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गमगीन माहौल में हुआ दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
तोशाम की झील में नाव पलटने से हुई दो बच्चों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम के करीब 21 घंटे के बाद परिजन शव लेने को तैयार हुए। परिजनों ने तहसीलदार को लिखित में एक शिकायत दी और मामले की जांच कराने, सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ मृतक दोनों बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये देने और दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। पहले आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्यों को नौकरी की मांग कर रहे परिजनों व ग्रामीण अचानक ही सरपंच से बातचीत कर शव लेने को तैयार हो गए। जिस पर मामले को सुलझाने के लिए पहुंचे अधिकारी भी हैरान रहे।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को तोशाम झील में नाव पलटने से दो बच्चों 12 वर्षीय दीपक और सात वर्षीय खुशी की मौत हो गई थी। खुशी गोविंदपुरा वासी टैक्सी ड्राइवर सोनू की लड़की थी तो दीपक जाटू लुहारी वासी टैक्सी ड्राइवर कृष्ण का इकलौता लड़का था। दोनों बच्चे अपने परिवार समेत तोशाम घुमने गए थे। मामले में मृतक जाटू लोहारी वासी दीपक के परिजनों व ग्रामीणों ने उनके पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताई। साथ ही झील में सुरक्षा उपकरण नहीं होने, हादसे के तुरंत बाद बचाव कार्य नहीं किए जाने के आरोप लगाते हुए शव लेने से इंकार कर दिया था। सोमवार के बाद मंगलवार सुबह भी परिजन शव लेने को तैयार नहीं थे। बाद में गांव के प्रमुख लोगों ने परिजनों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने, दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इस बात पर घंटों बैठक चली। अधिकारियों के अलावा पंचायत स्तर पर भी बातचीत हुई। आखिरकार दोपहर बाद परिजन और ग्रामीण शव लेने को राजी हुए और अपना मांग पत्र तहसीलदार रामनिवास को सौंपा जिसमें दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने और दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी देने की मांग की गई। दोनों बच्चों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
हंगामे के बाद अचानक सुलझा विवाद
दोपहर दो बजे तक बैठकें चलती रही और हंगामे की स्थिति रही। मगर अचानक ही परिजन व ग्रामीण पंचायत स्तर पर हुई बैठक के बाद शव लेने को तैयार हो गए। यह देख मामले को सुलझाने के लिए पहुंचे अधिकारी भी हैरान रह गए। शव लेने के बाद ग्रामीणों व परिजनों ने एक मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा।
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वर्जन::::
सरकार से दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता और परिवार के एक-एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी की मांग की गई है। तहसीलदार ने डीसी के समक्ष मांग रखने का आश्वासन दिया है। दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में उनकी मदद की जानी चाहिए। झील में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
-नरेश कुमार, सरपंच जाटू लुहारी
वर्जन:::
दोनों बच्चों के परिवार 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता और एक-एक सदस्य को नौकरी की मांग कर रहे थे। बाद में पंचायत स्तर पर बैठक कर शव लेने को राजी हुए। उन्हें एक मांग पत्र सौंपा है, जो डीसी के समक्ष रखा जाएगा। नियमानुसार आर्थिक सहायता और नौकरी का प्रावधान होने पर दी जाएगी।
-रामनिवास, तहसीलदार
इमरजेंसी में जाने के लिए रास्ता नहीं
अस्पताल परिसर में इमरजेंसी के बाहर वाहनों की कतार लग गई। हालात ये रहे कि एंबुलेंस को भी इमरजेंसी के पास जाने के लिए भी जगह नहीं थी जिस कारण स्टाफ सदस्यों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
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भिवानी।
तोशाम की झील में नाव पलटने से हुई दो बच्चों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम के करीब 21 घंटे के बाद परिजन शव लेने को तैयार हुए। परिजनों ने तहसीलदार को लिखित में एक शिकायत दी और मामले की जांच कराने, सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ मृतक दोनों बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये देने और दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। पहले आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्यों को नौकरी की मांग कर रहे परिजनों व ग्रामीण अचानक ही सरपंच से बातचीत कर शव लेने को तैयार हो गए। जिस पर मामले को सुलझाने के लिए पहुंचे अधिकारी भी हैरान रहे।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को तोशाम झील में नाव पलटने से दो बच्चों 12 वर्षीय दीपक और सात वर्षीय खुशी की मौत हो गई थी। खुशी गोविंदपुरा वासी टैक्सी ड्राइवर सोनू की लड़की थी तो दीपक जाटू लुहारी वासी टैक्सी ड्राइवर कृष्ण का इकलौता लड़का था। दोनों बच्चे अपने परिवार समेत तोशाम घुमने गए थे। मामले में मृतक जाटू लोहारी वासी दीपक के परिजनों व ग्रामीणों ने उनके पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताई। साथ ही झील में सुरक्षा उपकरण नहीं होने, हादसे के तुरंत बाद बचाव कार्य नहीं किए जाने के आरोप लगाते हुए शव लेने से इंकार कर दिया था। सोमवार के बाद मंगलवार सुबह भी परिजन शव लेने को तैयार नहीं थे। बाद में गांव के प्रमुख लोगों ने परिजनों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने, दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। इस बात पर घंटों बैठक चली। अधिकारियों के अलावा पंचायत स्तर पर भी बातचीत हुई। आखिरकार दोपहर बाद परिजन और ग्रामीण शव लेने को राजी हुए और अपना मांग पत्र तहसीलदार रामनिवास को सौंपा जिसमें दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने और दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी देने की मांग की गई। दोनों बच्चों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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हंगामे के बाद अचानक सुलझा विवाद
दोपहर दो बजे तक बैठकें चलती रही और हंगामे की स्थिति रही। मगर अचानक ही परिजन व ग्रामीण पंचायत स्तर पर हुई बैठक के बाद शव लेने को तैयार हो गए। यह देख मामले को सुलझाने के लिए पहुंचे अधिकारी भी हैरान रह गए। शव लेने के बाद ग्रामीणों व परिजनों ने एक मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा।
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वर्जन::::
सरकार से दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता और परिवार के एक-एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी की मांग की गई है। तहसीलदार ने डीसी के समक्ष मांग रखने का आश्वासन दिया है। दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में उनकी मदद की जानी चाहिए। झील में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
-नरेश कुमार, सरपंच जाटू लुहारी
वर्जन:::
दोनों बच्चों के परिवार 10-10 लाख रुपये आर्थिक सहायता और एक-एक सदस्य को नौकरी की मांग कर रहे थे। बाद में पंचायत स्तर पर बैठक कर शव लेने को राजी हुए। उन्हें एक मांग पत्र सौंपा है, जो डीसी के समक्ष रखा जाएगा। नियमानुसार आर्थिक सहायता और नौकरी का प्रावधान होने पर दी जाएगी।
-रामनिवास, तहसीलदार
इमरजेंसी में जाने के लिए रास्ता नहीं
अस्पताल परिसर में इमरजेंसी के बाहर वाहनों की कतार लग गई। हालात ये रहे कि एंबुलेंस को भी इमरजेंसी के पास जाने के लिए भी जगह नहीं थी जिस कारण स्टाफ सदस्यों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।