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हादसे के चार दिन बीते... पहाड़ दरकने वाला क्षेत्र किसके अधीन, मालूम नहीं
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डाडम में पत्थरों के बीच से वाहनों का मलबा निकालती मशीन। संवाद
- फोटो : Bhiwani
तोशाम। विगत एक जनवरी को डाडम में दरके पहाड़ के क्षेत्र से संबंध रखने वाले खनन और वन विभाग घटना के चार दिन बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं कर सके हैं। अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि पहाड़ दरकने वाला क्षेत्र किस विभाग के अधीन है। दोनों विभागों के अधिकारी अपना बचाव करते नजर आ रहे हैं।
विगत एक जनवरी को गांव डाडम पहाड़ी में खदान नंबर 37-38 में बड़ी-बड़ी शिलाएं खिसक गई और हादसे में पांच व्यक्तियों की मौत और दो लोग घायल हो गए। मंगलवार तक एनडीआरएफ टीम द्वारा मलबे को हटाकर दबे वाहनों को निकाला। हादसे के बाद क्षेत्र को अरावली का क्षेत्र बताया जा रहा है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। खनन विभाग के अधिकारी सर्वेयर बुलाकर सर्वे करवाने की बात कह रहे हैं। मामले में गृहमंत्री तक की नजर होने के बावजूद चार दिन बाद भी दोनों विभाग अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। वन विभाग के रेंजर जयपाल ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को ही चार्ज लिया है। जानकारी की जाएगी कि इलाका किसका है। वहीं सोमवार को घटनास्थल पर मौजूद डिप्टी रेंजर दीपक यादव ने नए रेंजर का फोन नंबर देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
हमारे विभाग के सर्वेयर आने के बाद जानकारी हो सकेगी कि इलाका किस विभाग का है। यह जगह दोनों विभागों की सीमा पर स्थित है। जांच के बाद पता चल सकेगा कि यह हिस्सा किस विभाग की जद में आता है।
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- भूपेंद्र सिंह, जिला अधिकारी, खनन विभाग
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विगत एक जनवरी को गांव डाडम पहाड़ी में खदान नंबर 37-38 में बड़ी-बड़ी शिलाएं खिसक गई और हादसे में पांच व्यक्तियों की मौत और दो लोग घायल हो गए। मंगलवार तक एनडीआरएफ टीम द्वारा मलबे को हटाकर दबे वाहनों को निकाला। हादसे के बाद क्षेत्र को अरावली का क्षेत्र बताया जा रहा है। हालांकि वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। खनन विभाग के अधिकारी सर्वेयर बुलाकर सर्वे करवाने की बात कह रहे हैं। मामले में गृहमंत्री तक की नजर होने के बावजूद चार दिन बाद भी दोनों विभाग अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। वन विभाग के रेंजर जयपाल ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को ही चार्ज लिया है। जानकारी की जाएगी कि इलाका किसका है। वहीं सोमवार को घटनास्थल पर मौजूद डिप्टी रेंजर दीपक यादव ने नए रेंजर का फोन नंबर देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
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हमारे विभाग के सर्वेयर आने के बाद जानकारी हो सकेगी कि इलाका किस विभाग का है। यह जगह दोनों विभागों की सीमा पर स्थित है। जांच के बाद पता चल सकेगा कि यह हिस्सा किस विभाग की जद में आता है।
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- भूपेंद्र सिंह, जिला अधिकारी, खनन विभाग