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Bhiwani News: एचसीएस के बाद यूपीएससी में भी भावेश ख्यालिया ने पाई सफलता
Tue, 23 May 2023 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 23 May 2023 11:02 PM IST
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राहुल सांगवान अपने परिजन के साथ।
तोशाम। भिवानी जिले तोशाम क्षेत्र के गांव झांवरी निवासी भावेश ख्यालिया ने एचसीएस के बाद यूपीएससी में भी 280वें रैंक के साथ सफलता पाई है। भावेश ख्यालिया अपने ताऊ, चाचा के बाद एक ही परिवार से तीसरे एचसीएस व पहले यूपीएससी रैंक हासिल करने वाले बने हैं। उनकी इस उपलब्धि पर गांव में बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है।
यूपीएससी द्वारा घोषित किए गए अंतिम परिणाम में भावेश ख्यालिया ने पहले ही प्रसास में सफलता हासिल की है। यूपीएससी क्लीयर होने के बाद भावेश ख्यालिया पर एचसीएस के साक्षात्कार और उसके तुरंत बाद यूपीएससी के साक्षात्कार का भी दबाव था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोनों ही परीक्षाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने बताया कि बैगर कोचिंग लिए उन्होंने हिसार में घर पर रहते हुए 15 से 16 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई की और सफलता हासिल की है।
भावेश ख्यालिया ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (हैदराबाद) से 2020 में ग्रेजुएशन किया और उन्होंने ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह ख्यालिया व चाचा राजेश ख्यालिया से प्रेरित होकर कोरोना काल के दौरान समय का पूरा फायदा उठाते हुए घर पर ही तैयारियों में जुट गए। घर पर ही तैयारियां करते हुए उन्होंने पहले एचसीएस की परीक्षा में 12वां रैंक हासिल किया और उसके बाद अब यूपीएससी की परीक्षा में 280वां रैंक हासिल किया।
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माता सेवानिवृत्त शिक्षिका तो पिता रिटायर्ड प्राचार्य
भावेश ख्यालिया की माता सुशीला ख्यालिया शिक्षिका हैं, जिन्होंने वीआरएस ले लिया था, जबकि उनके पिता राजकुमार ख्यालिया गवर्नमेंट कॉलेज सिवानी से प्राचार्य के पद से 30 नवंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुए थे। सबसे बड़े ताऊ सतबीर ख्यालिया वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्राचार्य सेवानिवृत हैं। ताऊ कुलदीप ख्यालिया गांव में सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं और गांव के सरपंच रह चुके हैं। इस उपलब्धि पर ग्रामीण एक-दूसरे को बधाइयां देने में लगे हुए हैं, वहीं परिजनों के पास बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह से मिली प्रेरणा तो बन गया आईएएस
भावेश ख्यालिया ने कहा कि परिवार में कामयाबी की शुरुआत ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह से हुई और उसी विरासत को उन्होंने आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मेहनत करते रहने से एक दिन सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, ताऊ, परिवार के अन्य सदस्यों व दोस्तों को दिया।बच्चों को जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और कड़ी चुनौतियों का कड़ी मेहनत से सामना करना चाहिए, सफलता अपने आप आपके कदम चुमेगी। अधिकांश लोगों के पास उनका निर्धारित लक्ष्य या प्लान नहीं होता, जबकि यह बहुत आवश्यक है।
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यूपीएससी द्वारा घोषित किए गए अंतिम परिणाम में भावेश ख्यालिया ने पहले ही प्रसास में सफलता हासिल की है। यूपीएससी क्लीयर होने के बाद भावेश ख्यालिया पर एचसीएस के साक्षात्कार और उसके तुरंत बाद यूपीएससी के साक्षात्कार का भी दबाव था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोनों ही परीक्षाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने बताया कि बैगर कोचिंग लिए उन्होंने हिसार में घर पर रहते हुए 15 से 16 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई की और सफलता हासिल की है।
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भावेश ख्यालिया ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (हैदराबाद) से 2020 में ग्रेजुएशन किया और उन्होंने ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह ख्यालिया व चाचा राजेश ख्यालिया से प्रेरित होकर कोरोना काल के दौरान समय का पूरा फायदा उठाते हुए घर पर ही तैयारियों में जुट गए। घर पर ही तैयारियां करते हुए उन्होंने पहले एचसीएस की परीक्षा में 12वां रैंक हासिल किया और उसके बाद अब यूपीएससी की परीक्षा में 280वां रैंक हासिल किया।
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माता सेवानिवृत्त शिक्षिका तो पिता रिटायर्ड प्राचार्य
भावेश ख्यालिया की माता सुशीला ख्यालिया शिक्षिका हैं, जिन्होंने वीआरएस ले लिया था, जबकि उनके पिता राजकुमार ख्यालिया गवर्नमेंट कॉलेज सिवानी से प्राचार्य के पद से 30 नवंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुए थे। सबसे बड़े ताऊ सतबीर ख्यालिया वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से प्राचार्य सेवानिवृत हैं। ताऊ कुलदीप ख्यालिया गांव में सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं और गांव के सरपंच रह चुके हैं। इस उपलब्धि पर ग्रामीण एक-दूसरे को बधाइयां देने में लगे हुए हैं, वहीं परिजनों के पास बधाइयों का तांता लगा हुआ है।
ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह से मिली प्रेरणा तो बन गया आईएएस
भावेश ख्यालिया ने कहा कि परिवार में कामयाबी की शुरुआत ताऊ डॉ. युद्धबीर सिंह से हुई और उसी विरासत को उन्होंने आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मेहनत करते रहने से एक दिन सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, ताऊ, परिवार के अन्य सदस्यों व दोस्तों को दिया।बच्चों को जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और कड़ी चुनौतियों का कड़ी मेहनत से सामना करना चाहिए, सफलता अपने आप आपके कदम चुमेगी। अधिकांश लोगों के पास उनका निर्धारित लक्ष्य या प्लान नहीं होता, जबकि यह बहुत आवश्यक है।