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चार-चार महीनों से चक्कर काट रहे हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2016 01:25 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भिवानी में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को चार-चार महीने चक्कर लगाने पड़ते हैं। किसी की फाइल नगर परिषद में अटकी है तो किसी की सीएमओ व डीसी ऑफिस में। चार माह बाद भी प्रमाण-पत्र बन जाए तो भी गनीमत है।
वैसे तो 15 दिन में जन्म प्रमाण पत्र देने का प्रावधान है और अर्जेंट केसों में तुरंत। मगर यहां तो कार्य ही बिल्कुल अलग है। अर्जेंट की फीस जमा कराने के बाद भी लोग महीने भर से चक्कर लगा रहे है। अपने बेटे का प्रमाण पत्र लेने पहुंची महिला मीना ने बताया कि जुलाई में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अर्जेंट था तो अतिरिक्त फीस 220 रुपये जमा कर अर्जेंट में आवेदन किया। मगर अभी तक भी नहीं मिला है। पुराना बस स्टैंड वासी जयपाल ने बताया कि 2013 में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। कभी कोई समस्या बताई तो कभी कोई। अब सारी शर्तें पूरी कर दी है और उम्मीद है कि जल्द बन जाए। फिलहाल हालत ये है कि चार-चार महीने के जन्म प्रमाण पत्र की फाइलें अटक है। मई में आवेदन करने वालों के भी अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बने है। सैकड़ों की संख्या में फाइलें नप कार्यालय शाखा, सिविल सर्जन कार्यालय और उपायुक्त कार्यालय में अटकी है।
दो कंप्यूटर ऑपरेटर के आसरे पूरी ब्रांच
नगर परिषद कार्यालय में बनाए गए जन्म-मृत्यु शाखा में महज दो कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं और यहां हर रोज औसतन डेढ़ सौ के करीब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनने के लिए आते हैं। एक ऑपरेटर ऑनलाइन केसों को संभालता है तो एक फार्म आने वाले केसों को। काफी संख्या में लेट रजिस्ट्रेशन के भी फार्म होते है। जिनमें तीन-तीन साल का रिकार्ड खंगालना पड़ता है। इन्हीं दो कर्मचारियों में से एक को अक्सर कोर्ट कार्यों से भी जाना पड़ता है। समस्या सिर्फ नगर परिषद कार्यालय में बनी जन्म-मृत्यु शाखा में ही खत्म नहीं हो जाती। यहां से रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय भेजी जाती है और वहां से उपायुक्त कार्यालय। उपायुक्त कार्यालय की जांच रिपोर्ट के बाद फाइल दोबारा सिविल सर्जन कार्यालय आती है और फिर नगर परिषद कार्यालय। विभागों में ही फाइल के चक्कर कटने में दो-तीन महीने निकल जाते है।
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बार-बार भेजे रिमाइंडर, नहीं लगे कर्मचारी
पहले यहां पांच कर्मचारी होते थे। किसी की ट्रांसफर हो गई तो कोई रिटायर हो गया। अब यहां कम से कम चार कर्मचारियों की आवश्यकता है और कार्यरत है महज दो । एक को अक्सर कोर्ट कार्यों से भीजाना पड़ता है। कर्मचारियों की नियुक्ति बारे में डीसी, चीफ रजिस्ट्रार को पत्र लिखा। छह-सात बार रिमाइंडर भी भेजे गए मगर अभी तक कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई।
शर्तों में भी फंसे है लोग
जन्म रजिस्ट्रेशन की नई शर्तें भी लोगों के लिए परेशानी बनी है। शर्तें ऐसी-ऐसी है कि दो-तीन दिन चक्कर काटने के बाद तो फाइल तैयार होती है और फिर रजिस्ट्रेशन के लिए चक्कर।
ये है एक साल के बाद जन्म प्रमाण पत्र के लिए शर्तें
* जन्म के समय मौजूद दो लोगों की गवाही, सरपंच या पार्षद की पुष्टि
* जन्म के समय बच्चे के माता-पिता का रिहायशी प्रमाण पत्र
* रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु के निर्धारित प्रारूप की विस्तृत जांच रिपोर्ट
* डाक्टर, नर्स, दाई का शपथ पत्र
* चौकीदार का शपथ पत्र (ग्रामीण क्षेत्र के लिए)
* जन्म तिथि साक्ष्य के लिए जच्चा-बच्चा टीकाकरण कार्ड या स्कूल शिक्षा प्रमाण पत्र
* जन्म सूचना फार्म संबंधित क्षेत्र की एएनएम से सत्यापित होना चाहिए
* बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता की जांच रिपोर्ट
वैसे तो 15 दिन में जन्म प्रमाण पत्र देने का प्रावधान है और अर्जेंट केसों में तुरंत। मगर यहां तो कार्य ही बिल्कुल अलग है। अर्जेंट की फीस जमा कराने के बाद भी लोग महीने भर से चक्कर लगा रहे है। अपने बेटे का प्रमाण पत्र लेने पहुंची महिला मीना ने बताया कि जुलाई में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अर्जेंट था तो अतिरिक्त फीस 220 रुपये जमा कर अर्जेंट में आवेदन किया। मगर अभी तक भी नहीं मिला है। पुराना बस स्टैंड वासी जयपाल ने बताया कि 2013 में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। कभी कोई समस्या बताई तो कभी कोई। अब सारी शर्तें पूरी कर दी है और उम्मीद है कि जल्द बन जाए। फिलहाल हालत ये है कि चार-चार महीने के जन्म प्रमाण पत्र की फाइलें अटक है। मई में आवेदन करने वालों के भी अभी तक प्रमाण पत्र नहीं बने है। सैकड़ों की संख्या में फाइलें नप कार्यालय शाखा, सिविल सर्जन कार्यालय और उपायुक्त कार्यालय में अटकी है।
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दो कंप्यूटर ऑपरेटर के आसरे पूरी ब्रांच
नगर परिषद कार्यालय में बनाए गए जन्म-मृत्यु शाखा में महज दो कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं और यहां हर रोज औसतन डेढ़ सौ के करीब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनने के लिए आते हैं। एक ऑपरेटर ऑनलाइन केसों को संभालता है तो एक फार्म आने वाले केसों को। काफी संख्या में लेट रजिस्ट्रेशन के भी फार्म होते है। जिनमें तीन-तीन साल का रिकार्ड खंगालना पड़ता है। इन्हीं दो कर्मचारियों में से एक को अक्सर कोर्ट कार्यों से भी जाना पड़ता है। समस्या सिर्फ नगर परिषद कार्यालय में बनी जन्म-मृत्यु शाखा में ही खत्म नहीं हो जाती। यहां से रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय भेजी जाती है और वहां से उपायुक्त कार्यालय। उपायुक्त कार्यालय की जांच रिपोर्ट के बाद फाइल दोबारा सिविल सर्जन कार्यालय आती है और फिर नगर परिषद कार्यालय। विभागों में ही फाइल के चक्कर कटने में दो-तीन महीने निकल जाते है।
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बार-बार भेजे रिमाइंडर, नहीं लगे कर्मचारी
पहले यहां पांच कर्मचारी होते थे। किसी की ट्रांसफर हो गई तो कोई रिटायर हो गया। अब यहां कम से कम चार कर्मचारियों की आवश्यकता है और कार्यरत है महज दो । एक को अक्सर कोर्ट कार्यों से भीजाना पड़ता है। कर्मचारियों की नियुक्ति बारे में डीसी, चीफ रजिस्ट्रार को पत्र लिखा। छह-सात बार रिमाइंडर भी भेजे गए मगर अभी तक कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई।
शर्तों में भी फंसे है लोग
जन्म रजिस्ट्रेशन की नई शर्तें भी लोगों के लिए परेशानी बनी है। शर्तें ऐसी-ऐसी है कि दो-तीन दिन चक्कर काटने के बाद तो फाइल तैयार होती है और फिर रजिस्ट्रेशन के लिए चक्कर।
ये है एक साल के बाद जन्म प्रमाण पत्र के लिए शर्तें
* जन्म के समय मौजूद दो लोगों की गवाही, सरपंच या पार्षद की पुष्टि
* जन्म के समय बच्चे के माता-पिता का रिहायशी प्रमाण पत्र
* रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु के निर्धारित प्रारूप की विस्तृत जांच रिपोर्ट
* डाक्टर, नर्स, दाई का शपथ पत्र
* चौकीदार का शपथ पत्र (ग्रामीण क्षेत्र के लिए)
* जन्म तिथि साक्ष्य के लिए जच्चा-बच्चा टीकाकरण कार्ड या स्कूल शिक्षा प्रमाण पत्र
* जन्म सूचना फार्म संबंधित क्षेत्र की एएनएम से सत्यापित होना चाहिए
* बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता की जांच रिपोर्ट