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पुरानी रंजिश में कोर्ट परिसर में चचेरे भाई को गोली मारने वाले युवक को 10 साल कैद
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भिवानी। 27 दिसंबर 2017 को पुरानी रंजिश में कोर्ट परिसर में ही अपने चचेरे भाई को गोली मारने के आरोपी को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमंत यादव की अदालत ने दोषी करार देते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा उस पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है।
गांव संड़वा वासी महाबीर का परिवार काफी वर्षों से विद्यानगर कॉलोनी में रहता है। उसका परिवार में ही आपस में विवाद चल रहा है। इसी विवाद के चलते महाबीर के बेटे सुभाष को कोर्ट परिसर में गोली मार दी गई थी। सुभाष वकीलों के चैंबर के पास चाय के खोखे पर बैठा था। इसी दौरान एक युवक आया और सुभाष की कनपटी पर पिस्तौल रखकर गोली चला दी। इसके बाद पैदल ही भाग गया था। जांच में पुलिस ने महाबीर के ही भाई के लड़के ईश्वर को बाद में गिरफ्तार किया था। इसी मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमंत यादव की अदालत ने ईश्वर को दोषी करार दिया। हत्या के प्रयास में उसे 10 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, आर्म्स एक्ट के तहत दो साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई हेै।
दिमाग के पास से निकल गई थी गोली
वर्ष 2017 में जब सुभाष पर गोली चलाई गई थी जो वह गोली दिमाग के पास से निकल गई थी। ऑपरेशन के बाद गोली निकाली गई थी। चिकित्सक ने उस समय बताया था कि सुभाष खुशकिस्मत था कि गोली दिमाग में नहीं लगी, अन्यथा खतरा हो सकता था।
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वर्षों से चल रही है दुश्मनी
दोनों परिवारों में पिछले करीब 13 साल से पारिवारिक रंजिश चल रही है। इसके अलावा जमीनी विवाद भी चल रहा है। मई 2008 में इस मामले में सुभाष के चाचा का मर्डर भी हो चुका है। इसी विवाद के चलते महावीर का परिवार भिवानी में रहने लगा।
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गांव संड़वा वासी महाबीर का परिवार काफी वर्षों से विद्यानगर कॉलोनी में रहता है। उसका परिवार में ही आपस में विवाद चल रहा है। इसी विवाद के चलते महाबीर के बेटे सुभाष को कोर्ट परिसर में गोली मार दी गई थी। सुभाष वकीलों के चैंबर के पास चाय के खोखे पर बैठा था। इसी दौरान एक युवक आया और सुभाष की कनपटी पर पिस्तौल रखकर गोली चला दी। इसके बाद पैदल ही भाग गया था। जांच में पुलिस ने महाबीर के ही भाई के लड़के ईश्वर को बाद में गिरफ्तार किया था। इसी मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमंत यादव की अदालत ने ईश्वर को दोषी करार दिया। हत्या के प्रयास में उसे 10 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, आर्म्स एक्ट के तहत दो साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई हेै।
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दिमाग के पास से निकल गई थी गोली
वर्ष 2017 में जब सुभाष पर गोली चलाई गई थी जो वह गोली दिमाग के पास से निकल गई थी। ऑपरेशन के बाद गोली निकाली गई थी। चिकित्सक ने उस समय बताया था कि सुभाष खुशकिस्मत था कि गोली दिमाग में नहीं लगी, अन्यथा खतरा हो सकता था।
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वर्षों से चल रही है दुश्मनी
दोनों परिवारों में पिछले करीब 13 साल से पारिवारिक रंजिश चल रही है। इसके अलावा जमीनी विवाद भी चल रहा है। मई 2008 में इस मामले में सुभाष के चाचा का मर्डर भी हो चुका है। इसी विवाद के चलते महावीर का परिवार भिवानी में रहने लगा।