{"_id":"6ab2df0682a0f27f4b071c9b","slug":"drop-in-night-temperatures-disrupts-health-balance-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-157492-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: रात के तापमान में गिरावट से बिगड़ा सेहत का संतुलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: रात के तापमान में गिरावट से बिगड़ा सेहत का संतुलन
विज्ञापन
शहर के मेडिकल कॉलेज में लगी मरीजों की कतार
भिवानी। रात के तापमान में गिरावट और दिन में हल्की गर्माहट से सेहत का संतुलन बिगड़ने लगा है, जिससे सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। गले में संक्रमण, जुकाम, बुखार और सूखी खांसी के मरीज सबसे अधिक पहुंच रहे हैं, जबकि चिकित्सकों ने बदलते मौसम में खान-पान और दिनचर्या को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तापमान और हवा में नमी के उतार-चढ़ाव से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और वायरल संक्रमण बढ़ने की आशंका रहती है। दिन की गर्मी को देखते हुए ठंडा पानी, शीतल पेय, आइसक्रीम और तला-भुना भोजन जारी रखना स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है। रात में तापमान कम होने पर ठंडा पानी या बासी खाना गले को प्रभावित कर सकता है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि हवा में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में आहार और दिनचर्या के प्रति लापरवाही बरतने वाले लोग तेजी से संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इस मौसम में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
विज्ञापन
ओपीडी में लगी मरीजों की कतार
अस्पतालों की ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। फिजिशियन और ईएनटी विशेषज्ञों के पास गले में दर्द, खराश, निगलने में तकलीफ और सिरदर्द की शिकायत लेकर सबसे अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक दवाइयां देने के साथ मरीजों को बदलते मौसम में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं। गले में खराश या संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर दिन में दो से तीन बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करने की सलाह दी जा रही है। फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, शीतल पेय और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करने तथा पीने के लिए ताजा या हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करने को कहा गया है। भोजन में सुपाच्य और ताजा खाद्य पदार्थ शामिल करने के साथ ताजी हरी सब्जियां, सूप, दाल का पानी तथा अदरक-तुलसी की चाय लेने की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तापमान और हवा में नमी के उतार-चढ़ाव से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और वायरल संक्रमण बढ़ने की आशंका रहती है। दिन की गर्मी को देखते हुए ठंडा पानी, शीतल पेय, आइसक्रीम और तला-भुना भोजन जारी रखना स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है। रात में तापमान कम होने पर ठंडा पानी या बासी खाना गले को प्रभावित कर सकता है।
विज्ञापन
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि हवा में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में आहार और दिनचर्या के प्रति लापरवाही बरतने वाले लोग तेजी से संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इस मौसम में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
विज्ञापन
ओपीडी में लगी मरीजों की कतार
अस्पतालों की ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। फिजिशियन और ईएनटी विशेषज्ञों के पास गले में दर्द, खराश, निगलने में तकलीफ और सिरदर्द की शिकायत लेकर सबसे अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक दवाइयां देने के साथ मरीजों को बदलते मौसम में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं। गले में खराश या संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर दिन में दो से तीन बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करने की सलाह दी जा रही है। फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, शीतल पेय और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करने तथा पीने के लिए ताजा या हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करने को कहा गया है। भोजन में सुपाच्य और ताजा खाद्य पदार्थ शामिल करने के साथ ताजी हरी सब्जियां, सूप, दाल का पानी तथा अदरक-तुलसी की चाय लेने की सलाह दी गई है।