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Bhiwani News: विद्यालय के भवन में चलाया जा रहा देवराला का अस्पताल

Mon, 12 May 2025 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 12 May 2025 11:43 PM IST
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Devrala hospital is being run in the school building
कैरू के गांव देवराला में ​स्थित सेठ सोहन लाल सिविल अस्पताल की कंडम बिल्डिंग।
गुलशन कुमार
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कैरू। प्रसिद्ध गांव देवराला जवाहर नवोदय विद्यालय और पद्मश्री फूलचंद देवरालिया के नाम से विशेष पहचान रखता है। इस गांव का सेठ सोहन लाल सिविल अस्पताल सुविधाओं के अभाव में कई साल से खुद बीमार है। भवन के अभाव में यह अस्पताल राजकीय माॅडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चलाया जा रहा है। अब लोगों को महिला बाल विकास एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी से इस अस्पताल के सुधार की उम्मीद है।
हरियाणा पंजाब संयुक्त प्रदेश के समय सन 1959 में सेठ सोहनलाल सिविल अस्पताल बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के कर कमलों से इसका शुभारंभ किया गया था। इसके बावजूद विभाग ने इसके सुधार की अनदेखी की है। इस अस्पताल के पास अपनी खुद की भूमि नहीं है।
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अस्पताल के भवन को लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) बीएंडआर ने कंडम घोषित किया है। जान-माल का खतरा होने के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं अब राजकीय राजकीय माॅडल संस्कृति वरिष्ठ विद्यालय की चहारदीवारी में संचालित हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त कमरे न होने के कारण दो वर्ष से एक कक्ष को दो हिस्सों में बांटा गया है।
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ग्रामीण प्रशासन से इसके लिए नया भवन बनाने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन समाधान नहीं निकला। अस्पताल निर्माण संबंधी फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रहीं हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को यहां स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है।
आठ बिस्तरों वाले इस अस्पताल में प्रसव तक की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है। आसपास के गांव के मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल रहा है। लगातार बढ़ती आबादी के सापेक्ष स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा न होने के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 40 किमी दूर जिला नागरिक अस्पताल या निजी अस्पताल में ले जाना पड़ता है।


मंत्री श्रुति चौधरी से उम्मीद है कि वे इस समस्या का समाधान निकालेंगी। तभी लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। लंबे अर्से से यहां पर पर्याप्त चिकित्सक स्टाफ तैनात नहीं है। अगर भवन बने तो मूलभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए अर्जी लगाई गई थी, लेकिन आश्वासन साकार नहीं हो सका। प्रसव के लिए गांव में महिला चिकित्सक की तैनाती की जाए। - संदीप लाला, प्रधान, फोर डब्ल्यू युवा क्लब ग्रामीण।


अस्पताल 15 वर्षों से दयनीय हालत में है। यहां पर स्टाफ कमी के साथ दवाइयों का अभाव है। मरीजों को बिना दवाइयों के खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। गांव की सबसे बड़ी समस्या अस्पताल की है। जनप्रतिनिधि अस्पताल का भवन तक नहीं बनवा पा रहे हैं। जनता परेशान है। जब से अस्पताल कंडम घोषित किया है। अस्पताल में चिकित्सक न होने के कारण मरीज दवाई तक नहीं ले पा रहे हैं। - दीपक इटकाण, ग्रामीण।
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