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दंगा पीड़ितों ने जांच कमेटी को सुनाया दुखड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:29 AM IST
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कमेटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जाट आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़, आगजनी की जांच के लिए पहुंची प्रकाश सिंह जांच कमेटी के समक्ष लोगों ने अपना दुखड़ा सुनाया। बंद कमरे में अलग-अलग बुलाकर हुई जांच में लोगों ने एक-दूसरे पर खुलकर आरोप लगाए। पुलिस की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए कि अगर प्रबुद्ध लोग प्रयास नहीं करते तो रोहतक-झज्जर जैसा हाल भिवानी का होता। करीब पांच घंटे चली सुनवाई में करीब 65 लोगों ने अपनी बात रखी।
मंगलवार सुबह नौ बजे रेस्ट हाउस में सरकार की ओर से दंगों की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह जांच कमेटी ने लोगों की बात सुनना शुरू किया। जांच कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने के लिए करीब 65 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया। जांच कमेटी अध्यक्ष प्रकाश सिंह ने बंद कमरे में एक-एक व्यक्ति से मुलाकात कर दंगों की जानकारी ली। काफी लोग ग्रुप में मिलने पहुंचे। बाहर भले ही किसी का नाम नहीं लिया मगर अंदर जांच कमेटी के समक्ष बकायदा नाम लेते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगाए। एक-दूसरे पर दंगों के दौरान तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे लहराने, तोड़फोड़ व आगजनी के आरोप लगाए। पुलिस प्रशासन की सुस्ती मुख्य निशाने पर रही। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पुलिस प्रशासन तोड़फोड़, आगजनी की घटना रोकने में बिल्कुल नाकाम रही। कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम लेकर कार्रवाई
क्या बोले लोग
हवा सिंह, यशपाल मलिक ने जातीय दंगे भड़काए हैं। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। गड्ढे खोदकर रास्ते बंद कर दिए गए। ट्रैकों पर बैठ गए। यह दूसरे के अधिकारों का हनन है। हालात ऐसे थे कि मिलिट्री को भी हवाई जहाज से आना पड़ा। सरकार अब छोटे-छोटे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई कर रही है। जिम्मेवार तो संबंधित जिलों के एसपी हैं। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मैने स्वयं भिवानी पुलिस अधीक्षक को 18 व 19 फरवरी को अनेक फोन किए, मगर न तो फोन उठाया गया और न ही कोई जवाब मिला। अब भी 18 मार्च को लेकर दहशत फैलाई जा रही है।
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कुसुम शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, हजकां महिला विंग
राजेंद्र सिंह तंवर ने अन्य के साथ उसके मकान पर पत्थर बरसाये। जातिगत अपशब्द कहे। नाम के साथ मुकदमा दर्ज है। मगर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। लोगों का भाईचारा सांसद राजकुमार सैनी ने तीन-चार महीने पहले भिवानी दौरे के दौरान तोड़ा और लोगों में जातिगत जहर घोला। आज प्रदेश की छह प्रतिशत जनता 11 प्रतिशत आरक्षण का लाभ ले रही है। 35 प्रतिशत जातियां महज 16 प्रतिशत आरक्षण लाभ ले रही है। ये नाइंसाफी है। कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जाट बिरादरी को भी बीसी बी में शामिल कर इसे 11 की बजाए 14 प्रतिशत किया जाए।
ओमप्रकाश मान, भाजपा नेता
आरक्षण आंदोलन के दौरान जो हिंसक घटनाएं हुई वह गलत हुई। हम पहले की तरह 36 बिरादरी के भाईचारे को कायम रखना चाहते है। उन पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे गलत हैं।
भवानी प्रताप, निवर्तमान चेयरमैन, नगर परिषद
सियासत की राजनीति में सोची-समझी साजिश के तहत पिछली सरकार ने अवसरवाद के तहत एक जाति को आरक्षण दिया। जिसे कोर्ट ने नकार दिया। अब सरकार के एक जाति विशेष के नेताओं ने लोगों को बहकाना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र शब्द कहे गए। मार्ग जाम किए गए। यह सब निंदनीय है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए और असल आरोपियों पर कार्रवाई हो।
कामरेड ओमप्रकाश
हमने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। जाट समुदाय हमेशा 36 बिरादरी के साथ मिलकर चलता है। तोड़फोड़ की घटना निंदनीय रही।
सत्यजीत पिलानिया, अधिवक्ता
सभी लोगों की बात सुनी है। व्यापारी, दुकानदार, समाजसेवी, सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों से मिले हैं। सभी के बयान दर्ज किए हैं। अभी तो आरोप लगाए जा रहे हैं। अब कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। रोहतक, झज्जर के बाद भिवानी की रिपोर्ट ली है और अब हिसार की रिपोर्ट ली जाएगी। 45 दिन में रिपोर्ट सरकार को देनी है।
प्रकाश सिंह, अध्यक्ष, जांच कमेटी
इन्होंने ने भी रखी अपनी दलीलें
व्यापारी नेता पवन बुवानीवाला, विजय बंसल टैणी, अमन राघव, अशोक राघव, राजेंद्र तंवर, रमेश टांक, महेंद्र पगड़ीवाला, परमजीत मड्डू, संजय दुआ, नवीन धमीजा, सुरेश सैनी, मामनचंद, एडवोकेट मंजू, ठाकुर विक्रम सिंह, लाल सिंह तंवर, मीना परमार, प्रेम धमीजा, गिरधारी लाल, धीरज सैनी एडवोकेट, शेर सिंह आर्य, रामचंद्र जांगड़ा, एडवोकेट कृष्ण भाटिया, जयमल, मुकेश परमार, धर्मबीर, शिव कुमार, हवा सिंह सांगवान, एडवोकेट सत्यजीत पिलानिया, रणबीर सिंह, राजनारायण पंघाल, धर्मबीर नेहरा, रण सिंह आदि ने अपने बात रखी।
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मंगलवार सुबह नौ बजे रेस्ट हाउस में सरकार की ओर से दंगों की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह जांच कमेटी ने लोगों की बात सुनना शुरू किया। जांच कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने के लिए करीब 65 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया। जांच कमेटी अध्यक्ष प्रकाश सिंह ने बंद कमरे में एक-एक व्यक्ति से मुलाकात कर दंगों की जानकारी ली। काफी लोग ग्रुप में मिलने पहुंचे। बाहर भले ही किसी का नाम नहीं लिया मगर अंदर जांच कमेटी के समक्ष बकायदा नाम लेते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगाए। एक-दूसरे पर दंगों के दौरान तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे लहराने, तोड़फोड़ व आगजनी के आरोप लगाए। पुलिस प्रशासन की सुस्ती मुख्य निशाने पर रही। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पुलिस प्रशासन तोड़फोड़, आगजनी की घटना रोकने में बिल्कुल नाकाम रही। कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम लेकर कार्रवाई
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क्या बोले लोग
हवा सिंह, यशपाल मलिक ने जातीय दंगे भड़काए हैं। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। गड्ढे खोदकर रास्ते बंद कर दिए गए। ट्रैकों पर बैठ गए। यह दूसरे के अधिकारों का हनन है। हालात ऐसे थे कि मिलिट्री को भी हवाई जहाज से आना पड़ा। सरकार अब छोटे-छोटे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई कर रही है। जिम्मेवार तो संबंधित जिलों के एसपी हैं। उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मैने स्वयं भिवानी पुलिस अधीक्षक को 18 व 19 फरवरी को अनेक फोन किए, मगर न तो फोन उठाया गया और न ही कोई जवाब मिला। अब भी 18 मार्च को लेकर दहशत फैलाई जा रही है।
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कुसुम शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, हजकां महिला विंग
राजेंद्र सिंह तंवर ने अन्य के साथ उसके मकान पर पत्थर बरसाये। जातिगत अपशब्द कहे। नाम के साथ मुकदमा दर्ज है। मगर अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। लोगों का भाईचारा सांसद राजकुमार सैनी ने तीन-चार महीने पहले भिवानी दौरे के दौरान तोड़ा और लोगों में जातिगत जहर घोला। आज प्रदेश की छह प्रतिशत जनता 11 प्रतिशत आरक्षण का लाभ ले रही है। 35 प्रतिशत जातियां महज 16 प्रतिशत आरक्षण लाभ ले रही है। ये नाइंसाफी है। कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जाट बिरादरी को भी बीसी बी में शामिल कर इसे 11 की बजाए 14 प्रतिशत किया जाए।
ओमप्रकाश मान, भाजपा नेता
आरक्षण आंदोलन के दौरान जो हिंसक घटनाएं हुई वह गलत हुई। हम पहले की तरह 36 बिरादरी के भाईचारे को कायम रखना चाहते है। उन पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे गलत हैं।
भवानी प्रताप, निवर्तमान चेयरमैन, नगर परिषद
सियासत की राजनीति में सोची-समझी साजिश के तहत पिछली सरकार ने अवसरवाद के तहत एक जाति को आरक्षण दिया। जिसे कोर्ट ने नकार दिया। अब सरकार के एक जाति विशेष के नेताओं ने लोगों को बहकाना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र शब्द कहे गए। मार्ग जाम किए गए। यह सब निंदनीय है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए और असल आरोपियों पर कार्रवाई हो।
कामरेड ओमप्रकाश
हमने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। जाट समुदाय हमेशा 36 बिरादरी के साथ मिलकर चलता है। तोड़फोड़ की घटना निंदनीय रही।
सत्यजीत पिलानिया, अधिवक्ता
सभी लोगों की बात सुनी है। व्यापारी, दुकानदार, समाजसेवी, सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों से मिले हैं। सभी के बयान दर्ज किए हैं। अभी तो आरोप लगाए जा रहे हैं। अब कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। रोहतक, झज्जर के बाद भिवानी की रिपोर्ट ली है और अब हिसार की रिपोर्ट ली जाएगी। 45 दिन में रिपोर्ट सरकार को देनी है।
प्रकाश सिंह, अध्यक्ष, जांच कमेटी
इन्होंने ने भी रखी अपनी दलीलें
व्यापारी नेता पवन बुवानीवाला, विजय बंसल टैणी, अमन राघव, अशोक राघव, राजेंद्र तंवर, रमेश टांक, महेंद्र पगड़ीवाला, परमजीत मड्डू, संजय दुआ, नवीन धमीजा, सुरेश सैनी, मामनचंद, एडवोकेट मंजू, ठाकुर विक्रम सिंह, लाल सिंह तंवर, मीना परमार, प्रेम धमीजा, गिरधारी लाल, धीरज सैनी एडवोकेट, शेर सिंह आर्य, रामचंद्र जांगड़ा, एडवोकेट कृष्ण भाटिया, जयमल, मुकेश परमार, धर्मबीर, शिव कुमार, हवा सिंह सांगवान, एडवोकेट सत्यजीत पिलानिया, रणबीर सिंह, राजनारायण पंघाल, धर्मबीर नेहरा, रण सिंह आदि ने अपने बात रखी।