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हर बूस्टर पर बनेगा क्लोरिनेशन प्लांट
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:57 AM IST
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भिवानी। जल्द ही शहर वासियों को कड़वा पानी नहीं पीना पड़ेगा और पानी में बैक्टीरिया भी नहीं होगा। जनस्वास्वास्थ्य विभाग हरेक बूस्टर पर क्लोरिनेशन प्लांट लगाएगा। दरअसल फिलहाल वाटर वर्क्स पर ही पानी को क्लोरिनेशन किया जाता है। टेल की कॉलोनियों में भी पानी में क्लोरिन रहे इसके लिए ज्यादा क्लोरीन का प्रयोग किया जाता है। इसका खामियाजा शुरूआती कॉलोनियों को उठाना पड़ता है और उनके घरों में सप्लाई होने वाला पानी बहुत ही कड़वा होता है। इस समस्या के समाधान के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने सभी 20 बूस्टरों पर क्लोरिनेशन प्लांट बनाने की योजना बनाई है।
अब तक जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य वाटर वर्क्स पर ही दो पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जाता है। मगर समस्या यह है कि शुरूआती कॉलोनियों में तो क्लोरीन की यह मात्रा बरकरार रहती है मगर ज्यादा दूर यानी टेल की कॉलोनियों में पहुंचने वाले पानी में क्लोरिन की मात्रा नहीं रहती और बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में विभाग एक्सट्रा क्लोरिनेशन करता है। फिलहाल भी साढ़े तीन पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जा रहा है।
क्लोरिन की ज्यादा मात्रा के कारण पानी बहुत कड़वा हो जाता है। दूध फटने, खाने, चाय का स्वाद भी कड़वा होने की भी शिकायतें आ रही है। ऐसी शिकायतों के चलते जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने हरेक बूस्टर पर ही क्लोरिनेशन प्लांट लगाने की योजना बनाई है। योजना पर काम शुरू हो गया है और दिसंबर अंत तक सभी 20 बूस्टरों पर ये प्लांट लगाए जाएंगे। एक प्लांट के निर्माण पर करीब साढ़े चार लाख रुपये तक लागत आएगी। जिसके बाद बूस्टरों पर ही क्लोरिनेशन का सिस्टम होगा। पहले बूस्टरों पर कर्मचारियों द्वारा मैन्यूअली तरीके से क्लोरिनेशन का प्रयास किया था मगर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली।
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30 तक पीना पड़ेगा रहेगा बेहद कड़वा पानी
30 तक शहर वासियों को बेहद कड़वा पानी पीना पड़ेगा। दरअसल जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से बदलते मौसम और बीमारियों के खतरे को देखते हुए सुपर क्लोरिनेशन किया जा रहा है। पानी में दो पीपीएम की जगह साढ़े तीन से चार पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जा रहा है। सुपर क्लोरिनेशन 30 तक होगा।
वर्जन::::
सभी बूस्टर पर क्लोरिनेशन प्लांट बनाए जा रहे है ताकि वहीं पर पानी में क्लोरिनेशन हो सके। समस्या है कि वाटर वर्क्स पर क्लोरिनेशन करने पर टेल की कॉलोनियों में पानी में क्लोरिन नहीं होता और शुरूआती कॉलोनियों को बहुत ज्यादा कड़वा पानी पीना पड़ता है। दिसंबर अंत तक सभी बूस्टरों पर क्लोरिनेशन प्लांट लगाए जाएंगे। फिलहाल भी बीमारियों की आशंका के चलते सुपर क्लोरिनेशन करवाया जा रहा है।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
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अब तक जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य वाटर वर्क्स पर ही दो पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जाता है। मगर समस्या यह है कि शुरूआती कॉलोनियों में तो क्लोरीन की यह मात्रा बरकरार रहती है मगर ज्यादा दूर यानी टेल की कॉलोनियों में पहुंचने वाले पानी में क्लोरिन की मात्रा नहीं रहती और बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में विभाग एक्सट्रा क्लोरिनेशन करता है। फिलहाल भी साढ़े तीन पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जा रहा है।
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क्लोरिन की ज्यादा मात्रा के कारण पानी बहुत कड़वा हो जाता है। दूध फटने, खाने, चाय का स्वाद भी कड़वा होने की भी शिकायतें आ रही है। ऐसी शिकायतों के चलते जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने हरेक बूस्टर पर ही क्लोरिनेशन प्लांट लगाने की योजना बनाई है। योजना पर काम शुरू हो गया है और दिसंबर अंत तक सभी 20 बूस्टरों पर ये प्लांट लगाए जाएंगे। एक प्लांट के निर्माण पर करीब साढ़े चार लाख रुपये तक लागत आएगी। जिसके बाद बूस्टरों पर ही क्लोरिनेशन का सिस्टम होगा। पहले बूस्टरों पर कर्मचारियों द्वारा मैन्यूअली तरीके से क्लोरिनेशन का प्रयास किया था मगर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली।
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30 तक पीना पड़ेगा रहेगा बेहद कड़वा पानी
30 तक शहर वासियों को बेहद कड़वा पानी पीना पड़ेगा। दरअसल जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से बदलते मौसम और बीमारियों के खतरे को देखते हुए सुपर क्लोरिनेशन किया जा रहा है। पानी में दो पीपीएम की जगह साढ़े तीन से चार पीपीएम तक क्लोरिनेशन किया जा रहा है। सुपर क्लोरिनेशन 30 तक होगा।
वर्जन::::
सभी बूस्टर पर क्लोरिनेशन प्लांट बनाए जा रहे है ताकि वहीं पर पानी में क्लोरिनेशन हो सके। समस्या है कि वाटर वर्क्स पर क्लोरिनेशन करने पर टेल की कॉलोनियों में पानी में क्लोरिन नहीं होता और शुरूआती कॉलोनियों को बहुत ज्यादा कड़वा पानी पीना पड़ता है। दिसंबर अंत तक सभी बूस्टरों पर क्लोरिनेशन प्लांट लगाए जाएंगे। फिलहाल भी बीमारियों की आशंका के चलते सुपर क्लोरिनेशन करवाया जा रहा है।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग