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Bhiwani News: भिवानी सीबीएलयू की पीएचडी होल्डर डॉ. अरुणा ने पाई डीआरडीओ में बतौर साइंटिस्ट-बी नियुक्ति
Tue, 09 Jan 2024 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 09 Jan 2024 10:51 PM IST
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अरूणा
भिवानी। चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय में पौधे-आधारित कंपोजिट का उपयोग करके जलीय घोल से दूषित पदार्थों को हटाने पर अध्ययन में पीएचडी कर चुकी हिसार के सिंघवा खास की बेटी डॉ. अरुणा डीआरडीओ में बतौर साइंटिस्ट-बी नियुक्त हुई हैं। फिलहाल उनका पुणे में प्रशिक्षण चल रहा है। सीबीएलयू के दीक्षांत समारोह में डाॅ. अरुणा को पीएचडी की उपाधि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के हाथों मिलेगी। अरुणा ने पीएचडी से पहले सीबीएलयू में बतौर सहायक प्रोफेसर (संविदा) नौकरी भी की है। उनका ओएनजीसी में केमिस्ट पद पर चयन हो चुका है।
दरअसल, सिंघवा खास हिसार निवासी डॉ. अरुणा के पिता धर्मबीर सिंह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड पानीपत में एओ-आईआई के पद पर नियुक्त हैं। उनकी माता अंजना गृहिणी हैं। अरुणा ने सीबीएलयू में 20 सितंबर 2018 से दो अक्तूबर 2019 तक सहायक प्रोफेसर (संविदा) के तौर पर अध्यापन कार्य किया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर सीबीएलयू से प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार के अधीन रसायन विज्ञान में पीएचडी की। अरुणा ने दिसंबर 2017 में नेट, जून 2018 में जेआरएफ और दिसंबर 2018 में जेआरएफ की परीक्षा भी पास की। इसके अलावा गेट भी क्वालीफाई किया हुआ है। जिसके बाद उनका ओएनजीसी में केमिस्ट पर पर चयन हुआ। अरुणा बैडमिंटन और मैराथन में भी सक्रिय खिलाड़ी रही हैं। सीबीएलयू के 15 जनवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में रसायन विज्ञान में पहली पीएचडी होल्डर के तौर पर उपाधि का श्रेय भी मिलेगा।
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यह है अरुणा की रिसर्च
डॉ. अरुणा का कहना है कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व और स्थिरता के लिए आवश्यक गुणवत्ता वाले पानी की पर्याप्त उपलब्धता एक पूर्व शर्त है। बढ़ते औद्योगीकरण और विश्वव्यापी जनसंख्या के कारण दुनिया धीरे-धीरे पानी की कमी की ओर बढ़ रही है, जिससे अरबों लोग और पृथ्वी के जल संसाधन खतरे में पड़ गए हैं। इसके अलावा, निकट भविष्य में मानवता पर इसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में पानी की कमी को सबसे बड़े वैश्विक जोखिमों में से एक माना जाता है। जल निकायों में रंगों, भारी धातु आयनों, फार्मास्युटिकल अपशिष्टों, माइक्रोप्लास्टिक्स और कीटनाशकों जैसे प्रदूषकों की उपस्थिति ने पानी की गुणवत्ता को काफी हद तक खराब कर दिया है, जो मनुष्यों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीवों को भी प्रभावित कर रहा है। एक उन्नत सामग्री की उभरती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिसे व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जा सकता है। अरुणा ने अपनी शोध टीम के साथ नाइट्रेट, एमोक्सीसिलिन एंटीबायोटिक, भारी धातु आयनों और कई रंगों को हटाने के लिए कुछ कंपोजिट और उनके कॉलम विकसित किए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक दुनिया के डाई अपशिष्टों को तैयार हाइब्रिड कॉलम के साथ कुशलता पूर्वक उपचारित किया गया और उनकी दक्षता की तुलना बाजार में उपलब्ध चार अलग-अलग जल शोधक, फिल्टर से की गई।
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शोधार्थियों के लिए संदेश
डॉ. अरुणा का मानना है कि पीएचडी यात्रा एक स्प्रिंट नहीं बल्कि एक मैराथन है। अंतिम रेखा सिर्फ एक डिग्री नहीं है। यह वह प्रभाव है जो आप दुनिया पर डालते हैं। दौड़ते रहें, खोज करते रहें, क्योंकि आपके शोध में जीवन बदलने की शक्ति है।
डॉ. अरुणा ने अपने रिसर्च में पानी की शुद्धता को लेकर स्थानीय मैटिरियल का इस्तेमाल करते हुए बेहतर उपाय सुझाया है। ये यूनिवर्सिटी का उद्देश्य भी है। रसायन विज्ञान में होनहार रिसर्चर के तौर पर डॉ. अरुणा को दीक्षांत समारोह में इस क्षेत्र में पहली पीएचडी की उपाधि मिलेगी, ये यूनिवर्सिटी के लिए गौरव की बात है, मैं उसे बधाई देता हूं।
-प्रोफेसर राजकुमार मित्तल, वीसी सीबीएलयू भिवानी।
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दरअसल, सिंघवा खास हिसार निवासी डॉ. अरुणा के पिता धर्मबीर सिंह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड पानीपत में एओ-आईआई के पद पर नियुक्त हैं। उनकी माता अंजना गृहिणी हैं। अरुणा ने सीबीएलयू में 20 सितंबर 2018 से दो अक्तूबर 2019 तक सहायक प्रोफेसर (संविदा) के तौर पर अध्यापन कार्य किया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर सीबीएलयू से प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार के अधीन रसायन विज्ञान में पीएचडी की। अरुणा ने दिसंबर 2017 में नेट, जून 2018 में जेआरएफ और दिसंबर 2018 में जेआरएफ की परीक्षा भी पास की। इसके अलावा गेट भी क्वालीफाई किया हुआ है। जिसके बाद उनका ओएनजीसी में केमिस्ट पर पर चयन हुआ। अरुणा बैडमिंटन और मैराथन में भी सक्रिय खिलाड़ी रही हैं। सीबीएलयू के 15 जनवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में रसायन विज्ञान में पहली पीएचडी होल्डर के तौर पर उपाधि का श्रेय भी मिलेगा।
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यह है अरुणा की रिसर्च
डॉ. अरुणा का कहना है कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व और स्थिरता के लिए आवश्यक गुणवत्ता वाले पानी की पर्याप्त उपलब्धता एक पूर्व शर्त है। बढ़ते औद्योगीकरण और विश्वव्यापी जनसंख्या के कारण दुनिया धीरे-धीरे पानी की कमी की ओर बढ़ रही है, जिससे अरबों लोग और पृथ्वी के जल संसाधन खतरे में पड़ गए हैं। इसके अलावा, निकट भविष्य में मानवता पर इसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में पानी की कमी को सबसे बड़े वैश्विक जोखिमों में से एक माना जाता है। जल निकायों में रंगों, भारी धातु आयनों, फार्मास्युटिकल अपशिष्टों, माइक्रोप्लास्टिक्स और कीटनाशकों जैसे प्रदूषकों की उपस्थिति ने पानी की गुणवत्ता को काफी हद तक खराब कर दिया है, जो मनुष्यों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीवों को भी प्रभावित कर रहा है। एक उन्नत सामग्री की उभरती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिसे व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जा सकता है। अरुणा ने अपनी शोध टीम के साथ नाइट्रेट, एमोक्सीसिलिन एंटीबायोटिक, भारी धातु आयनों और कई रंगों को हटाने के लिए कुछ कंपोजिट और उनके कॉलम विकसित किए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक दुनिया के डाई अपशिष्टों को तैयार हाइब्रिड कॉलम के साथ कुशलता पूर्वक उपचारित किया गया और उनकी दक्षता की तुलना बाजार में उपलब्ध चार अलग-अलग जल शोधक, फिल्टर से की गई।
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शोधार्थियों के लिए संदेश
डॉ. अरुणा का मानना है कि पीएचडी यात्रा एक स्प्रिंट नहीं बल्कि एक मैराथन है। अंतिम रेखा सिर्फ एक डिग्री नहीं है। यह वह प्रभाव है जो आप दुनिया पर डालते हैं। दौड़ते रहें, खोज करते रहें, क्योंकि आपके शोध में जीवन बदलने की शक्ति है।
डॉ. अरुणा ने अपने रिसर्च में पानी की शुद्धता को लेकर स्थानीय मैटिरियल का इस्तेमाल करते हुए बेहतर उपाय सुझाया है। ये यूनिवर्सिटी का उद्देश्य भी है। रसायन विज्ञान में होनहार रिसर्चर के तौर पर डॉ. अरुणा को दीक्षांत समारोह में इस क्षेत्र में पहली पीएचडी की उपाधि मिलेगी, ये यूनिवर्सिटी के लिए गौरव की बात है, मैं उसे बधाई देता हूं।
-प्रोफेसर राजकुमार मित्तल, वीसी सीबीएलयू भिवानी।