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बच्चों पर संकट: भिवानी में तीन माह में 420 बच्चे मिले संक्रमित, 332 ने कोरोना को दी मात

Wed, 19 May 2021 08:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा)
शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Wed, 19 May 2021 08:43 PM IST
सार

बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन बाजार में नहीं आई। ऐसे में सुरक्षा ही बचाव है। बच्चों की सुरक्षा के लिए घर के बड़ों को सावधानी रखनी होगी।

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420 Children tested corona positive in three months at Bhiwani of Haryana
भिवानी में बच्चों में संक्रमण - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर ने सभी को बुरी तरह झकझोर दिया है। अब अंदेशा जताया जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित होंगे। तीसरी लहर आती है तो यह काफी घातक साबित हो सकती है। क्योंकि सरकारी ही नहीं निजी अस्पतालों में भी बच्चों के लिए उपचार की व्यवस्था नाममात्र है। न बच्चों के चिकित्सक हैं और न ही अन्य व्यवस्थाएं।

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भिवानी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल तीन माह में 12 साल तक के 420 बच्चे संक्रमित हुए, जिनमें 332 रिकवर हो चुके हैं। 88 एक्टिव केस हैं। अगर एक साल तक के नवजात बच्चों की बात करें तो 17 बच्चे पिछले तीन माह के दौरान पॉजिटिव हुए, जिनमें से 15 ठीक हो चुके हैं और दो एक्टिव हैं। मंगलवार को 12 साल तक के 14 बच्चे संक्रमित मिले थे। हालांकि पिछले तीन माह में बच्चों की रिकवरी रेट बेहतर रही है। सामान्य अस्पताल में एक मात्र बाल रोग विशेषज्ञ है। जिले में प्राइवेट अस्पताल में भी बमुश्किल आठ से 10 बाल रोग विशेषज्ञ हैं जबकि अभी जिले में बच्चों की औसतन ओपीडी 2500 के करीब है।

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मां का दूध बन रहा अमृत

नवजात बच्चों के लिए मां का दूध अमृत साबित हो रहा है। मां के दूध से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अब तक जिले में एक साल तक के 17 बच्चों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिनमें से 15 ठीक हो चुके हैं। दो का उपचार चल रहा है।

बच्चों में खांसी-जुकाम, बुखार के साथ डायरिया
जिले में सामने आ रहे कोरोना संक्रमित बच्चों में खांसी-जुकाम, बुखार के साथ डायरिया की शिकायत भी सामने आ रही है। बड़ों में जहां निमोनिया की समस्या सामने आ रही है, वहीं बच्चों में खांसी, जुकाम, बुखार की समस्या ज्यादा है।

बचाव
बच्चों की सुरक्षा दो तरह से संभव है, एक तो बच्चे बाहरी के संपर्क में न आएं। अभी स्कूल बंद हैं, बच्चे बाहर खेलने नहीं जा रहे हैं तो ऐसे में बाहरी के संपर्क में आने की आशंका कम है। इसके अलावा बच्चों के लिए घर के ही बड़े खतरा है। परिवार के बड़ों को कुछ विशेष सावधानी रखनी होगी।

ये रखें सावधानी :
- बड़े कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पालन करें। बाहर जाएं तो मास्क लगाएं और सामुदायिक दूरी का ख्याल रखें।
- घर के बड़े कोरोना से बचाव की वैक्सीन अवश्य लगवाएं।
- कोरोना संबंधित लक्षण नजर आने पर तुरंत अपनी जांच करवाएं, समय रहते आइसोलेट हों।
- बच्चों की तबीयत खराब होने पर उनका तुरंत इलाज करवाएं और चिकित्सक की सलाह पर कोरोना टेस्ट भी करवाएं।

मोटे और घर में रहने वाले बच्चों पर खतरा
बीमारियों का ज्यादा खतरा घर में रहने वाले और मोटे बच्चों पर ज्यादा है। जो बच्चे आउटडोर खेल यानी मैदानी खेल, गली में खेलते हैं उनकी अपेक्षाकृत घर में रहकर मोबाइल गेम या वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों को बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।

एक्सपर्ट व्यू : डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ
अभी तक बच्चों के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है, ऐसे में सावधानी जरूरी है। बड़ों को सावधानी रखनी होगी। बच्चों के खानपान, कोरोना से बचाव के संबंध में कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। घर के सभी बड़े वैक्सीन लगवाएं तो बच्चों को खतरा थोड़ा कम रहेगा। साथ ही सबसे ज्यादा जरूरी है कि समय पर जांच और समय पर पूरा इलाज।
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