{"_id":"5a81ed594f1c1b2a788b57fe","slug":"111518464345-bhiwani-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क हादसों में मरने वाले 72 फीसदी लोग दौड़ा रहे थे बिना हेल्मेट के गाड़ी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सड़क हादसों में मरने वाले 72 फीसदी लोग दौड़ा रहे थे बिना हेल्मेट के गाड़ी
Updated Tue, 13 Feb 2018 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर साल 72 फीसदी लोग हेलमेट नहीं पहनने की वजह से गंवाते हैं जान
अशोक ढिकाव
भिवानी। जिले में हर साल करीब 200 लोगों सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। जिनमें से 72 फीसदी व्यक्तियों की मौत बिना हेलमेट के वाहन चलाने के कारण हुई है। तीन साल के दौरान 592 व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं में जान गवां चुके हैं तो 770 घायल हुए हैं। पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद सड़क हादसों में कमी आने की बजाय लगातार ये घटनाएं बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण सावधानी ना बरतना व ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करना है।
भिवानी जिले की सड़कों पर लगभग दो लाख दुपहिया और 70 हजार बड़े वाहन दौड़ रहे है। सड़कों पर लगातार वाहनों का दबाव बढ़ने से सड़क हादसों में भी इजाफा हो रहा है। हर साल 150 से 200 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गवा रहे है। इतना नहीं करीब 600 व्यक्ति जिले में इन हादसों में घायल हो रहे हैं। 100 के करीब लोग विकलांगाता का दंश झेलने को मजबूर हैं। हर साल पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा पखवाड़ा मना कर वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि इन हादसों में कमी हो सके। इन सबके बावजूद वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की पालना ना करने के कारण सड़क हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
सड़क हादसों में मौत का कारण हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग ना करना
ट्रैफिक एएसआई संतलाल का कहना है कि सड़क हादसा आमतौर पर नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। जिले में 72 फीसदी व्यक्ति बिना हेलमेट व बेल्ट के वाहन दौड़ाने के कारण सड़क हादसों में जान गवा रहे हैं। एक साल से हेलमेट व सीट बेल्ट को लेकर जागरूकता जरूर आई है, लेकिन जितना गंभीर होना चाहिए आज भी लोग उतने गंभीर नहीं है। सड़कों पर रेलमपेल वाहनों की दौड़ में लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। जिससे वह खुद की जान के साथ ही दूसरों की जान भी खतरे में डाल रहे है।
विज्ञापन
------
सड़क हादसों की स्थिति
दर्ज केस 2015 2016 2017
304ए 163 130 147
337, 279 193 201 306
मृत 203 196 193
घायल 493 508 663
वर्ष सड़क हादसे मौत दोपहिया युवा बिना हेलमेट
2015 163 203 -- 80 प्रतिशत 75 प्रतिशत
2016 130 196 -- 70 प्रतिशत 70 प्रतिशत
2017 147 193 -- 65 प्रतिशत 65 प्रतिशत
वर्जन
सड़क हादसों को रोकने के लिए सबसे पहले हर इंसान को खुद जागरूक होना पड़ेगा। इन हादसों को रोकने के लिए पुलिस का जन सहयोग होना जरूरी है। पुलिस द्वारा इन हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाया गया। जिसके तहत हजारों युवाओं, चालकों व आमजन को नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
--- पवन कुमार, ट्रैफिक इंस्पेक्टर ---
विज्ञापन
अशोक ढिकाव
भिवानी। जिले में हर साल करीब 200 लोगों सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। जिनमें से 72 फीसदी व्यक्तियों की मौत बिना हेलमेट के वाहन चलाने के कारण हुई है। तीन साल के दौरान 592 व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं में जान गवां चुके हैं तो 770 घायल हुए हैं। पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद सड़क हादसों में कमी आने की बजाय लगातार ये घटनाएं बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण सावधानी ना बरतना व ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करना है।
भिवानी जिले की सड़कों पर लगभग दो लाख दुपहिया और 70 हजार बड़े वाहन दौड़ रहे है। सड़कों पर लगातार वाहनों का दबाव बढ़ने से सड़क हादसों में भी इजाफा हो रहा है। हर साल 150 से 200 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गवा रहे है। इतना नहीं करीब 600 व्यक्ति जिले में इन हादसों में घायल हो रहे हैं। 100 के करीब लोग विकलांगाता का दंश झेलने को मजबूर हैं। हर साल पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा पखवाड़ा मना कर वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि इन हादसों में कमी हो सके। इन सबके बावजूद वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की पालना ना करने के कारण सड़क हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
विज्ञापन
सड़क हादसों में मौत का कारण हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग ना करना
ट्रैफिक एएसआई संतलाल का कहना है कि सड़क हादसा आमतौर पर नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। जिले में 72 फीसदी व्यक्ति बिना हेलमेट व बेल्ट के वाहन दौड़ाने के कारण सड़क हादसों में जान गवा रहे हैं। एक साल से हेलमेट व सीट बेल्ट को लेकर जागरूकता जरूर आई है, लेकिन जितना गंभीर होना चाहिए आज भी लोग उतने गंभीर नहीं है। सड़कों पर रेलमपेल वाहनों की दौड़ में लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। जिससे वह खुद की जान के साथ ही दूसरों की जान भी खतरे में डाल रहे है।
विज्ञापन
------
सड़क हादसों की स्थिति
दर्ज केस 2015 2016 2017
304ए 163 130 147
337, 279 193 201 306
मृत 203 196 193
घायल 493 508 663
वर्ष सड़क हादसे मौत दोपहिया युवा बिना हेलमेट
2015 163 203 -- 80 प्रतिशत 75 प्रतिशत
2016 130 196 -- 70 प्रतिशत 70 प्रतिशत
2017 147 193 -- 65 प्रतिशत 65 प्रतिशत
वर्जन
सड़क हादसों को रोकने के लिए सबसे पहले हर इंसान को खुद जागरूक होना पड़ेगा। इन हादसों को रोकने के लिए पुलिस का जन सहयोग होना जरूरी है। पुलिस द्वारा इन हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाया गया। जिसके तहत हजारों युवाओं, चालकों व आमजन को नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
--- पवन कुमार, ट्रैफिक इंस्पेक्टर ---