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द्रोणाचार्य अवॉर्डी असन सांगवान का जुलूस निकालकर स्वागत किया
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भिवानी। खेल नगरी के नाम से विख्यात भिवानी निवासी कबड्डी कोच असन सांगवान को राष्ट्रपति द्वारा द्रोणाचार्य अवॉर्ड से पुरस्कृत किए जाने के बाद उनका आज भिवानी लौटने पर खेल प्रेमियों ने भव्य स्वागत किया। फूल-मालाओं एवं ढोल-नंगाड़ों के साथ जुलूस निकाला। महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हे द्रोणाचार्य अवॉर्ड के रूप में एक कांस्य प्रतिमा, प्रमाण पत्र, औपचारिक पोशाक व नकद राशि भेंट की। इससे पूर्व असन सांगवान को अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है।
गौरतलब है कि असन सांगवान खुद कबड्डी के अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी होने के साथ इंडिया, ईरान व साउथ कोरिया कबड्डी टीम के कोच रह चुके हैं। खेल नगरी भिवानी के कबड्डी खिलाड़ी समय-समय पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन करते हैं। अब इन्हें तरासने व जीत के गुर सिखाने वाले गुरु भी किसी से कम नहीं। असन सांगवान 1998 व 2006 में भारत, 2010 में ईरान व 2018 में साउथ कोरिया कबड्डी टीम के कोच रह चुके हैं।
गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलने के बाद भिवानी पहुंचे असन सांगवान ने कहा कि उन्हें अवॉर्ड पाने की सोच कभी नहीं रखी, बल्कि वो हमेशा यही चाहते रहे कि देश की टीम और बेहतर बने। साथ ही कबड्डी को ओलंपिक में लाने के लिए दूसरे देशों की कबड्डी टीम के कोच भी बने, ताकि दूसरे देश में कबड्डी को बढ़ावा मिलने पर कबड्डी ओलंपिक में जा सके। उन्होंने कहा कि अवॉर्ड मिलने से भिवानी के खेल प्रेमियों व खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज भारतीय कबड्डी टीम में अधिकत्तर खिलाड़ी हरियाणा के हैं और भविष्य में भी राज्य के खिलाड़ी कबड्डी खेल में अपना योगदान देते रहेंगे। गौरतलब है कि गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्ड भिवानी में तीसरा, जबकी कबड्डी खेल में देश का पहला अवॉर्ड उन्हें मिला है। इससे पहले भिवानी में कैप्टन हवासिंह व जगदीश कोच को बॉक्सिंग में द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिले हैं। कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर देश का पहला अर्जुन अवॉर्ड पाने का सौभाग्य भी उन्हें ही मिला था।
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गौरतलब है कि असन सांगवान खुद कबड्डी के अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी होने के साथ इंडिया, ईरान व साउथ कोरिया कबड्डी टीम के कोच रह चुके हैं। खेल नगरी भिवानी के कबड्डी खिलाड़ी समय-समय पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन करते हैं। अब इन्हें तरासने व जीत के गुर सिखाने वाले गुरु भी किसी से कम नहीं। असन सांगवान 1998 व 2006 में भारत, 2010 में ईरान व 2018 में साउथ कोरिया कबड्डी टीम के कोच रह चुके हैं।
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गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलने के बाद भिवानी पहुंचे असन सांगवान ने कहा कि उन्हें अवॉर्ड पाने की सोच कभी नहीं रखी, बल्कि वो हमेशा यही चाहते रहे कि देश की टीम और बेहतर बने। साथ ही कबड्डी को ओलंपिक में लाने के लिए दूसरे देशों की कबड्डी टीम के कोच भी बने, ताकि दूसरे देश में कबड्डी को बढ़ावा मिलने पर कबड्डी ओलंपिक में जा सके। उन्होंने कहा कि अवॉर्ड मिलने से भिवानी के खेल प्रेमियों व खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज भारतीय कबड्डी टीम में अधिकत्तर खिलाड़ी हरियाणा के हैं और भविष्य में भी राज्य के खिलाड़ी कबड्डी खेल में अपना योगदान देते रहेंगे। गौरतलब है कि गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्ड भिवानी में तीसरा, जबकी कबड्डी खेल में देश का पहला अवॉर्ड उन्हें मिला है। इससे पहले भिवानी में कैप्टन हवासिंह व जगदीश कोच को बॉक्सिंग में द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिले हैं। कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर देश का पहला अर्जुन अवॉर्ड पाने का सौभाग्य भी उन्हें ही मिला था।
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