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Bhiwani News: तीन माह बाद भी दांग खुर्द के जलघर से नहीं मिटे जलभराव के निशान, घरों में पहुंच रहा दूषित पानी
Thu, 06 Nov 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 06 Nov 2025 01:29 AM IST
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गांव दांग खुर्द के जलघर में जमा बारिश का पानी।
भिवानी। गांव दांग खुर्द के जलघर में तीन माह बीत जाने के बाद भी बरसाती जलभराव के निशान अब तक नहीं मिटे हैं। जलघर के फिल्टर टैंक और बूस्टर टैंक के अंदर अब भी गंदगी जमी हुई है जहां बदबूदार और दूषित पानी जमा है। यही दूषित पानी गांव के घरों तक पेयजल आपूर्ति के रूप में पहुंच रहा है जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। नल खोलते ही बदबू आने से लोग पानी का उपयोग करने से कतराने लगे हैं। ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरन टैंकरों का सहारा ले रहे हैं।
गांव के जलघर की मशीनें भी जलभराव के दौरान मिट्टी और कचरे में धंस गई थीं। इन्हें फिलहाल चलाया तो जा रहा है लेकिन उचित रखरखाव न होने से इनके कभी भी जाम हो जाने की आशंका बनी हुई है। बारिश के दौरान जलघर में तीन से चार फीट तक पानी भर गया था। उस समय टैंक और जलभराव के पानी में फर्क करना मुश्किल हो गया था। अब भले ही पानी का स्तर घट गया हो परंतु टैंकों में गंदगी, काई और बदबू अब भी बरकरार है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने अब तक टैंकों की सफाई कराने की जरूरत तक नहीं समझी है।
नलों से आ रहा पीले रंग का पानी
बरसाती जलभराव के बाद जलघर के टैंकों में जमा गंदगी के कारण घरों तक पहुंच रहा पानी पीले रंग का और बदबूदार हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी पीना तो दूर, हाथ में लेने से भी देर तक बदबू बनी रहती है। इस दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां जैसे उल्टी, दस्त और संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जलघर के फिल्टर और बूस्टर टैंकों की तुरंत सफाई कराने की मांग की है।
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पूरे गांव में एक ही पानी का टैंकर, दो से तीन दिन में आता है
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग गांव में केवल एक पानी का टैंकर भेज रहा है जो दो से तीन दिन में एक बार ही पहुंचता है। एक परिवार को केवल एक छोटा ड्रम यानी लगभग दस लीटर स्वच्छ पानी दिया जा रहा है। जबकि सरकार का दावा है कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 75 लीटर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सीमित पानी से ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें मजबूरन जलघर से मिलने वाले दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है।
पेट संक्रमण, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं
दूषित पानी पीने से पेट संक्रमण, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं। दूषित पानी से नहाने के कारण चर्म रोग और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी रहता है। लोगों को चाहिए कि पानी को उबालकर ही उपयोग करें। उबला हुआ पानी संक्रमण से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है। - डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज भिवानी
दूषित पानी जमा होने से गांव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। छोटे बच्चे बीमार हो रहे हैं। लोग खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की जा रही है। - राकेश यादव, ग्रामीण
गांव के जलघर में तीन माह से दूषित पानी जमा है। पीने के पानी की जगह गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते चर्म रोग, उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। - ओमबीर, ग्रामीण
उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया
गांव दांग खुर्द के जलघर सहित कई जगहों पर बरसाती जलभराव रहा है। अब जलघर में पानी का स्तर काफी कम हो गया है। जलघर से पेयजल आपूर्ति जारी है और साथ ही पानी के टैंकर से भी आपूर्ति कराई जा रही है। जलघर के टैंकों की सफाई के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - योगेश, कनिष्ठ अभियंता, ग्रामीण पेयजल शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
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गांव के जलघर की मशीनें भी जलभराव के दौरान मिट्टी और कचरे में धंस गई थीं। इन्हें फिलहाल चलाया तो जा रहा है लेकिन उचित रखरखाव न होने से इनके कभी भी जाम हो जाने की आशंका बनी हुई है। बारिश के दौरान जलघर में तीन से चार फीट तक पानी भर गया था। उस समय टैंक और जलभराव के पानी में फर्क करना मुश्किल हो गया था। अब भले ही पानी का स्तर घट गया हो परंतु टैंकों में गंदगी, काई और बदबू अब भी बरकरार है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने अब तक टैंकों की सफाई कराने की जरूरत तक नहीं समझी है।
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नलों से आ रहा पीले रंग का पानी
बरसाती जलभराव के बाद जलघर के टैंकों में जमा गंदगी के कारण घरों तक पहुंच रहा पानी पीले रंग का और बदबूदार हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी पीना तो दूर, हाथ में लेने से भी देर तक बदबू बनी रहती है। इस दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां जैसे उल्टी, दस्त और संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से जलघर के फिल्टर और बूस्टर टैंकों की तुरंत सफाई कराने की मांग की है।
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पूरे गांव में एक ही पानी का टैंकर, दो से तीन दिन में आता है
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग गांव में केवल एक पानी का टैंकर भेज रहा है जो दो से तीन दिन में एक बार ही पहुंचता है। एक परिवार को केवल एक छोटा ड्रम यानी लगभग दस लीटर स्वच्छ पानी दिया जा रहा है। जबकि सरकार का दावा है कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 75 लीटर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सीमित पानी से ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें मजबूरन जलघर से मिलने वाले दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है।
पेट संक्रमण, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं
दूषित पानी पीने से पेट संक्रमण, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं। दूषित पानी से नहाने के कारण चर्म रोग और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी रहता है। लोगों को चाहिए कि पानी को उबालकर ही उपयोग करें। उबला हुआ पानी संक्रमण से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है। - डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज भिवानी
दूषित पानी जमा होने से गांव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। छोटे बच्चे बीमार हो रहे हैं। लोग खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की जा रही है। - राकेश यादव, ग्रामीण
गांव के जलघर में तीन माह से दूषित पानी जमा है। पीने के पानी की जगह गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते चर्म रोग, उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। - ओमबीर, ग्रामीण
उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया
गांव दांग खुर्द के जलघर सहित कई जगहों पर बरसाती जलभराव रहा है। अब जलघर में पानी का स्तर काफी कम हो गया है। जलघर से पेयजल आपूर्ति जारी है और साथ ही पानी के टैंकर से भी आपूर्ति कराई जा रही है। जलघर के टैंकों की सफाई के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - योगेश, कनिष्ठ अभियंता, ग्रामीण पेयजल शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग