फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   field purchasing, rajistri office, people

नए सॉफ्टवेयर में खामी और टोकन के फेर में अटका जमीन की बिक्री का काम

Tue, 06 Oct 2020 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 12:36 AM IST
विज्ञापन
field purchasing, rajistri office, people
रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर खड़े गांव प्रलादगढ़ निवासी राजेन्द्र व विरेन्द्र सिंह अपनी आपबिती ब? - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
विज्ञापन

भिवानी। साहब पिछले तीन महीने से ढाई एकड़ भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं। पहले कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अपडेट की दुहाई दी गई और अब सॉफ्टवेयर काम नहीं करने की बहानेबाजी अधिकारियों की नीयत बन गई। नंबरदार और गवाह को लेकर हर सप्ताह में तीन दिन चक्कर लगा रहा हूं, अब तक रजिस्ट्री नहीं बनी। यह दर्द भूमि की खरीद फरोख्त के लिए तहसील कार्यालय में आने वाले हर शख्स की जुबां पर आ रहा है। नए सॉफ्टवेयर की उलझन में सरकारी विभाग फंसे हैं तो वहीं सॉफ्टवेयर और टोकन के फेर में भूमि की रजिस्ट्रियों का मामला उलझकर रह गया है।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जो भूमि ग्रामीण इलाके की है, नए सॉफ्टवेयर में वो भी शहरी दायरे में दर्शा रही है। सबसे अहम बात तो यह है कि शहर के आसपास के 12 गांवों की रजिस्ट्रियां ही उलझन में फंस गई हैं, क्योंकि शहरी और ग्रामीण दायरे का आंकलन कर पाना मुश्किल हो गया है। वहीं आधा दर्जन गांव तो सॉफ्टवेयर से ही गायब हैं।
विज्ञापन

यूं झलका रजिस्ट्री कार्यालय में आए लोगों का दर्द
गांव प्रहलादगढ़ निवासी राजेंद्र, नंबरदार वीरेंद्र सिंह व रमेश कुमार ने बताया कि करीब ढाई एकड़ भूमि की राजेंद्र को रजिस्ट्री करानी थी, लेकिन कभी सॉफ्टवेयर की दिक्कत तो कभी तहसीलदार न होने की बहानेबाजी चलती रही। अब सभी कागजात पूरे हैं, फिर भी उसकी रजिस्ट्री दो गांवों की भूमि बताकर नहीं की जा रही है। अब मेरी जमीन तो एक ही गांव में है, साफ्टवेयर दो गांवों में दर्शा रहा है तो इसमें मेरी क्या गलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नए सॉफ्टवेयर में इन तकनीकी बातों का नहीं कोई जवाब
नंबर एक : पीआईडी (प्रॉपर्टी आईडी) फॉर्म आने के बाद भी सॉफ्टवेयर में नहीं दर्शाता है। पीआईडी में प्रार्थी का नाम भी नहीं उठाता है। पीआईडी में अगर रकबा 200 वर्गगज का है, लेकिन प्रार्थी उसका आधा हिस्सा बेचता है तो पूरा हिस्सा ही बिकेगा, आधा बिक्री नहीं हो सकता। पीआईडी अपडेट नहीं है।
नंबर दो : कुछ गांवों का रकबा रूरल व अर्बन के तहत आता है। उनका टोकन सिर्फ अर्बन के तहत दर्शा रहा है, रूरल नहीं बता रहा है। ये समस्या भिवानी जोनपाल, भिवानी लोहड़, पालुवास, हालुवास, कालुवास, राजपुरा खरकड़ी, कोंट, निनान, देवसर, बापोड़ा, ढाणा लाडनपुर व तिगड़ाना गांव में आ रही है।
नंबर तीन : सात ए के तहत आने वाले गांवों का टोकन नहीं कट रहा है। सात ए के तहत अब तक कोई रजिस्ट्री नहीं हुई है। इसमें भिवानी जोनपाल, लोहड, पालुवास, हालुवास, कालुवास, राजपुरा खरकड़ी, कोंट, निनान, देवसर, बापोड़ा, ढाणा लाडनपुर, बामला, प्रेमनगर, सांगा, उमरावत, प्रहलादगढ़, नाथुवास, गुजरानी, ढाणा नरसान, नौरंगाबाद गांव शामिल हैं।
नंबर चार : एक खेवट में किस्म अलग अलग हैं, जैसे नहरी, चाही, ताल, टिब्बा, मगर सॉफ्टवेयर और टोकन प्रक्रिया में सिर्फ एक ही किस्म दर्शा रहा है।
नंबर पांच : सॉफ्टवेयर ग्रामीण क्षेत्र को भी शहरी दायरे में दर्शा रहा है। इनमें गांव कलिंगा, दिनोद, रिवाड़ीखेड़ा, तिगड़ी, धिराना कलां, मिताथल, बाबरवास, खरक खुर्द गांवों की भूमि रूरल में हैं, मगर ऑनलाइन टोकन अर्बन के काट रहा है।
नंबर छह : सॉफ्टवेयर में हकत्याग पत्र में लेन-देन प्रतिबंधित है, लेकिन टोकन करते समय हकत्याग पत्र में लेन-देन दर्शा रहा है। स्टांप ड्यूटी व पूरी रजिस्ट्रेशन फीस भी दर्शा रहा है।
नंबर सात : सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन टोकन काटने के दौरान कुछ गांव ही नहीं दर्शा रहा है। इसमें चांग, सिरसा घोघड़ा, फुलपुरा, लेघा भानान, रिवाड़ीखेड़ा, चंदावास, तिगड़ी, प्रेमनगर गांव शामिल हैं।
नंबर आठ : सॉफ्टवेयर में एक खेवट में कई खतौनी हो और कई खसरे हो तो वह सिर्फ एक ही खतौनी के खसरे उठाता है बाकी के नहीं दर्शा रहा है। जो खेवट बंट जाती हैं वह भी नहीं दर्शा रहा है।
नंबर नौ : जिले की बवानीखेड़ा तहसील में कोई भी गांव सात ए के तहत नहीं है, लेकिन सॉफ्टवेयर सिर्फ आठ गांवों को छोड़कर बाकी सभी गांव सात ए के तहत दर्शा रहा है। इसी तरह तहसील लोहारू, सिवानी, बवानीखेड़ा और भिवानी में ये गांव रूरल की बजाए अर्बन के तहत दर्शा रहा है। टोकन लेने वाले अर्बन के टोकन लाते हैं मगर शहरी दायरे में दो फीसदी स्टांप ड्यूटी ज्यादा है।
नंबर दस : टोकन काटते समय कुछ खेवट जो टोकन में तो मिल जाती हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर में वही खेवट नहीं दर्शाती। जिले के तहसील तोशाम में गांव खानक की खेवट 1384 व 1603 है, इसमें न तो यह टोकन में खेवट दिखाता है न ही सॉफ्टवेयर में दर्शाता है।

वर्जन-
शहरी और ग्रामीण दायरे की रजिस्ट्रियों में सभी विभागों से ऑनलाइन एनओसी व पीआईडी की शर्त लागू की गई है। चंडीगढ़ मुख्यालय से ही टोकन ऑनलाइन कट रहे हैं। नए सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों की वजह से अब मुश्किल से 30 से 50 रजिस्ट्रियां ही हो पाती हैं। मैनुअल कुछ नहीं कर सकते, ऑनलाइन में अगर ठीक है तो ठीक नहीं तो रजिस्ट्री नहीं होती है।
- रामचंद्र, नायब तहसीलदार भिवानी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed