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Bhiwani News: बेर और अमरूद पर चमगादड़ दल का हमला
Thu, 07 Mar 2024 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 07 Mar 2024 12:47 AM IST
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भिवानी। गांव चांग के करीब 35 एकड़ जमीन पर लगे बेर के बागों में इन दिनों चमगादड़ दल यानी बाघल का हमला हो रहा है। यह रात के समय हमला करते हैं। इस कारण किसान इन्हें नहीं भगा पा रहे हैं। इनके आसपास लगे अमरूद में भी चमगादड़ दल का आंशिक हमला हुआ है। इसकी वजह से बेर और अमरूद उत्पादकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
गांव चांग निवासी किसान मोहन तलेजा ने बताया कि चमगादड़ दल रात के समय बेर के बागों में हमला कर रहा है। ये चमगादड़ बेर का रस चूसकर वहीं उगल देते हैं, जिससे बेर नष्ट हो जाता है। इस बेर का किसान को कोई मोल नहीं मिल रहा है। मोहन सहित कई किसानों ने बताया कि इलाके में करीब 35 एकड़ से अधिक दायरे में बेर की खेती की जा रही है। उमरान प्रजाति के बेर पर इनका अधिक हमला हो रहा है।
मोहन तलेजा ने साढ़े चार एकड़ जमीन पर बेर का बगीचा लगाया है। इसमें हर सीजन में करीब दस लाख रुपये का बेर बिक जाता था, लेकिन इस साल चमगादड़ दल के हमले के कारण पांच लाख रुपये के नुकसान की आशंका है। इस हमले को रोकने के लिए उनके पास कोई विकल्प नहीं है। वह कृषि वैज्ञानिकों से भी समस्या सुलझाने की मांग कर चुके हैं।
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बेर के बाग में चमगादड़ दल का हमला रोकने के लिए किसान रात के समय बगीचे में रोशनी की व्यवस्था कराएं। बाग में आए चमगादड़ भगाने के लिए पटाखा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह की समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय में भी वैज्ञानिक तरीकों पर बातचीत कर किसानों को उपाय सुझाए जा रहे हैं। - डॉ़ मुरारीलाल, जिला विस्तार विशेषज्ञ बागवानी, कृषि विज्ञान केंद्र, भिवानी।
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गांव चांग निवासी किसान मोहन तलेजा ने बताया कि चमगादड़ दल रात के समय बेर के बागों में हमला कर रहा है। ये चमगादड़ बेर का रस चूसकर वहीं उगल देते हैं, जिससे बेर नष्ट हो जाता है। इस बेर का किसान को कोई मोल नहीं मिल रहा है। मोहन सहित कई किसानों ने बताया कि इलाके में करीब 35 एकड़ से अधिक दायरे में बेर की खेती की जा रही है। उमरान प्रजाति के बेर पर इनका अधिक हमला हो रहा है।
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मोहन तलेजा ने साढ़े चार एकड़ जमीन पर बेर का बगीचा लगाया है। इसमें हर सीजन में करीब दस लाख रुपये का बेर बिक जाता था, लेकिन इस साल चमगादड़ दल के हमले के कारण पांच लाख रुपये के नुकसान की आशंका है। इस हमले को रोकने के लिए उनके पास कोई विकल्प नहीं है। वह कृषि वैज्ञानिकों से भी समस्या सुलझाने की मांग कर चुके हैं।
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बेर के बाग में चमगादड़ दल का हमला रोकने के लिए किसान रात के समय बगीचे में रोशनी की व्यवस्था कराएं। बाग में आए चमगादड़ भगाने के लिए पटाखा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह की समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय में भी वैज्ञानिक तरीकों पर बातचीत कर किसानों को उपाय सुझाए जा रहे हैं। - डॉ़ मुरारीलाल, जिला विस्तार विशेषज्ञ बागवानी, कृषि विज्ञान केंद्र, भिवानी।