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सीएचसी में नहीं दूबलधन-माजरा अपने घर पर आराम फरमा रहा था चिकित्सक नरेश
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:46 AM IST
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बौंदकलां। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गत एक दिसंबर को उपचार के अभाव में हुई महिला की मौत मामले में पुलिस ने चिकित्सक की कॉल डिटेल निकलवाकर मामले का पटाक्षेप कर दिया है। कॉल डिटेल में स्पष्ट हो गया कि घटना के समय चिकित्सक ड्यूटी से फरलो मारकर गांव दूबलधन-माजरा स्थिति अपने घर में आराम फरमा रहा था। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट को मुख्यमंत्री कष्ट निवारण सैल को भी भेज दिया है। वहीं, इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच रिपोर्ट में चिकित्सक को दी गई क्लीन चिट पर भी सवालियां निशान खड़े हो गए हैं।
पुलिस अधीक्षक भिवानी द्वारा मुख्यमंत्री कष्ट निवारण सैल हरियाणा चंडीगढ़ को जारी पत्र क्रमांक 1601- पी में बताया कि उप पुलिस अधीक्षक भिवानी द्वारा कराई गई जांच से पाया गया है कि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर चिकित्सक नरेश के तीन मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाकर अध्ययन किया गया। इनमें स्पष्ट हो गया कि एक दिसंबर को चिकित्सक नरेश सीएचसी बौंदकलां से गैरहाजिर होकर अपने गांव में मौजूद था। चिकित्सक की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग को भी अवगत करवा दिया गया है।
झूठी जांच रिपोर्ट तैयार करवाने में नप सकते है कर्मचारी और अधिकारी
मृतका के बेटे अमित द्वारा मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग में दर्ज करवाने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार करवाई गई थी। मामले की जांच करने के लिए नियुक्त किए गए अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में चिकित्सक की गलती को नकारा है। विभाग ने पीड़ित को आरटीआई के माध्यम से जो जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रति सौंपी है उसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा दिए गए बयान चिकित्सक को सीएचसी में ही मौजूद बता रहें है।
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स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. सुमन को नियुक्त किया था। डिप्टी सीएमओ ने मामले की जांच रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। विभाग ने अमित परमार के पास डाक के माध्यम से जांच रिर्पोट की सत्यापित प्रति भेजी है। उसमें विभाग के कर्मचारियों ने जो ब्यान दिए है। उनके अनुसार डॉक्टर सीएचसी में ही मौजूद थे।
चिकित्सक ने खुद को बताया था सीएचसी में तैनात
आरोपी चिकित्सक नरेश ने जांच कर रही टीम को दिए बयान में बताया था कि 30 नवंबर को सुबह से शाम तक पीएचसी रानीला में ओपीडी में कार्यरत था। इसके बाद ऑन कॉल ड्यूटी सीएचसी बौंदकलां पर थी। फिर दिन भर कार्य करने के बाद सिर दर्द की दवा लेकर सीएचसी की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में आराम करने चला गया। वहां पर नींद आ गई और रात का खाना भी रह गया। मानसिक थकान की वजह से ड्यूटी पर कार्यरत स्टॉफ को बताना भूल गया।
चौकीदार और स्टॉफ नर्स ने यूं किया चिकित्सक का बचाव
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चौकीदार मनबीर ने अपने बयान में बताया था कि घटनाक्रम से पहली रात जब वह ड्यूटी पर आया तो चिकित्सक नरेश वहीं मौजूद थे। रातभर वो ड्यूटी पर ही रहें। कुछ देर बाद तबीयत खराब होने के कारण ऊपर बने कमरे में आराम करने चले गए। सुबह उसने ऊपर जाकर उन्हें चाय दी और उन्होंने दवा भी ली। इसके अलावा चिकित्सक अकुंर भी नरेश को सीएचसी में ड्यूटी पर हाजिर होने के बयान दे चुके है। वहीं, स्टॉफ नर्स अनीता देवी और मोहिनी ने बयान में बताया कि मरीज के परिजन महिला को अस्पताल परिसर में लेकर आए थे। मरीज की वीटल साइन चैक किए तो महिला की पल्श, बीपी गायब थे। मरीज की सांसें नहीं चल रही थी। चिकित्सक को कॉल करने से पहले ही परिजन उसे ले गए।
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पुलिस अधीक्षक भिवानी द्वारा मुख्यमंत्री कष्ट निवारण सैल हरियाणा चंडीगढ़ को जारी पत्र क्रमांक 1601- पी में बताया कि उप पुलिस अधीक्षक भिवानी द्वारा कराई गई जांच से पाया गया है कि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर चिकित्सक नरेश के तीन मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाकर अध्ययन किया गया। इनमें स्पष्ट हो गया कि एक दिसंबर को चिकित्सक नरेश सीएचसी बौंदकलां से गैरहाजिर होकर अपने गांव में मौजूद था। चिकित्सक की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग को भी अवगत करवा दिया गया है।
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झूठी जांच रिपोर्ट तैयार करवाने में नप सकते है कर्मचारी और अधिकारी
मृतका के बेटे अमित द्वारा मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग में दर्ज करवाने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार करवाई गई थी। मामले की जांच करने के लिए नियुक्त किए गए अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में चिकित्सक की गलती को नकारा है। विभाग ने पीड़ित को आरटीआई के माध्यम से जो जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रति सौंपी है उसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा दिए गए बयान चिकित्सक को सीएचसी में ही मौजूद बता रहें है।
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स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. सुमन को नियुक्त किया था। डिप्टी सीएमओ ने मामले की जांच रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। विभाग ने अमित परमार के पास डाक के माध्यम से जांच रिर्पोट की सत्यापित प्रति भेजी है। उसमें विभाग के कर्मचारियों ने जो ब्यान दिए है। उनके अनुसार डॉक्टर सीएचसी में ही मौजूद थे।
चिकित्सक ने खुद को बताया था सीएचसी में तैनात
आरोपी चिकित्सक नरेश ने जांच कर रही टीम को दिए बयान में बताया था कि 30 नवंबर को सुबह से शाम तक पीएचसी रानीला में ओपीडी में कार्यरत था। इसके बाद ऑन कॉल ड्यूटी सीएचसी बौंदकलां पर थी। फिर दिन भर कार्य करने के बाद सिर दर्द की दवा लेकर सीएचसी की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में आराम करने चला गया। वहां पर नींद आ गई और रात का खाना भी रह गया। मानसिक थकान की वजह से ड्यूटी पर कार्यरत स्टॉफ को बताना भूल गया।
चौकीदार और स्टॉफ नर्स ने यूं किया चिकित्सक का बचाव
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चौकीदार मनबीर ने अपने बयान में बताया था कि घटनाक्रम से पहली रात जब वह ड्यूटी पर आया तो चिकित्सक नरेश वहीं मौजूद थे। रातभर वो ड्यूटी पर ही रहें। कुछ देर बाद तबीयत खराब होने के कारण ऊपर बने कमरे में आराम करने चले गए। सुबह उसने ऊपर जाकर उन्हें चाय दी और उन्होंने दवा भी ली। इसके अलावा चिकित्सक अकुंर भी नरेश को सीएचसी में ड्यूटी पर हाजिर होने के बयान दे चुके है। वहीं, स्टॉफ नर्स अनीता देवी और मोहिनी ने बयान में बताया कि मरीज के परिजन महिला को अस्पताल परिसर में लेकर आए थे। मरीज की वीटल साइन चैक किए तो महिला की पल्श, बीपी गायब थे। मरीज की सांसें नहीं चल रही थी। चिकित्सक को कॉल करने से पहले ही परिजन उसे ले गए।