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कुकिंग कोस्ट बढ़ाई, जिले के 57 हजार बच्चों के खाते में आएंगे रुपये

Thu, 21 May 2020 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 12:03 AM IST
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Cooking cost increased, money will transfer in  students accounts.
भिवानी। सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के पौष्टिक भोजन का स्वाद चखने वाले जिले के 57 हजार बच्चों के बैंक खाते में जून माह के दौरान बढ़ी हुई कुकिंग कोस्ट की राशि डाली जाएगी। कोविड-19 की वजह से चल रहे लॉकडाउन में सभी सरकारी स्कूल बंद हैं। भिवानी जिले में प्राइमरी विंग यानी पहली से पांचवीं तक करीब 34 हजार और अपर प्राइमरी में छठी से आठवीं तक करीब 23 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से मिड डे मील कुकिंग कोस्ट बढ़ोतरी के आदेशों के बाद कक्षा पहली से पांचवीं तक पढ़ाई करने वाले बच्चों को प्रति बच्चा 4.97 पैसे कुकिंग कोस्ट मिलेगा जबकि पहले प्राइमरी विंग में 4.48 पैसे कुकिंग कोस्ट थी। इसमें 49 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। वहीं अपर प्राइमरी विंग में पहले 6.71 पैसे कुकिंग कोस्ट दी जा रही थी। अब इसे 7.45 करते हुए 74 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। जून माह के दौरान ये पैसा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों को भेजा जाएगा। जिसके बाद स्कूल संबंधित बच्चों के खाते में इस मद की राशि भेजेगा।
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48 दिन का सूखा राशन भी बच्चों को मिला
कक्षा पहली से आठवीं तक के सभी विद्यार्थियों को 48 दिन यानी मई और जून माह का राशन एडवांस में भेजा गया है। इसमें 24 दिन मई और 24 दिन जून का राशन शामिल है। प्रत्येक बच्चे को प्राइमरी विंग में 4.80 किलोग्राम व अपर प्राइमरी में 7.200 किलोग्राम गेहूं और चावल दिया है। प्राइमरी में प्रतिदिन प्रति बच्चा सौ ग्राम पौष्टिक आहार शामिल है, जबकि अपर प्राइमरी में 150 ग्राम पौष्टिक खुराक दी जा रही है। भिवानी जिले में 445 प्रवइमरी व 304 अपर प्राइमरी यानी 749 स्कूलों में 57 हजार बच्चों के खाते में कुकिंग कोस्ट का पैसा आएगा।
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प्रवासी मजदूरों के पलायन से घटेगी सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या
सरकारी स्कूलों में अधिकांश गरीब तबके व प्रवासी मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं। प्रत्येक बच्चे को आधार कार्ड के साथ जोड़ा हुआ है, लेकिन लॉकडाउन में अधिकांश मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं। ये बच्चे सरकारी स्कूल से दाखिल खारिज कराए बगैर अभिभावकों के साथ घर चले गए हैं। जब स्कूल खुलेंगे तो बच्चों की उपस्थिति के साथ ही आंकड़ों का गणित बिगड़ना लाजमी है। बिना उपस्थिति के मिड डे मील के राशन की खपत दर्शाना भी गुरुजी की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तरफ से मिड डे मिल में कुकिंग कोस्ट बढ़ाई गई है। बढ़ी हुई दर से सभी बच्चों के खाते में पैसा डाला जाएगा। प्रवासी मजदूर परिवारों के बच्चों के खाते में भी पैसा डाला जाएगा। कितनी संख्या सरकारी स्कूलों में घटी है, इसका पता स्कूल खुलने के बाद चलेगा। - अजीत सिंह श्योराण, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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