालय के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। अब दूसरे जिलों के किसानों द्वारा पंजीकरण कराने पर तहसीलदार से विशेष सत्यापन कराया जाएगा। फर्जी पंजीकरण की शिकायतें पोर्टल पर दर्ज होते ही गलत पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जा रहा है। पहले सामने आए मामलों की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है। - डॉ. विनोद फौगाट, कृषि उपनिदेशक, भिवानी
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जांच में खुलासा हुआ है कि भिवानी जिले के कई गांवों की जमीनों पर मेवात और अन्य जिलों के ठगों ने फर्जी तरीके से फसल पंजीकरण करा लिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक लगी तो हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के सहारे चल रही है।
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अब जिला प्रशासन ने दूसरे जिलों के किसानों द्वारा किए गए पंजीकरण पर सख्ती बरतने का फैसला लिया है। ऐसे मामलों में तहसीलदार के माध्यम से विशेष सत्यापन (स्पेशल वेरिफिकेशन) कराए जाने के बाद ही पंजीकरण स्वीकार किया जाएगा। जिले में करीब दो साल पहले भी इसी तरह का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था जिसमें 100 से अधिक लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज कराए गए थे और जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।
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दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसान
भिवानी जिले में अब तक ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर 1,13,281 किसानों ने 6,06,309 एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है जबकि 25,153 एकड़ भूमि का पंजीकरण अभी लंबित है। किसान तब चौंक गए जब वे अपनी फसल का पंजीकरण कराने पहुंचे और उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जमीन पर तो पहले से किसी अन्य व्यक्ति के नाम से पंजीकरण दर्ज है। ऐसे किसान अब कृषि विभाग और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
ऑनलाइन रिकाॅर्ड से लीक हो रहा डाटा :
कृषि विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि इस काम में एक गिरोह सक्रिय है। गिरोह पहले ऐसे किसानों की पहचान कर रहा है जो पंजीकरण नहीं कराते या फिर अपनी जमीन पर खेती नहीं करते। आशंका यह भी जताई जा रही है कि राजस्व विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड से जमीन संबंधी डेटा लीक हो रहा है। क्योंकि ऑनलाइन पंजीकरण से पहले भूमि संबंधी विवरण डिजिटल रिकॉर्ड से लिया जाता है। हालांकि वे यह बात ऑन कैमरा नहीं बताना चाहते।
मेवात निवासी व्यक्ति के नाम मिला पंजीकरण
गांव तालू निवासी पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने बताया कि पिछले 20 सालों से वह अपनी पुश्तैनी जमीन को ठेके या बटाई पर देता आ रहा है। खेतों में अभी जलभराव बना हुआ है। सोमवार को जब वह सीएससी पर क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबा दर्ज कराने गया तो हैरान रह गया। उसकी छह एकड़ भूमि पर मेवात निवासी एक व्यक्ति ने अपने नाम से ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करा रखा था जबकि उसकी खुद के नाम पर मात्र एक एकड़ जमीन का पंजीकरण हुआ। पोर्टल पर आरोपी का फोटो और मोबाइल नंबर तक दर्ज था। ईश्वर मान ने तत्काल समाधान शिविर में इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अधिकारियों ने संज्ञान लिया। उन्होंने आरोपियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों के साथ यह एक बड़ा धोखा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।
कई खंडों में पहले भी उजागर हुआ था घोटाला
करीब दो साल पहले भी भिवानी, बहल, तोशाम, कैरू, लोहारू और बवानीखेड़ा खंडों में फसल पंजीकरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस मामले में फर्जी किसानों के नाम पर पंजीकरण कराकर सरकारी भुगतान भी फर्जी खातों में पहुंचा दिया गया था। मामला जब जिला कष्ट निवारण समिति में तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के सामने पहुंचा तो तत्काल जांच के आदेश दिए गए। जांच प्रशासन से होते हुए स्टेट क्राइम ब्रांच तक पहुंची। इस घोटाले में 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और करोड़ों रुपये की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराई गई। हालांकि जांच अभी जारी है लेकिन फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा। सीएससी के माध्यम से यह धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। इसमें न केवल फर्जी किसान बनाए गए बल्कि फर्जी बैंक खाते खोलकर सरकारी भुगतान भी हड़पने की साजिश रची जा रही है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस संबंध में मैंने कृषि निदेशालय के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। अब दूसरे जिलों के किसानों द्वारा पंजीकरण कराने पर तहसीलदार से विशेष सत्यापन कराया जाएगा। फर्जी पंजीकरण की शिकायतें पोर्टल पर दर्ज होते ही गलत पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जा रहा है। पहले सामने आए मामलों की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है। - डॉ. विनोद फौगाट, कृषि उपनिदेशक, भिवानी