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भव्य धार्मिक समागम की गवाह बनी छोटी कांशी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:58 AM IST
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राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
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मंदिरों की नगरी छोटी कांशी रविवार को बड़े व भव्य धार्मिक समागम की गवाह बनी। लक्षचंडी महायज्ञ रविवार राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी की आहुति के साथ शुरू हुआ। महायज्ञ के आरंभ के बाद ढाई हजार महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली तो 21 सौ विद्वान पंड़ित भी शोभायात्रा में शामिल हुए। इस दौरान रथ पर सवार होकर महाराज परमहंस महाराज ने शोभायात्रा की अगुवाई की।
श्री हरियाणा शेखावटी ब्रह्मचार्य आश्रम में नौ दिवसीय लक्षचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। बतौर मुख्यातिथि राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने लक्षचंडी महायज्ञ में आहुति डालने के बाद देवी मां की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की भूमि भारतीय संस्कृति की परिचायक है। चारों वेदों की रचना हरियाणा में हुई है। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर लक्षचंडी महायज्ञ, श्रीमद्भागवत गीता और दुर्गा शक्ति के एक साथ एक लाख पाठ का आयोजन होना, जो अपने-आप में अनूठा त्रिवेणी संगम है। तीनों आयोजन में एक साथ शामिल होना हमारे लिए भी सौभाग्य की बात है। यह मन-विचार और कर्म की शुद्धिकरण करने का अवसर है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश ने अपने गठन के 50 साल पूरे किए हैं, जिसके चलते पूरे साल प्रदेश में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से हमारी धरोहर-विरासत को बचाए रखने का संदेश दिया जा रहा है । करीब पांच हजार साल पहले भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की धरती पर अर्जुन को उपदेश दिया था। इसी के चलते कुरुक्षेत्र में छह से 10 दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाएगा। महोत्सव में 18 हजार लोग एक साथ आहुति डालेंगे। देशभर के 574 जिलों से एक-एक व्यक्ति गीता का संदेश लेकर कुरुक्षेत्र में पहुंचेगा। इसमें अन्य देशों के लोग भी शामिल होंगे। राज्यपाल ने पर्यावरण शुद्धिकरण व मानव कल्याण के लिए दो लाख रुपए अनुदान देने की घोषणा की। कार्यक्रम में राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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आयोजक पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन ऋषि प्रकाश शर्मा ने बताया कि सुबह साढ़े सात से 11 बजे तक और दोपहर दो से सायं पांच बजे तक यज्ञ होगा। जिसमें मां भगवती के एक लाख पाठ होंगे। लक्षचंडी महायज्ञ पर्यावरण शुद्धि, चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है।
कार्यक्रम में स्वामी भगवानदेव परमहंस, स्वामी दिनेशानंद, पूर्व मंत्री व विधायक घनश्यामदास सर्राफ, बवानीखेड़ा के विधायक बिशंभर वाल्मीकि, भाजपा जिलाध्यक्ष नंदराम धानिया, प्रदेश सचिव मुकेश गौड़, पूर्व विधायक शशीरंजन परमार, ओमप्रकाश बहलवाला, बृजलाल सर्राफ आदि मौजूद रहे।
झूमती रही महिलाएं, शोभायात्रा में शामिल हुए पांच हजार महिला श्रद्धालु
आरंभ के बाद जोगीवाला मंदिर से स्वामी भगवानदेव परमहंस, स्वामी दिनेशानंद के नेतृत्व में कलाश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में पहली बार करीब ढाई हजार महिलाएं कलश लेकर निकली। यह संभवतया पहला मौका है, जब कलश यात्रा में इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं शामिल हुईं। 21 सौ विद्वानों के साथ रथ पर स्वामी भगवान देव परमहंस व स्वामी दिनेशानंद चले। पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन ऋषि प्रकाश शर्मा व महंत चरणदास रथ के सारथी बने। शोभा यात्रा जोगीवाला मंदिर से शुरू होकर दिनोद गेट, घंटाघर चौक, हांसी गेट चौक, पुराना बस स्टैंड, महम गेट होते हुए लक्षचंडी महायज्ञ आयोजन स्थल पर पहुंची। शोभा यात्रा में महिलाएं भक्ति गीतों पर झूम रही थीं।
श्री हरियाणा शेखावटी ब्रह्मचार्य आश्रम में नौ दिवसीय लक्षचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। बतौर मुख्यातिथि राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने लक्षचंडी महायज्ञ में आहुति डालने के बाद देवी मां की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की भूमि भारतीय संस्कृति की परिचायक है। चारों वेदों की रचना हरियाणा में हुई है। उन्होंने कहा कि एक ही जगह पर लक्षचंडी महायज्ञ, श्रीमद्भागवत गीता और दुर्गा शक्ति के एक साथ एक लाख पाठ का आयोजन होना, जो अपने-आप में अनूठा त्रिवेणी संगम है। तीनों आयोजन में एक साथ शामिल होना हमारे लिए भी सौभाग्य की बात है। यह मन-विचार और कर्म की शुद्धिकरण करने का अवसर है।
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राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश ने अपने गठन के 50 साल पूरे किए हैं, जिसके चलते पूरे साल प्रदेश में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से हमारी धरोहर-विरासत को बचाए रखने का संदेश दिया जा रहा है । करीब पांच हजार साल पहले भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की धरती पर अर्जुन को उपदेश दिया था। इसी के चलते कुरुक्षेत्र में छह से 10 दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जाएगा। महोत्सव में 18 हजार लोग एक साथ आहुति डालेंगे। देशभर के 574 जिलों से एक-एक व्यक्ति गीता का संदेश लेकर कुरुक्षेत्र में पहुंचेगा। इसमें अन्य देशों के लोग भी शामिल होंगे। राज्यपाल ने पर्यावरण शुद्धिकरण व मानव कल्याण के लिए दो लाख रुपए अनुदान देने की घोषणा की। कार्यक्रम में राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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आयोजक पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन ऋषि प्रकाश शर्मा ने बताया कि सुबह साढ़े सात से 11 बजे तक और दोपहर दो से सायं पांच बजे तक यज्ञ होगा। जिसमें मां भगवती के एक लाख पाठ होंगे। लक्षचंडी महायज्ञ पर्यावरण शुद्धि, चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है।
कार्यक्रम में स्वामी भगवानदेव परमहंस, स्वामी दिनेशानंद, पूर्व मंत्री व विधायक घनश्यामदास सर्राफ, बवानीखेड़ा के विधायक बिशंभर वाल्मीकि, भाजपा जिलाध्यक्ष नंदराम धानिया, प्रदेश सचिव मुकेश गौड़, पूर्व विधायक शशीरंजन परमार, ओमप्रकाश बहलवाला, बृजलाल सर्राफ आदि मौजूद रहे।
झूमती रही महिलाएं, शोभायात्रा में शामिल हुए पांच हजार महिला श्रद्धालु
आरंभ के बाद जोगीवाला मंदिर से स्वामी भगवानदेव परमहंस, स्वामी दिनेशानंद के नेतृत्व में कलाश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में पहली बार करीब ढाई हजार महिलाएं कलश लेकर निकली। यह संभवतया पहला मौका है, जब कलश यात्रा में इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं शामिल हुईं। 21 सौ विद्वानों के साथ रथ पर स्वामी भगवान देव परमहंस व स्वामी दिनेशानंद चले। पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन ऋषि प्रकाश शर्मा व महंत चरणदास रथ के सारथी बने। शोभा यात्रा जोगीवाला मंदिर से शुरू होकर दिनोद गेट, घंटाघर चौक, हांसी गेट चौक, पुराना बस स्टैंड, महम गेट होते हुए लक्षचंडी महायज्ञ आयोजन स्थल पर पहुंची। शोभा यात्रा में महिलाएं भक्ति गीतों पर झूम रही थीं।