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पहले बीमारियों का संक्रमण झेला, अब बारिश ने फेरा किसानों के अरमानों पर पानी
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गांव चांग में बारिश के कारण जलमग्न हुई बाजरे की फसल। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। पहले फसलों में बीमारियों का संक्रमण झेल चुके किसानों के अरमानों पर अब बारिश ने पानी फेर डाला। बारिश के बाद कई गांवों में फसलों के अंदर पानी भर गया। बारिश से पकाव की तरफ बढ़ रही कपास और बाजरा की फसल खराब हो गई है।
नुकसान का आकलन करने में कृषि विभाग के अधिकारी भी जुटे हैं। लोहारू और बहल क्षेत्र में इस समय सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान बताया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सितंबर में हुई बारिश से कपास की फसल में करीब 35 फीसदी तक नुकसान का आकलन किया है। जलभराव संभावित गांवों में सिंचाई विभाग के अधिकारी पानी की निकासी के प्रबंधों में जुटे हैं, लेकिन किसानों की फसल बचाने की कोई जुगत उनके पास भी नहीं है। गांवों के जोहड़ भी ओवरफ्लो हैं, जिनके अंदर दो दिन हुई बारिश ने जल स्तर खतरे के निशान तक पहुंचा दिया है।
भिवानी जिले में करीब पौने चार लाख हेक्टेयर भूमि में किसानों ने खरीफ सीजन के दौरान विभिन्न फसलों की बिजाई की हुई है। कपास और बाजरा की फसल पकाव की ओर बढ़ रही है। मूंग व धान हजारों हेक्टेयर में है। जिले के गांव मिताथल, चांग, मुंढाल खुर्द, घुसकानी, कलिंगा, खरककलां, रतेरा, बलियाली, भुरटाना, धनाना, तालु, जताई, बड़ेसरा, प्रेमनगर, तिगड़ाना, गुजरानी, बापोड़ा, मिरान, झुल्ली, थिलौड़, चनाना, भैरा, लोहानी, मीठी सहित कई गांवों में बरसाती जलभराव हुआ है। खेतों में जमा पानी के अंदर खड़ी फसल भी नष्ट होने के कगार पर है।
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अचानक बिगड़े मौसम ने बिगाड़ा किसानों के फसल उत्पादन का गणित
सितंबर में मंगलवार और बुधवार को लगातार दो दिनों तक अचानक बिगड़े मौसम और हुई बारिश ने किसानों के फसल उत्पादन के गणित को बिगाड़ दिया है। किसानों की खेत में खड़ी फसल बारिश की वजह से नष्ट होने के कगार पर हैं, जबकि कई जगह काफी नुकसान भी हुआ है। इसके बाद किसानों को आशंका है कि इससे 35 से 40 फीसदी कम उत्पादन होगा।
विशेष गिरदावरी की मांग
बारिश से खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ा है। जिससे किसानों के नुकसान की संभावना भी ज्यादा बढ़ी है। संयुक्त किसान मोर्चा के कामरेड ओमप्रकाश, राजू मान, जोगिंद्र तालू, रामफल देशवाल ने बताया कि बारिश की वजह से अधिकतर क्षेत्र में किसानों को काफी नुकसान हुआ है। कपास व बाजरा की फसल नष्ट हो गई है। सरकार खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी कराए और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कराए।
नरम जमीन में ज्यादा नुकसान
जहां पर नरम जमीन है वहां किसानों की कपास में काफी नुकसान का आकलन किया गया है। ज्यादातर लोहारू और बहल क्षेत्र के किसानों की कपास की फसल इससे प्रभावित हुई है। नरम भूमि में बारिश से 35 फीसदी कपास में नुकसान हुआ है, जबकि दो दिन तक हुई बारिश से अन्य जगहों पर भी फसलें प्रभावित होने की आशंका है।
-डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
पानी की निकासी की जा रही है
जलभराव संभावित गांवों में बारिश के पानी की निकासी का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस कार्य के लिए 91 पंप लगाए गए हैं और करीब 60 अस्थायी बिजली कनेक्शन भी चालू हैं। जिनके जरिये 24 घंटे पानी की निकासी की जा रही है।
- नवीन देशवाल, कार्यकारी अभियंता, यमुना जल सेवाएं परिमंडल भिवानी।
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नुकसान का आकलन करने में कृषि विभाग के अधिकारी भी जुटे हैं। लोहारू और बहल क्षेत्र में इस समय सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान बताया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने सितंबर में हुई बारिश से कपास की फसल में करीब 35 फीसदी तक नुकसान का आकलन किया है। जलभराव संभावित गांवों में सिंचाई विभाग के अधिकारी पानी की निकासी के प्रबंधों में जुटे हैं, लेकिन किसानों की फसल बचाने की कोई जुगत उनके पास भी नहीं है। गांवों के जोहड़ भी ओवरफ्लो हैं, जिनके अंदर दो दिन हुई बारिश ने जल स्तर खतरे के निशान तक पहुंचा दिया है।
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भिवानी जिले में करीब पौने चार लाख हेक्टेयर भूमि में किसानों ने खरीफ सीजन के दौरान विभिन्न फसलों की बिजाई की हुई है। कपास और बाजरा की फसल पकाव की ओर बढ़ रही है। मूंग व धान हजारों हेक्टेयर में है। जिले के गांव मिताथल, चांग, मुंढाल खुर्द, घुसकानी, कलिंगा, खरककलां, रतेरा, बलियाली, भुरटाना, धनाना, तालु, जताई, बड़ेसरा, प्रेमनगर, तिगड़ाना, गुजरानी, बापोड़ा, मिरान, झुल्ली, थिलौड़, चनाना, भैरा, लोहानी, मीठी सहित कई गांवों में बरसाती जलभराव हुआ है। खेतों में जमा पानी के अंदर खड़ी फसल भी नष्ट होने के कगार पर है।
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अचानक बिगड़े मौसम ने बिगाड़ा किसानों के फसल उत्पादन का गणित
सितंबर में मंगलवार और बुधवार को लगातार दो दिनों तक अचानक बिगड़े मौसम और हुई बारिश ने किसानों के फसल उत्पादन के गणित को बिगाड़ दिया है। किसानों की खेत में खड़ी फसल बारिश की वजह से नष्ट होने के कगार पर हैं, जबकि कई जगह काफी नुकसान भी हुआ है। इसके बाद किसानों को आशंका है कि इससे 35 से 40 फीसदी कम उत्पादन होगा।
विशेष गिरदावरी की मांग
बारिश से खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ा है। जिससे किसानों के नुकसान की संभावना भी ज्यादा बढ़ी है। संयुक्त किसान मोर्चा के कामरेड ओमप्रकाश, राजू मान, जोगिंद्र तालू, रामफल देशवाल ने बताया कि बारिश की वजह से अधिकतर क्षेत्र में किसानों को काफी नुकसान हुआ है। कपास व बाजरा की फसल नष्ट हो गई है। सरकार खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी कराए और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कराए।
नरम जमीन में ज्यादा नुकसान
जहां पर नरम जमीन है वहां किसानों की कपास में काफी नुकसान का आकलन किया गया है। ज्यादातर लोहारू और बहल क्षेत्र के किसानों की कपास की फसल इससे प्रभावित हुई है। नरम भूमि में बारिश से 35 फीसदी कपास में नुकसान हुआ है, जबकि दो दिन तक हुई बारिश से अन्य जगहों पर भी फसलें प्रभावित होने की आशंका है।
-डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
पानी की निकासी की जा रही है
जलभराव संभावित गांवों में बारिश के पानी की निकासी का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस कार्य के लिए 91 पंप लगाए गए हैं और करीब 60 अस्थायी बिजली कनेक्शन भी चालू हैं। जिनके जरिये 24 घंटे पानी की निकासी की जा रही है।
- नवीन देशवाल, कार्यकारी अभियंता, यमुना जल सेवाएं परिमंडल भिवानी।