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Bhiwani News: गागड़वास में होली के रंग के संग निभाते आ रहे सदियों पुरानी परंपरा
Wed, 12 Mar 2025 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 12 Mar 2025 10:32 PM IST
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गांव गागड़वास का मुख्य द्वार।
ढिगावा मंडी। राजस्थान सीमांत इलाके के गांव गागड़वास में होली के रंगों के संग सदियों से ग्रामीण पुरानी परंपरा को निभाते आ रहे हैं। ये परंपरा लोगों की गहरी आस्था से भी जुड़ी है। होली से पहले पूरे गांव की फिरनी पर कार लगाई जाती है, जिसमें पानी, तेल, दूध और शराब का मिश्रण होता है। ये मिश्रण एक मिट्टी के मटके में भरकर उसके अंदर सुराख कर लगाई जाती है। ग्रामीणों की आस्था है कि कार लगाने से बड़ी आपदा और विपदा से बचाव रहता है।
गागड़वास के सरपंच अमन ने बताया कि पुरानी मान्यता के अनुसार राजस्थान से आए गागड़ परिवार ने संवत 1531 में टीले पर गागड़वास गांव बसाया था। उस समय ऊंचे टीले पर गांव पर कई बीमारियों के संकट भी आए। उस दौर में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज ग्रामीणों को ऊंचे टीले पर बसे गांव के उजड़ने के कारण से आदेश दिया था कि टीले से नीचे दक्षिण दिशा में बस जाओ।
इसके बाद संवत 1810 में उन्हीं पूर्वजों के वंशज खेमकरण भगत ने टीले से नीचे गांव को फिर से बसाया था। तभी से लेकर होली पर महामारी से छुटकारा पाने और बुरी शक्तियों से निजात दिलाने के लिए गांव के बाहर फिरनी पर पूरे गांव की कार लगाने यानी पानी, दूध, तेल और शराब मिलाकर गेहूं की बाकली को थैले में भरकर गांव के कुएं के पास से लेकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा को गांव के युवा निभाते हैं।
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कार लगाने के दौरान खासकर गांव के लोग भी गांव की फिरनी से बाहर नहीं जाते। न ही कोई गांव की फिरनी में अंदर सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए दाखिल होता है। गांव के वंशज खेमकरण भगत के नाम से गांव में भव्य स्वागत द्वार भी बना है।
मेरे गांव गाड़वास में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज का आज भी प्राचीन मंदिर है। इसके अंदर सदियों पुराने पदचिह्न हैं। मेरे गांव के लोग अपनी संस्कृति और प्राचीन धरोहर एवं परंपराओं को आज भी उसी उत्साह और उल्लास के साथ निभाते हैं, जो कभी हमारे पूर्वज निभाते थे। गांव के युवाओं की इन परंपराओं में ज्यादा भागेदारी रहती है, इससे अच्छी बात यह है कि वे गांव के इतिहास और अपने पूर्वजों के बारे में बेहतर ढंग से समझ रख इन परंपराओं को भी निभाते हैं।
- जगदीप सिंह, सेवानिवृत्त आयुक्त हरियाणा सरकार।
ये गांव न केवल आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो रहा है। वहीं पुरानी परंपराओं से भी लगातार नाता जोड़े हुए हैं। करीब 270 सालों से गांव के लोग कार लगाने की परंपरा को निरंतर निभाते आ रहे हैं, ये केवल आस्था ही नहीं बल्कि धर्म और संस्कृति से भी जुड़ा पुनीत कार्य है। इसमें सभी ग्रामीण बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। छोटा सा गांव होने के बावजूद यहां के लोग राजनीतिक रूप से काफी जागरूकता रखते हैं और बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी इस गांव के लोग रह चुके हैं।
-अमन सरपंच गांव गागड़वास।
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गागड़वास के सरपंच अमन ने बताया कि पुरानी मान्यता के अनुसार राजस्थान से आए गागड़ परिवार ने संवत 1531 में टीले पर गागड़वास गांव बसाया था। उस समय ऊंचे टीले पर गांव पर कई बीमारियों के संकट भी आए। उस दौर में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज ग्रामीणों को ऊंचे टीले पर बसे गांव के उजड़ने के कारण से आदेश दिया था कि टीले से नीचे दक्षिण दिशा में बस जाओ।
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इसके बाद संवत 1810 में उन्हीं पूर्वजों के वंशज खेमकरण भगत ने टीले से नीचे गांव को फिर से बसाया था। तभी से लेकर होली पर महामारी से छुटकारा पाने और बुरी शक्तियों से निजात दिलाने के लिए गांव के बाहर फिरनी पर पूरे गांव की कार लगाने यानी पानी, दूध, तेल और शराब मिलाकर गेहूं की बाकली को थैले में भरकर गांव के कुएं के पास से लेकर सुरक्षा घेरा बनाने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा को गांव के युवा निभाते हैं।
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कार लगाने के दौरान खासकर गांव के लोग भी गांव की फिरनी से बाहर नहीं जाते। न ही कोई गांव की फिरनी में अंदर सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए दाखिल होता है। गांव के वंशज खेमकरण भगत के नाम से गांव में भव्य स्वागत द्वार भी बना है।
मेरे गांव गाड़वास में दादु पंथ के बाबा बुधनाथ महाराज का आज भी प्राचीन मंदिर है। इसके अंदर सदियों पुराने पदचिह्न हैं। मेरे गांव के लोग अपनी संस्कृति और प्राचीन धरोहर एवं परंपराओं को आज भी उसी उत्साह और उल्लास के साथ निभाते हैं, जो कभी हमारे पूर्वज निभाते थे। गांव के युवाओं की इन परंपराओं में ज्यादा भागेदारी रहती है, इससे अच्छी बात यह है कि वे गांव के इतिहास और अपने पूर्वजों के बारे में बेहतर ढंग से समझ रख इन परंपराओं को भी निभाते हैं।
- जगदीप सिंह, सेवानिवृत्त आयुक्त हरियाणा सरकार।
ये गांव न केवल आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो रहा है। वहीं पुरानी परंपराओं से भी लगातार नाता जोड़े हुए हैं। करीब 270 सालों से गांव के लोग कार लगाने की परंपरा को निरंतर निभाते आ रहे हैं, ये केवल आस्था ही नहीं बल्कि धर्म और संस्कृति से भी जुड़ा पुनीत कार्य है। इसमें सभी ग्रामीण बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। छोटा सा गांव होने के बावजूद यहां के लोग राजनीतिक रूप से काफी जागरूकता रखते हैं और बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी इस गांव के लोग रह चुके हैं।
-अमन सरपंच गांव गागड़वास।