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सरकारी अस्पताल के एलटी ने खुद की लैब चला लिया अस्पताल के टेस्ट का ठेका, टर्मिनेट
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल में अनुबंध लगा लैब टेक्नीशियन 17 साल से न केवल प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहा था बल्कि खुद की प्राइवेट लैब भी चला रहा था। इतना ही नहीं अस्पताल से विभिन्न तरह के टेस्ट करने का ठेका भी ले रहा था। शिकायत के बाद जांच हुई तो इसका खुलासा हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने एलटी का अनुबंध समाप्त कर दिया है। इसके अलावा केस से संबंधित अन्य जांच भी करवाई जा रही है। उनमें दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
सामान्य अस्पताल में 2002 से अनुबंध पर लगे लैब टेक्नीशियन अनिल चहल के खिलाफ दादरी वासी जितेंद्र ने शिकायत की थी। शिकायत में गलत तरीके से स्वास्थ्य विभाग से टेस्ट का ठेका लेने, सरकारी नौकरी में होते हुए प्राइवेट प्रेक्टिस करने और बिना डॉक्टर के हस्ताक्षर के रिपोर्ट मरीजों को देने जैसे आरोप थे।
आरोपों के बाद जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संध्या, एसएमओ डॉ. जितेंद्र, डॉ. राकेश खटक शामिल रहे। जांच में पाया गया कि लैब टेक्नीशियन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ धोखाधड़ी की है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सामान्य अस्पताल में एलटी होते हुए अनिल कुमार चहल ने प्राइवेट प्रेक्टिस की। रोहतक गेट पर अपनी लैब चलाई। इसके अलावा सरकार से टेस्ट करने के टेंडर भी लिए। जांच रिपोर्ट डीसी के पास भेजी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसको बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा अन्य शिकायतों की जांच भी चलेगी।
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पूर्व अधिकारी भी सवालों के घेरे में, पहले सीधे दिया ठेका, विवाद होने पर निकाला टेंडर
एलटी अनिल कुमार के स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे। जिनका फायदा उसे दिया गया। 15 जून 2017 में बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के उसे अस्पताल के टेस्ट करने का टेंडर दे दिया गया। समाचार पत्रों में मामला उठा तो आनन-फानन में अनुबंध रद्द कर टेंडर आमंत्रित किए गए। जिसके बाद सितंबर 2017 में फिर से अनिल कुमार को ही टेंडर दे दिया गया। केस की सहीं जांच होती है तो कुछ पूर्व अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं।
विभाग को पहुंचाया नुकसान, रिकवरी होनी चाहिए
शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार ने बताया कि अनिल कुमार चहल ने स्वास्थ्य विभाग को लाखों का नुकसान पहुंचाया है। बिना पैथोलॉजिस्ट के सेंपलों की जांच कर मरीजों को दिए गए। बिना टेंडर के टेस्ट का ठेका उसे दिया गया। मामला उठा तो रद्द कर दिया गया। बाद में टेंडर आमंत्रित कर भी उसे ही ठेका दे दिया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भी मिली भगत है। मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को हुए लाखों के नुकसान की रिकवरी की जानी चाहिए।
अनुबंध लगे एलटी अनिल कुमार को जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। उसकी कुछ और जांच भी चल रही है। जरूरत हुई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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भिवानी। सामान्य अस्पताल में अनुबंध लगा लैब टेक्नीशियन 17 साल से न केवल प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहा था बल्कि खुद की प्राइवेट लैब भी चला रहा था। इतना ही नहीं अस्पताल से विभिन्न तरह के टेस्ट करने का ठेका भी ले रहा था। शिकायत के बाद जांच हुई तो इसका खुलासा हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने एलटी का अनुबंध समाप्त कर दिया है। इसके अलावा केस से संबंधित अन्य जांच भी करवाई जा रही है। उनमें दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
सामान्य अस्पताल में 2002 से अनुबंध पर लगे लैब टेक्नीशियन अनिल चहल के खिलाफ दादरी वासी जितेंद्र ने शिकायत की थी। शिकायत में गलत तरीके से स्वास्थ्य विभाग से टेस्ट का ठेका लेने, सरकारी नौकरी में होते हुए प्राइवेट प्रेक्टिस करने और बिना डॉक्टर के हस्ताक्षर के रिपोर्ट मरीजों को देने जैसे आरोप थे।
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आरोपों के बाद जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संध्या, एसएमओ डॉ. जितेंद्र, डॉ. राकेश खटक शामिल रहे। जांच में पाया गया कि लैब टेक्नीशियन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ धोखाधड़ी की है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सामान्य अस्पताल में एलटी होते हुए अनिल कुमार चहल ने प्राइवेट प्रेक्टिस की। रोहतक गेट पर अपनी लैब चलाई। इसके अलावा सरकार से टेस्ट करने के टेंडर भी लिए। जांच रिपोर्ट डीसी के पास भेजी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उसको बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा अन्य शिकायतों की जांच भी चलेगी।
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पूर्व अधिकारी भी सवालों के घेरे में, पहले सीधे दिया ठेका, विवाद होने पर निकाला टेंडर
एलटी अनिल कुमार के स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे। जिनका फायदा उसे दिया गया। 15 जून 2017 में बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के उसे अस्पताल के टेस्ट करने का टेंडर दे दिया गया। समाचार पत्रों में मामला उठा तो आनन-फानन में अनुबंध रद्द कर टेंडर आमंत्रित किए गए। जिसके बाद सितंबर 2017 में फिर से अनिल कुमार को ही टेंडर दे दिया गया। केस की सहीं जांच होती है तो कुछ पूर्व अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं।
विभाग को पहुंचाया नुकसान, रिकवरी होनी चाहिए
शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार ने बताया कि अनिल कुमार चहल ने स्वास्थ्य विभाग को लाखों का नुकसान पहुंचाया है। बिना पैथोलॉजिस्ट के सेंपलों की जांच कर मरीजों को दिए गए। बिना टेंडर के टेस्ट का ठेका उसे दिया गया। मामला उठा तो रद्द कर दिया गया। बाद में टेंडर आमंत्रित कर भी उसे ही ठेका दे दिया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भी मिली भगत है। मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को हुए लाखों के नुकसान की रिकवरी की जानी चाहिए।
अनुबंध लगे एलटी अनिल कुमार को जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। उसकी कुछ और जांच भी चल रही है। जरूरत हुई तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन