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धनाना में जाटों का धरना स्थगित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2016 01:06 AM IST
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ध्ारना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राज्य सरकार के आश्वासन के बाद भिवानी जिले के गांव धनाना में रविवार को धरना स्थगित कर दिया गया है। जाट संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेन्द्र सिंह पूनिया ने धरना स्थल पर पहुंच कर धरना स्थगित करने की घोषण की ओर सरकार द्वारा मांग तय समय पर पूरी ना करने पर 13 सितंबर को फिर से आंदोलन शुरू करने की बात कही।
रविवार को महापंचायत की अध्यक्षता जाटू खाप 84 प्रधान सूबेदार राजमल ने की। धरनास्थल पर पहुंचे जाट संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया ने बताया कि सरकार को हाईकोर्ट में लगी अंतरिम रोक हटाने के लिए 31 अगस्त और अन्य मांगों को लेकर 15-20 दिनों का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मांग पूरी करने का ठोस आश्वासन दिया है। प्रदेश महासचिव ने बताया कि तय समय पर सरकार ने मांग पूरी नहीं की तो 13 सितंबर जाट शहीदी दिवस पर बहुत बड़ी पंचायत करके आंदोलन की घोषणा की जाएगी। एडवोकेट ब्रम्हानंद ने जाटू खाप 84 प्रधान सूबेदार राजमल को डा. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति देकर सम्मानित किया।
महिला व बीडीसी मैंबर सरकार पर बरसीं
धरने पर पहुंची महिलाओं ने भी सरकार पर जाट समुदाय को नाजायज तंग करने और उनके हकों से वंचित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने आरक्षण नहीं दिया तो वे सरकार की ईंट से ईंट बजा देगी ओर आरक्षण लेकर रहेगी। ब्लॉक समिति सदस्य रीना ने कहा कि सरकार ने चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों पर नाजायज दबाव बनाया है, लेकिन सरकार उन्हें कल की बजाय भले आज पद मुक्त कर दे लेकिन उसे पद से पहले अपने समाज का साथ देना होगा।
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ये रहे मौजूद
गांव धनाना में आयोजित जाट समुदाय की महापंचायत में जाट समाज के अलावा एडवोकेट मनमोहन भुरटाना, आजाद बाल्मीकि, इनेलो जिला प्रवक्ता राजू मेहरा, एडवोकेट ब्रम्हानंद, कुलंवत कौंटिया, रामेश्वर चांग आदि सहित रामभगत मलिक, सतबीर पूनिया, बलबीर पूनिया, ईश्वर मान, बलवान, मा. अजीत, धारुराम, राजबीर तालू, सुभाष चांग, ओम सिवाड़ा आदि मौजूद रहे।
सरकार की वार्ता से संतुष्ट
प्रदेश सरकार ने जाट आरक्षण के आंदोलनकारियाें से दिल्ली में वार्ता कर उनकी शर्तों पर जो सहमति प्रकट की है उस पर सभी आंदोलनकारी संतुष्ट हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के हलकाध्यक्ष प्रदीप बाढड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक की अध्यक्षता में आगामी समय सीमा तक अपना धरना खत्म कर प्रदेश में अमन चैन कायम रखने के लिए सौहार्दपूर्ण बैठकों का आयोजन करेंगे। इस मौके पर धर्मपाल बाढड़ा, रपाल सिंह, कमल सिंह मांढी, मीरसिंह जेवली, सज्जन सिंह डांडमाआदि मौजूद थे।
15वें दिन करवाया धरना स्थगित
चरखी दादरी के महेंद्रगढ़ बाईपास पर दए जा रहे धरने को समिति की जिला इकाई ने स्थगित कर दिया है। रविवार को समिति के राष्ट्रीय महासचिव, प्रदेश महासचिव व प्रदेश प्रवक्ता ने धरनाल स्थल पर पहुंचकर आंदोलन स्थगित करवा दिया।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने रविवार को 15वें दिन अपना धरना स्थगित कर दिया। इस दौरान जाट आरक्षण समिति प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया, प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक, समिति राष्ट्रीय महासचिव सतबीर पूनिया ने धरना स्थल पर पहुंचकर धरना स्थगित किए जाने की घोषणा की। सांय पांच बजे धरना स्थगित कर दिया गया। धरने का नेतृत्व कर रहे संघर्ष समिति जिला अध्यक्ष राजकुमार हड़ोदी ने कहा कि समिति ने धरना समाप्त नहीं बल्कि स्थगित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार से उनकी मांगें वहीं रहेंगी।
फूट डालने का सरकार और प्रशासन ने रचा षड्यंत्र ः महेंद्र सिंह
भले ही शनिवार को मलिक गुट व शासन के बीच हुई वार्ता सिरे चढ़ने से अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने धरना स्थगित कर दिया हो। मगर अब भी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के मन में खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर रोष व्याप्त है। शनिवार को चरखी दादरी उपमंडल में धरना स्थगित करवाने पहुंचे संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया ने आंदोलन खत्म करवाने के लिए सरकार के पैंतरों को गैर जिम्मेदाराना व फूट डालने वाला बताया। पत्रकारों से रूबरू होते हुए पूनिया ने प्रदेश के मुखिया सहित प्रशासनिक अमले को भी आड़े हाथों लिया। इस दौरान खापों व संघर्ष समिति के बीच दिखाई दिए मतभेदों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने मन की टीस बयान कर दी। पूनिया ने इस दौरान सरकार व प्रशासन के साथ-साथ खाप प्रतिनिधियों का नाम लिए बिना ही उन पर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि खापों व संघर्ष समिति को बातचीत के लिए अलग-अलग बुलाना सरकार व प्रशासन का रचा गया षड्यंत्र था। महेंद्र सिंह पूनिया ने कहा कि जाट सभा पहले एक होती थी मगर आज 36 हैं। ये ही हाल संघर्ष समिति का है पहले संघर्ष समिति भी एक थी मगर आज के दिन छह-सात है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में तो सीएम से ऐसे लोगों मुखातिब होते देखा है जिन्होंने न तो कभी आंदोलन में भाग लिया और न ही धरना प्रदर्शन में कौम के लिए अपना कोई योगदान दिया। इस दौरान परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार के सामने रखे गए 11 सूत्री मांगपत्र की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि संघर्ष समिति प्रमुख यशपाल मलिक सहित करीब सवा सौ लोगों पर दर्ज किए देशद्रोह के मामलों को भी सरकार करीब दो सप्ताह के अंदर वापिस ले लेगी।
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रविवार को महापंचायत की अध्यक्षता जाटू खाप 84 प्रधान सूबेदार राजमल ने की। धरनास्थल पर पहुंचे जाट संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया ने बताया कि सरकार को हाईकोर्ट में लगी अंतरिम रोक हटाने के लिए 31 अगस्त और अन्य मांगों को लेकर 15-20 दिनों का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मांग पूरी करने का ठोस आश्वासन दिया है। प्रदेश महासचिव ने बताया कि तय समय पर सरकार ने मांग पूरी नहीं की तो 13 सितंबर जाट शहीदी दिवस पर बहुत बड़ी पंचायत करके आंदोलन की घोषणा की जाएगी। एडवोकेट ब्रम्हानंद ने जाटू खाप 84 प्रधान सूबेदार राजमल को डा. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति देकर सम्मानित किया।
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महिला व बीडीसी मैंबर सरकार पर बरसीं
धरने पर पहुंची महिलाओं ने भी सरकार पर जाट समुदाय को नाजायज तंग करने और उनके हकों से वंचित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने आरक्षण नहीं दिया तो वे सरकार की ईंट से ईंट बजा देगी ओर आरक्षण लेकर रहेगी। ब्लॉक समिति सदस्य रीना ने कहा कि सरकार ने चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों पर नाजायज दबाव बनाया है, लेकिन सरकार उन्हें कल की बजाय भले आज पद मुक्त कर दे लेकिन उसे पद से पहले अपने समाज का साथ देना होगा।
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ये रहे मौजूद
गांव धनाना में आयोजित जाट समुदाय की महापंचायत में जाट समाज के अलावा एडवोकेट मनमोहन भुरटाना, आजाद बाल्मीकि, इनेलो जिला प्रवक्ता राजू मेहरा, एडवोकेट ब्रम्हानंद, कुलंवत कौंटिया, रामेश्वर चांग आदि सहित रामभगत मलिक, सतबीर पूनिया, बलबीर पूनिया, ईश्वर मान, बलवान, मा. अजीत, धारुराम, राजबीर तालू, सुभाष चांग, ओम सिवाड़ा आदि मौजूद रहे।
सरकार की वार्ता से संतुष्ट
प्रदेश सरकार ने जाट आरक्षण के आंदोलनकारियाें से दिल्ली में वार्ता कर उनकी शर्तों पर जो सहमति प्रकट की है उस पर सभी आंदोलनकारी संतुष्ट हैं। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के हलकाध्यक्ष प्रदीप बाढड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक की अध्यक्षता में आगामी समय सीमा तक अपना धरना खत्म कर प्रदेश में अमन चैन कायम रखने के लिए सौहार्दपूर्ण बैठकों का आयोजन करेंगे। इस मौके पर धर्मपाल बाढड़ा, रपाल सिंह, कमल सिंह मांढी, मीरसिंह जेवली, सज्जन सिंह डांडमाआदि मौजूद थे।
15वें दिन करवाया धरना स्थगित
चरखी दादरी के महेंद्रगढ़ बाईपास पर दए जा रहे धरने को समिति की जिला इकाई ने स्थगित कर दिया है। रविवार को समिति के राष्ट्रीय महासचिव, प्रदेश महासचिव व प्रदेश प्रवक्ता ने धरनाल स्थल पर पहुंचकर आंदोलन स्थगित करवा दिया।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने रविवार को 15वें दिन अपना धरना स्थगित कर दिया। इस दौरान जाट आरक्षण समिति प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया, प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक, समिति राष्ट्रीय महासचिव सतबीर पूनिया ने धरना स्थल पर पहुंचकर धरना स्थगित किए जाने की घोषणा की। सांय पांच बजे धरना स्थगित कर दिया गया। धरने का नेतृत्व कर रहे संघर्ष समिति जिला अध्यक्ष राजकुमार हड़ोदी ने कहा कि समिति ने धरना समाप्त नहीं बल्कि स्थगित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार से उनकी मांगें वहीं रहेंगी।
फूट डालने का सरकार और प्रशासन ने रचा षड्यंत्र ः महेंद्र सिंह
भले ही शनिवार को मलिक गुट व शासन के बीच हुई वार्ता सिरे चढ़ने से अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने धरना स्थगित कर दिया हो। मगर अब भी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के मन में खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर रोष व्याप्त है। शनिवार को चरखी दादरी उपमंडल में धरना स्थगित करवाने पहुंचे संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया ने आंदोलन खत्म करवाने के लिए सरकार के पैंतरों को गैर जिम्मेदाराना व फूट डालने वाला बताया। पत्रकारों से रूबरू होते हुए पूनिया ने प्रदेश के मुखिया सहित प्रशासनिक अमले को भी आड़े हाथों लिया। इस दौरान खापों व संघर्ष समिति के बीच दिखाई दिए मतभेदों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने मन की टीस बयान कर दी। पूनिया ने इस दौरान सरकार व प्रशासन के साथ-साथ खाप प्रतिनिधियों का नाम लिए बिना ही उन पर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि खापों व संघर्ष समिति को बातचीत के लिए अलग-अलग बुलाना सरकार व प्रशासन का रचा गया षड्यंत्र था। महेंद्र सिंह पूनिया ने कहा कि जाट सभा पहले एक होती थी मगर आज 36 हैं। ये ही हाल संघर्ष समिति का है पहले संघर्ष समिति भी एक थी मगर आज के दिन छह-सात है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में तो सीएम से ऐसे लोगों मुखातिब होते देखा है जिन्होंने न तो कभी आंदोलन में भाग लिया और न ही धरना प्रदर्शन में कौम के लिए अपना कोई योगदान दिया। इस दौरान परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार के सामने रखे गए 11 सूत्री मांगपत्र की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि संघर्ष समिति प्रमुख यशपाल मलिक सहित करीब सवा सौ लोगों पर दर्ज किए देशद्रोह के मामलों को भी सरकार करीब दो सप्ताह के अंदर वापिस ले लेगी।