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फर्जी वसीयत पर अधिवक्ता समेत तीन को कैद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2016 01:32 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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भिवानी में फर्जी वसीयत तैयार करने वाले एक अधिवक्ता समेत तीन लोगों कोर्ट ने तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर आठ-आठ हजार रुपये जुर्माना भी किया है।
शनिवार को न्यायिक दंडाधिकारी सोनिया साहनी की अदालत ने यह फैसला दिया। अदालत ने इस सुनवाई करते हुए आरोपी अधिवक्ता प्रेमचंद, नवीन व सूरजमल को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 व 471 के तहत तीन-तीन साल की कैद तथा आठ-आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
ये था मामला
यहां चंद्रूहेड़ा निवासी नीरज कुमार ने 15 सितंबर 2011 को अदालत में इस्तगासा दायर कर तीनों पर आरोप लगाया था कि आरोपियों ने मिलीभगत व धोखाधड़ी करके उसके दादा सूरतराम की मरणोपरांत फर्जी वसीयत तैयार की और सब रजिस्ट्रार कार्यालय भिवानी में रजिस्टर्ड कराने का प्रयास किए। नीरज ने बताया कि दो बार रजिस्टर्ड कराने के प्रयास किए गए। एक बार 2007 व दूसरी बार 2010 में। लेकिन दोनों ही बार वे वसीयत को रजिस्टर्ड नहीं करा पाए। 2007 में आरोपियों ने वसीयत बारे अपनी दरखास्त कार्यालय से वापस उठा ली। दिसंबर 2010 को सब रजिस्ट्रार ने मरणोपरांत वसीयत रजिस्टर्ड करने बारे मना कर दिया। नीरज ने बताया कि आरोपी फर्जी वसीयत तैयार करके एक प्लाट को हथियाना चाहते थे। इसी आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 व 120 बी के मामला दर्ज कराया।
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शनिवार को न्यायिक दंडाधिकारी सोनिया साहनी की अदालत ने यह फैसला दिया। अदालत ने इस सुनवाई करते हुए आरोपी अधिवक्ता प्रेमचंद, नवीन व सूरजमल को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 व 471 के तहत तीन-तीन साल की कैद तथा आठ-आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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ये था मामला
यहां चंद्रूहेड़ा निवासी नीरज कुमार ने 15 सितंबर 2011 को अदालत में इस्तगासा दायर कर तीनों पर आरोप लगाया था कि आरोपियों ने मिलीभगत व धोखाधड़ी करके उसके दादा सूरतराम की मरणोपरांत फर्जी वसीयत तैयार की और सब रजिस्ट्रार कार्यालय भिवानी में रजिस्टर्ड कराने का प्रयास किए। नीरज ने बताया कि दो बार रजिस्टर्ड कराने के प्रयास किए गए। एक बार 2007 व दूसरी बार 2010 में। लेकिन दोनों ही बार वे वसीयत को रजिस्टर्ड नहीं करा पाए। 2007 में आरोपियों ने वसीयत बारे अपनी दरखास्त कार्यालय से वापस उठा ली। दिसंबर 2010 को सब रजिस्ट्रार ने मरणोपरांत वसीयत रजिस्टर्ड करने बारे मना कर दिया। नीरज ने बताया कि आरोपी फर्जी वसीयत तैयार करके एक प्लाट को हथियाना चाहते थे। इसी आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 व 120 बी के मामला दर्ज कराया।
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