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Bhiwani News: ढाणी माहू को सप्ताह में एक दिन मिल रहा पीने का पानी
Tue, 10 Feb 2026 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 10 Feb 2026 02:04 AM IST
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भिवानी। डार्क जोन (जल संकट से त्रस्त) गांव ढाणी माहू के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लेते हुए उपायुक्त (डीसी) भिवानी को दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह संज्ञान गांव ढाणी माहू निवासी एवं हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की शिकायत पर लिया है।
शिकायत में सुनील वर्मा ने बताया है कि तोशाम खंड का गांव ढाणीमाहू, गुढ़ा और ताल क्षेत्र पिछले कई वर्षों से घरेलू पेयजल और सिंचाई जल की भीषण कमी से जूझ रहा है। इस क्षेत्र की आबादी लगभग 9,000 है तथा करीब 7,000 एकड़ कृषि भूमि जलाभाव के कारण प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को सप्ताह में केवल एक बार पीने का पानी मिलता है, जबकि भूमिगत जल अत्यधिक खारा और अनुपयोगी हो चुका है। खेती पूरी तरह अनिश्चित वर्षा पर निर्भर है।
डार्क जोन घोषित तोशाम खंड : भारत सरकार ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर (दिनांक छह फरवरी 2025) में स्पष्ट रूप से बताया है कि तोशाम खंड को “ओवर-एक्सप्लॉइटेड / डार्क जोन” घोषित किया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के अनुसार इस क्षेत्र में भूजल दोहन पुनर्भरण से कहीं अधिक है, जिससे भूजल अब पेयजल या सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत नहीं रह गया है। इसके बावजूद सतही जल की वैकल्पिक व्यवस्था अब तक नहीं की गई।
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2019 से चल रहा पानी को लेकर संघर्ष : सुशील वर्मा और ढाणी माहू के ग्रामीण 2019 से लगातार जल संकट के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इसी क्रम में वर्ष 2019 में सुशील वर्मा ने छह दिन तक भूख हड़ताल की थी। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने पांच सौ ट्रैक्टरों के साथ भिवानी मार्च भी निकाला था।
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शिकायत में सुनील वर्मा ने बताया है कि तोशाम खंड का गांव ढाणीमाहू, गुढ़ा और ताल क्षेत्र पिछले कई वर्षों से घरेलू पेयजल और सिंचाई जल की भीषण कमी से जूझ रहा है। इस क्षेत्र की आबादी लगभग 9,000 है तथा करीब 7,000 एकड़ कृषि भूमि जलाभाव के कारण प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को सप्ताह में केवल एक बार पीने का पानी मिलता है, जबकि भूमिगत जल अत्यधिक खारा और अनुपयोगी हो चुका है। खेती पूरी तरह अनिश्चित वर्षा पर निर्भर है।
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डार्क जोन घोषित तोशाम खंड : भारत सरकार ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर (दिनांक छह फरवरी 2025) में स्पष्ट रूप से बताया है कि तोशाम खंड को “ओवर-एक्सप्लॉइटेड / डार्क जोन” घोषित किया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के अनुसार इस क्षेत्र में भूजल दोहन पुनर्भरण से कहीं अधिक है, जिससे भूजल अब पेयजल या सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत नहीं रह गया है। इसके बावजूद सतही जल की वैकल्पिक व्यवस्था अब तक नहीं की गई।
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2019 से चल रहा पानी को लेकर संघर्ष : सुशील वर्मा और ढाणी माहू के ग्रामीण 2019 से लगातार जल संकट के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इसी क्रम में वर्ष 2019 में सुशील वर्मा ने छह दिन तक भूख हड़ताल की थी। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने पांच सौ ट्रैक्टरों के साथ भिवानी मार्च भी निकाला था।