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जाटों ने कहा, सब्र का इम्तिहान न ले सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Jan 2017 12:37 AM IST
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भिवानी में जाट आरक्षण आंदोलन के दूसरे दिन धरनारत लोगों के तेवर तीखे नजर आए। कुछ वक्ताओं ने आंदोलन को और धार देने का सुझाव रखा। भूख हड़ताल शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। पिछले और इस आंदोलन में एक फर्क दिखा कि इस दफा धरने से युवा तबका करीब-करीब नदारद है। धरने में 45 से लेकर 80 वर्ष की उम्र के लोग शामिल हुए।
दूसरे दिन सोमवार को धरनारत लोगों में कुछ ज्यादा जोश से लबरेज दिखे। वक्ता दिनभर नारेबाजी से लोगों में जोश भरते रहे। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला प्रधान होशियार सिंह ने कहा कि मांग नहीं माने जाने तक किसी सूरत में धरना खत्म नहीं होगा। जबरदस्ती की तो वे चुप नहीं बैठेंगे और जवाब देंगे।
धनाना की तिहाड़ पाना धर्मशाला में धरना देकर मांगों को लेकर नारे लगाए। धरना सूबेदार राजमल की अध्यक्षता में दिया गया। वक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। साथ ही चेतावनी दी कि धमकियों से न नौजवान डरेगा, न बुजुर्ग और न ही टैंटवाले, जिन्हें सामान दिए जाने पर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार जाटों के सब्र का इम्तिहान न ले। अविलंब पकड़े गए युवाओं को रिहा किया जाए, घायलों को मुआवजा व मृतकों के परिजनों को नौकरी दी जाए। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, तब तक धरना किसी सूरत में बंद नहीं होगा।
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धरने में कुछ वक्ताओं ने आंदोलन को और धार देने व भूख हड़ताल शुरू करने का प्रस्ताव रखा। तो कुछ ने चेतावनी दी कि शांतिप्रिय आंदोलन से छेड़छाड़ की तो परिणाम भयानक होंगे और इनके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। सांगवान खाप से कटार सिंह, दीवान सिंह जाखड़ ने कहा कि सरकार की मंशा साफ नहीं है। रिटायर्ड हेडमास्टर अजीत सिंह, पूर्व सरपंच घुसकानी सतपाल सिंह ने भी अपने वक्तव्य में सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। धरने में खास बात यह चल रही है कि सरकार के धरने में शामिल युवाओं को अयोग्य करार दिए जाने के निर्देशों के बाद युवाओं को धरने से दूर रखा जा रहा है। केवल बुजुर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी व किसान-बेरोजगार लोग धरने में शामिल हो रहे है। समिति नेता ही युवाओं को धरने में आने से रोक रहे है।
जाट नेता हवा सिंह सांगवान के खिलाफ वक्ताओं ने कड़ी टिप्पणी की। वक्ताओं ने उन पर सरकार के साथ मिलकर लोगों को बरगलाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि जो कौम का नहीं वह काम का नहीं।
बाजारों में पैदल मार्च, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर बढ़ाई सुरक्षा
अप्रिय घटना की आशंका के चलते जाट आरक्षण आंदोलन के दूसरे दिन पुलिस भी ज्यादा अलर्ट दिखी। पुलिस की टोलियां बाजारों में पैदल गश्त करते देखी गई तो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड की सुरक्षा भी ज्यादा पुख्ता की गई। सदर थाना प्रभारी नरेंद्रपाल भी लगातार धनाना धरने के आसपास ही गश्त करते देखे गए। सभी नाकों पर भी पुलिस अलर्ट रही और वाहनों की जांच की। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। साथ ही कोर्ट कॉम्पलेक्स का निरीक्षण कर न्यायाधीशों की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया।
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दूसरे दिन सोमवार को धरनारत लोगों में कुछ ज्यादा जोश से लबरेज दिखे। वक्ता दिनभर नारेबाजी से लोगों में जोश भरते रहे। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला प्रधान होशियार सिंह ने कहा कि मांग नहीं माने जाने तक किसी सूरत में धरना खत्म नहीं होगा। जबरदस्ती की तो वे चुप नहीं बैठेंगे और जवाब देंगे।
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धनाना की तिहाड़ पाना धर्मशाला में धरना देकर मांगों को लेकर नारे लगाए। धरना सूबेदार राजमल की अध्यक्षता में दिया गया। वक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। साथ ही चेतावनी दी कि धमकियों से न नौजवान डरेगा, न बुजुर्ग और न ही टैंटवाले, जिन्हें सामान दिए जाने पर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार जाटों के सब्र का इम्तिहान न ले। अविलंब पकड़े गए युवाओं को रिहा किया जाए, घायलों को मुआवजा व मृतकों के परिजनों को नौकरी दी जाए। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, तब तक धरना किसी सूरत में बंद नहीं होगा।
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धरने में कुछ वक्ताओं ने आंदोलन को और धार देने व भूख हड़ताल शुरू करने का प्रस्ताव रखा। तो कुछ ने चेतावनी दी कि शांतिप्रिय आंदोलन से छेड़छाड़ की तो परिणाम भयानक होंगे और इनके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। सांगवान खाप से कटार सिंह, दीवान सिंह जाखड़ ने कहा कि सरकार की मंशा साफ नहीं है। रिटायर्ड हेडमास्टर अजीत सिंह, पूर्व सरपंच घुसकानी सतपाल सिंह ने भी अपने वक्तव्य में सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। धरने में खास बात यह चल रही है कि सरकार के धरने में शामिल युवाओं को अयोग्य करार दिए जाने के निर्देशों के बाद युवाओं को धरने से दूर रखा जा रहा है। केवल बुजुर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी व किसान-बेरोजगार लोग धरने में शामिल हो रहे है। समिति नेता ही युवाओं को धरने में आने से रोक रहे है।
जाट नेता हवा सिंह सांगवान के खिलाफ वक्ताओं ने कड़ी टिप्पणी की। वक्ताओं ने उन पर सरकार के साथ मिलकर लोगों को बरगलाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि जो कौम का नहीं वह काम का नहीं।
बाजारों में पैदल मार्च, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर बढ़ाई सुरक्षा
अप्रिय घटना की आशंका के चलते जाट आरक्षण आंदोलन के दूसरे दिन पुलिस भी ज्यादा अलर्ट दिखी। पुलिस की टोलियां बाजारों में पैदल गश्त करते देखी गई तो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड की सुरक्षा भी ज्यादा पुख्ता की गई। सदर थाना प्रभारी नरेंद्रपाल भी लगातार धनाना धरने के आसपास ही गश्त करते देखे गए। सभी नाकों पर भी पुलिस अलर्ट रही और वाहनों की जांच की। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। साथ ही कोर्ट कॉम्पलेक्स का निरीक्षण कर न्यायाधीशों की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया।