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बिल्डिंग इंस्पेक्टर नहीं होने से अधर में लटके 350 भवनों के नक्शे
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नगर परिषद के पास पिछले एक साल से एक भी बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआई) नहीं है। इस वजह से शहर के 31 वार्डों में करीब 350 भवनों के नक्शे लंबित पड़े हैं। कुछ समय पहले झज्जर के एक बीआई को भिवानी नप का अतिरिक्त कार्यभार मिला था, लेकिन लॉकडाउन में वह भी नहीं पहुंच पाए। ऐसे में कुछ बिना नक्शे के भवन बनाने को मजबूर हैं तो कुछ नक्शे पास होने का इंतजार कर रहे है।
वर्तमान में नगर परिषद में नियमों के अनुसार बीआई के दो पद रिक्त हैं। बीआई नहीं होने की वजह से नप अधिकारी निर्माणाधीन साइटों का निरीक्षण भी नहीं कर पा रहे हैं और न ही नक्शों को पास कर पा रहे हैं, क्योंकि इनके लिए बिल्डिंग इंस्पेक्टर तकनीकी अधिकारी के तौर अहम भूमिका निभाता है। वहीं ऑनलाइन प्रक्रिया भी उन्हीं पर निर्भर है।
नगर निगम बनने के नजदीक है भिवानी नप
भिवानी शहर की 31 वार्डों की आबादी ढाई लाख से अधिक है। इसके अलावा नगर परिषद ने शहरी सीमाओं की हदें बढ़ाने के संबंध में प्रस्ताव पास कर शहरी निकाय विभाग को भेजा हुआ है, जिस पर मुख्यालय की मंजूरी का इंतजार है। नगर निगम बनाने में तीन लाख शहरी आबादी होना अनिवार्य है। शहर के आसपास के इलाके में दर्जनों कॉलोनियां आबाद हो चुकी हैं, जिन्हें नप में शामिल करते ही जनसंख्या का आंकड़ा तीन लाख से पार हो सकता है।
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ताक पर नियम, धड़ल्ले से चल रहा शहर में अवैध निर्माण
नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से शहर भर में दर्जनों जगहों पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। बिना अनुमति और बिना नक्शा पास कराए इन निर्माणों की जांच करने भी कोई नहीं पहुंच रहा है। नप अधिकारी खुद को बेबस समझ रहे हैं। नप के पास अन्य अधिकारी तो हैं, मगर वे बीआई के बिना साइट का निरीक्षण नहीं कर सकते हैं।
जेई चला रहा बीआई का काम
नगर परिषद कार्यालय में बीआई के काम की जिम्मेवारी जेई यानी तकनीकी विंग के कनिष्ठ अभियंता को सौंपी गई है। लेकिन जेई को अभी शहर भर में चल रहे अवैध निर्माण और लंबित नक्शों के संबंध में भी जानकारी जुटाने में थोड़ा वक्त लगेगा। ढाई से लाख से ज्यादा की आबादी और 31 वार्डों के दायरे में एक से अधिक बीआई होने पर ही काम सुचारु रूप से चल सकता है।
नगर परिषद के पास एक साल से बीआई का पद खाली है। लॉकडाउन से पहले फरवरी में झज्जर जिला से एक बीआई को यहां अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था। जो भिवानी में एक-दो बार ही आया था। लॉकडाउन के दौरान वह भिवानी नहीं आया। फिलहाल जेई बीआई का काम देख रहा है। बीआई की नियुक्ति के संबंध में शहरी निकास विभाग के समक्ष भी अनुरोध पत्र भेजा हुआ है।
- दीपक गोयल, ईओ नगर परिषद भिवानी।
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वर्तमान में नगर परिषद में नियमों के अनुसार बीआई के दो पद रिक्त हैं। बीआई नहीं होने की वजह से नप अधिकारी निर्माणाधीन साइटों का निरीक्षण भी नहीं कर पा रहे हैं और न ही नक्शों को पास कर पा रहे हैं, क्योंकि इनके लिए बिल्डिंग इंस्पेक्टर तकनीकी अधिकारी के तौर अहम भूमिका निभाता है। वहीं ऑनलाइन प्रक्रिया भी उन्हीं पर निर्भर है।
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नगर निगम बनने के नजदीक है भिवानी नप
भिवानी शहर की 31 वार्डों की आबादी ढाई लाख से अधिक है। इसके अलावा नगर परिषद ने शहरी सीमाओं की हदें बढ़ाने के संबंध में प्रस्ताव पास कर शहरी निकाय विभाग को भेजा हुआ है, जिस पर मुख्यालय की मंजूरी का इंतजार है। नगर निगम बनाने में तीन लाख शहरी आबादी होना अनिवार्य है। शहर के आसपास के इलाके में दर्जनों कॉलोनियां आबाद हो चुकी हैं, जिन्हें नप में शामिल करते ही जनसंख्या का आंकड़ा तीन लाख से पार हो सकता है।
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ताक पर नियम, धड़ल्ले से चल रहा शहर में अवैध निर्माण
नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से शहर भर में दर्जनों जगहों पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। बिना अनुमति और बिना नक्शा पास कराए इन निर्माणों की जांच करने भी कोई नहीं पहुंच रहा है। नप अधिकारी खुद को बेबस समझ रहे हैं। नप के पास अन्य अधिकारी तो हैं, मगर वे बीआई के बिना साइट का निरीक्षण नहीं कर सकते हैं।
जेई चला रहा बीआई का काम
नगर परिषद कार्यालय में बीआई के काम की जिम्मेवारी जेई यानी तकनीकी विंग के कनिष्ठ अभियंता को सौंपी गई है। लेकिन जेई को अभी शहर भर में चल रहे अवैध निर्माण और लंबित नक्शों के संबंध में भी जानकारी जुटाने में थोड़ा वक्त लगेगा। ढाई से लाख से ज्यादा की आबादी और 31 वार्डों के दायरे में एक से अधिक बीआई होने पर ही काम सुचारु रूप से चल सकता है।
नगर परिषद के पास एक साल से बीआई का पद खाली है। लॉकडाउन से पहले फरवरी में झज्जर जिला से एक बीआई को यहां अतिरिक्त कार्यभार सौंपा था। जो भिवानी में एक-दो बार ही आया था। लॉकडाउन के दौरान वह भिवानी नहीं आया। फिलहाल जेई बीआई का काम देख रहा है। बीआई की नियुक्ति के संबंध में शहरी निकास विभाग के समक्ष भी अनुरोध पत्र भेजा हुआ है।
- दीपक गोयल, ईओ नगर परिषद भिवानी।