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Bhiwani : एंबुलेंस को चक्कर लगवा रहीं झूठी कॉल, जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाती सुविधा
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नागरिक अस्पताल परिसर में खड़ीं एंबुलेंस।
- फोटो : Bhiwani
नवनीत शर्मा
भिवानी। हेलो...सर जल्दी आओ, मर्डर हो गया है.....। एंबुलेंस लेकर कर्मचारी पहुंचे तो पाया कि आपसी विवाद था। ऐसी झूठी कॉल डायल 112 पर खूब आ रही हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी परेशान हैं। वहीं वास्तविक लोगों तक मदद नहीं मिल पा रही।
ऐसे मामलों में जहां से कॉल आती है, वहां कोई झगड़े में घायल मिलता है तो कोई शराब पीकर कहासुनी में फंसा मिलता है। झूठे कॉल की वजह से रोजाना स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस 30 से 50 किलोमीटर तक चक्कर काट रही हैं। मौके पर सड़क हादसे में घायल या फिर अन्य कोई मरीज न मिलने पर एंबुलेंस खाली ही लौट रही है तो कई बार झगड़े में घायलों को नागरिक अस्पताल तक लेकर आने के लिए वे सात रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से शुल्क ले रहे हैं। इसके साथ ही कई कॉल तो ऐसे होते हैं, जिनमें बताई गई लोकेशन पर एंबुलेंस पहुंचती है तो वहां पर सब शांत मिलता है।
रोजाना आ पांच से छह झूठी कॉल
जिला मुख्यालय पर नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ही एंबुलेंस कंट्रोल रूम बनाया हुआ है। एंबुलेंस कंट्रोल रूम में रोजाना 100 से 110 कॉल आती हैं। इनमें से कोई सड़क हादसे में घायल तो कोई गर्भवती महिला को नागरिक अस्पताल, सीएचसी या फिर पीएचसी तक लेकर जाने के लिए आती है। वहीं डायल 112 से रोजाना 10 से 15 कॉल आ रही हैं। इसमें से कुछ कॉल तो सड़क हादसे में घायल मिलते हैं। हालांकि पांच से छह कॉल झूठी रहती हैं, जिसकी वजह से एंबुलेंस विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य संबंधित कॉल हो रही एंबुलेंस कंट्रोल बोर्ड में फॉरवर्ड
इमरजेंसी सहायता के लिए इमरजेंसी रिस्पांस एंड सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) डायल 112 है। अगर किसी को पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की तत्काल सहायता की जरूरत है, तो वह सीधे 112 पर कॉल कर सकता है। यह कॉल पंचकूला स्थित स्टेट कंट्रोल रूम में जाती है, जहां से स्वास्थ्य से संबंधित कॉल को एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फारवर्ड कर दिया जाता है। ऐसे में इस दौरान पीड़ित जहां से बोल रहा है, उसकी लोकेशन अनुसार जो भी एंबुलेंस नजदीक होगी, वह तुरंत मौके पर पहुंचेगी। पंचकूला में बनाए गए स्टेट कंट्रोल रूम में हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और हरियाणवी चार भाषाओं में काम करने की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक नागरिक तक सेवाओं की पहुंच हो सके। जहां पर जिस भाषा में पीड़ित बात करना चाहता है, उसी की भाषा में कंट्रोल रूम पर बैठे कर्मचारी बातचीत कर शिकायत नोट करेंगे। इसके बाद तुरंत कॉल पीड़ित की लोकेशन के नजदीक वाली गाड़ी में पहुंच जाएगी। (संवाद)
शराबी ने की झूठी कॉल
स्वास्थ्य विभाग में बवानीखेड़ा नागरिक अस्पताल के कार्यरत एंबुलेंस चालक कुलदीप ने बताया कि करीब एक माह पहले उन्हें पंचकूला मुख्यालय से बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव सिवाना में घायल होने की सूचना मिली थी। उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो उक्त व्यक्ति शराब के नशे में था, जिसके डायल 112 के माध्यम से झूठी कॉल करके एंबुलेंस बुला ली। यह मामला जब चिकित्सा अधिकारी से संज्ञान में आया तो उन्होंने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस को भी जानकारी दी। ऐसे में झूठी कॉल के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
झूठी कॉल से जरूरतमंदों को नहीं मिल पाती समय पर सुविधा
एंबुलेंस की सेवा मरीजों और घायलों की सहायता के लिए है। झूठे कॉल की वजह से जरूरतमंद मरीजों को एंबुलेंस की सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। कॉल आने पर जब एंबुलेंस उस लोकेशन पर पहुंचती है तो उन्हें मरीज या कोई घायल नहीं मिलता। इससे एंबुलेंस को लौटना पड़ता है। इसके कारण विभाग को भी आर्थिक नुकसान होता है और समय भी बर्बाद होता है। नागरिकों से अपील है कि एंबुलेंस आपकी सेवा के लिए लगाई गई है तो ऐसे में कोई भी असामाजिक कार्य न करें, जिससे यह सेवा बाधित हो।
- डॉ. मनीष श्योराण, इंचार्ज, आरटीएस, नागरिक अस्पताल।
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भिवानी। हेलो...सर जल्दी आओ, मर्डर हो गया है.....। एंबुलेंस लेकर कर्मचारी पहुंचे तो पाया कि आपसी विवाद था। ऐसी झूठी कॉल डायल 112 पर खूब आ रही हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी परेशान हैं। वहीं वास्तविक लोगों तक मदद नहीं मिल पा रही।
ऐसे मामलों में जहां से कॉल आती है, वहां कोई झगड़े में घायल मिलता है तो कोई शराब पीकर कहासुनी में फंसा मिलता है। झूठे कॉल की वजह से रोजाना स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस 30 से 50 किलोमीटर तक चक्कर काट रही हैं। मौके पर सड़क हादसे में घायल या फिर अन्य कोई मरीज न मिलने पर एंबुलेंस खाली ही लौट रही है तो कई बार झगड़े में घायलों को नागरिक अस्पताल तक लेकर आने के लिए वे सात रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से शुल्क ले रहे हैं। इसके साथ ही कई कॉल तो ऐसे होते हैं, जिनमें बताई गई लोकेशन पर एंबुलेंस पहुंचती है तो वहां पर सब शांत मिलता है।
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रोजाना आ पांच से छह झूठी कॉल
जिला मुख्यालय पर नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ही एंबुलेंस कंट्रोल रूम बनाया हुआ है। एंबुलेंस कंट्रोल रूम में रोजाना 100 से 110 कॉल आती हैं। इनमें से कोई सड़क हादसे में घायल तो कोई गर्भवती महिला को नागरिक अस्पताल, सीएचसी या फिर पीएचसी तक लेकर जाने के लिए आती है। वहीं डायल 112 से रोजाना 10 से 15 कॉल आ रही हैं। इसमें से कुछ कॉल तो सड़क हादसे में घायल मिलते हैं। हालांकि पांच से छह कॉल झूठी रहती हैं, जिसकी वजह से एंबुलेंस विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य संबंधित कॉल हो रही एंबुलेंस कंट्रोल बोर्ड में फॉरवर्ड
इमरजेंसी सहायता के लिए इमरजेंसी रिस्पांस एंड सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) डायल 112 है। अगर किसी को पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की तत्काल सहायता की जरूरत है, तो वह सीधे 112 पर कॉल कर सकता है। यह कॉल पंचकूला स्थित स्टेट कंट्रोल रूम में जाती है, जहां से स्वास्थ्य से संबंधित कॉल को एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फारवर्ड कर दिया जाता है। ऐसे में इस दौरान पीड़ित जहां से बोल रहा है, उसकी लोकेशन अनुसार जो भी एंबुलेंस नजदीक होगी, वह तुरंत मौके पर पहुंचेगी। पंचकूला में बनाए गए स्टेट कंट्रोल रूम में हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और हरियाणवी चार भाषाओं में काम करने की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक नागरिक तक सेवाओं की पहुंच हो सके। जहां पर जिस भाषा में पीड़ित बात करना चाहता है, उसी की भाषा में कंट्रोल रूम पर बैठे कर्मचारी बातचीत कर शिकायत नोट करेंगे। इसके बाद तुरंत कॉल पीड़ित की लोकेशन के नजदीक वाली गाड़ी में पहुंच जाएगी। (संवाद)
शराबी ने की झूठी कॉल
स्वास्थ्य विभाग में बवानीखेड़ा नागरिक अस्पताल के कार्यरत एंबुलेंस चालक कुलदीप ने बताया कि करीब एक माह पहले उन्हें पंचकूला मुख्यालय से बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव सिवाना में घायल होने की सूचना मिली थी। उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो उक्त व्यक्ति शराब के नशे में था, जिसके डायल 112 के माध्यम से झूठी कॉल करके एंबुलेंस बुला ली। यह मामला जब चिकित्सा अधिकारी से संज्ञान में आया तो उन्होंने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस को भी जानकारी दी। ऐसे में झूठी कॉल के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
झूठी कॉल से जरूरतमंदों को नहीं मिल पाती समय पर सुविधा
एंबुलेंस की सेवा मरीजों और घायलों की सहायता के लिए है। झूठे कॉल की वजह से जरूरतमंद मरीजों को एंबुलेंस की सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। कॉल आने पर जब एंबुलेंस उस लोकेशन पर पहुंचती है तो उन्हें मरीज या कोई घायल नहीं मिलता। इससे एंबुलेंस को लौटना पड़ता है। इसके कारण विभाग को भी आर्थिक नुकसान होता है और समय भी बर्बाद होता है। नागरिकों से अपील है कि एंबुलेंस आपकी सेवा के लिए लगाई गई है तो ऐसे में कोई भी असामाजिक कार्य न करें, जिससे यह सेवा बाधित हो।
- डॉ. मनीष श्योराण, इंचार्ज, आरटीएस, नागरिक अस्पताल।