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पड़ताल: सुरक्षा के प्रबंधों से तौबा, बड़े संस्थानों के पास भी नहीं फायर एनओसी
Fri, 10 Mar 2023 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 10 Mar 2023 10:52 PM IST
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हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं भिवानी में खड़ी गाड़ियां।
भिवानी। हर साल आग की लपटें लाखों के कारोबार और जानमाल को अपने आगोश में ले रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले में आग से सुरक्षा के प्रबंधों से लोगों ने तौबा कर ली है। बड़े संस्थानों के पास फायर एनओसी तक नहीं है, जबकि शहर में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, मैरिज पैलेस और लघु उद्योग तक चल रहे हैं। शहर के मुख्य बाजारों में बनी व्यवसायिक इकाइयों और प्रतिष्ठानों में भी आग पर काबू पाने के प्रारंभिक इंतजाम तक नहीं हैं। ऐसे में अगर कोई आगजनी की घटना होती है तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूल और कॉलेेजों में हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है और इन संस्थानों के पास फायर फाइटिंग सिस्टम न होने उन विद्यार्थियों की जान संकट में डालने के समान है।
जिले में 250 से अधिक अस्पताल और 1100 से अधिक स्कूल
जिले में 250 से अधिक निजी अस्पताल हैं, जबकि 30 से अधिक ग्रामीण व शहरी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें फायर फाइटिंग सिस्टम की सुविधा नहीं है। इसके अलावा 400 से अधिक निजी स्कूल हैं और जबकि सरकारी की बात करें तो कुल 749 स्कूल हैं। इनमें 445 प्राइमरी, 106 मिडल, 73 उच्च, 125 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं, जिसमें से अधिकतर के पास फायर एनओसी नहीं है। इनके अलावा जिले में 250 से औद्योगिक इकाई हैं, जिसमें से सिर्फ 10 ने फायर एनओसी ली हुई है। ऐसे में बाकी की 240 इकाइयों बिना मानक पूरे किए ही चल रही हैं। जिले में 100 मैरिज पैलेस हैं, जोकि अधिकतर शहर के रिहायशी इलाकों में है, जिसमें में अधिकतर बिना मापन पूरे किए चल रहे हैं। इसके अलावा 20 से अधिक एम्यूजमेंट पार्क है जिनमें से सिर्फ एक के पास फायर एनओसी है। ऐसे में जिले के संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रतिष्ठानों में अग्निशामक यंत्र तक नहीं
किसी भी प्रतिष्ठान या फिर व्यवसायिक इकाइयों में आगजनी से बचाव के लिए अग्निशामक यंत्र का होना आवश्यक है। ताकि जरूरत पड़ने पर उसका प्रयोग किया जा सकें। हालांकि इसके लिए फायर एनओसी लगने की जरूरत नहीं होती है। इसे कोई भी प्रतिष्ठान या इकाई के संचालक बाजार से 1500 से 2000 रुपये देकर खरीद सकते है। अगर अधिकतर प्रतिष्ठानों और व्यवसायिक इकाइयों में यह यंत्र नहीं है।
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कोर्ट परिसर का फायर फायटिंग सिस्टम भी बंद
जिला कोर्ट परिसर का फायर फायटिंग सिस्टम भी लंबे अर्से से बंद पड़ा है। ऐसे में अगर कोई आगजनी की घटना होती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं वकीलों के चैंबरों में ये आग से बचाव की कोई सुविधा नहीं है।
साल भर में हो रही 150 से अधिक घटनाएं
हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं भिवानी के पास सालभर में आग की 150 से अधिक घटनाएं सामने आ रहे हैं। जिन पर काबू पाने के लिए विभाग की गाड़ियां ही जिलेभर में दौड़ लगा रही है। हाल ही में पिछले दिनों हालु बाजार और वीरवार को सराय चौपटा चौक पर आग लगने के मामले सामने आए हैैं, जोकि मुख्य बाजार में ही स्थित थी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने के अक्सर मामले सामने आए हैं।
आग लगने की घटना की सूचना मिलती ही अग्निशमन की गाड़ियों मौके पर भेज दी जाती है। जिले के अधिकतर बड़े संस्थानों के पास फायर एनओसी नहीं है। इसमें स्कूल, कॉलेज, मैरिज पैलेस, अस्पताल सहित बड़ी औद्योगिक इकाइयों भी शामिल है। इन इकाइयों के संचालकों को फायर एनओसी लेनी चाहिए और अग्निशामक यंत्र भी जरूर लगवाने चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थिति में काम आ सकें।
- ताराचंद, जिला दमकल अधिकारी, हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं भिवानी।
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जिले में 250 से अधिक अस्पताल और 1100 से अधिक स्कूल
जिले में 250 से अधिक निजी अस्पताल हैं, जबकि 30 से अधिक ग्रामीण व शहरी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें फायर फाइटिंग सिस्टम की सुविधा नहीं है। इसके अलावा 400 से अधिक निजी स्कूल हैं और जबकि सरकारी की बात करें तो कुल 749 स्कूल हैं। इनमें 445 प्राइमरी, 106 मिडल, 73 उच्च, 125 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं, जिसमें से अधिकतर के पास फायर एनओसी नहीं है। इनके अलावा जिले में 250 से औद्योगिक इकाई हैं, जिसमें से सिर्फ 10 ने फायर एनओसी ली हुई है। ऐसे में बाकी की 240 इकाइयों बिना मानक पूरे किए ही चल रही हैं। जिले में 100 मैरिज पैलेस हैं, जोकि अधिकतर शहर के रिहायशी इलाकों में है, जिसमें में अधिकतर बिना मापन पूरे किए चल रहे हैं। इसके अलावा 20 से अधिक एम्यूजमेंट पार्क है जिनमें से सिर्फ एक के पास फायर एनओसी है। ऐसे में जिले के संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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प्रतिष्ठानों में अग्निशामक यंत्र तक नहीं
किसी भी प्रतिष्ठान या फिर व्यवसायिक इकाइयों में आगजनी से बचाव के लिए अग्निशामक यंत्र का होना आवश्यक है। ताकि जरूरत पड़ने पर उसका प्रयोग किया जा सकें। हालांकि इसके लिए फायर एनओसी लगने की जरूरत नहीं होती है। इसे कोई भी प्रतिष्ठान या इकाई के संचालक बाजार से 1500 से 2000 रुपये देकर खरीद सकते है। अगर अधिकतर प्रतिष्ठानों और व्यवसायिक इकाइयों में यह यंत्र नहीं है।
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कोर्ट परिसर का फायर फायटिंग सिस्टम भी बंद
जिला कोर्ट परिसर का फायर फायटिंग सिस्टम भी लंबे अर्से से बंद पड़ा है। ऐसे में अगर कोई आगजनी की घटना होती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं वकीलों के चैंबरों में ये आग से बचाव की कोई सुविधा नहीं है।
साल भर में हो रही 150 से अधिक घटनाएं
हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं भिवानी के पास सालभर में आग की 150 से अधिक घटनाएं सामने आ रहे हैं। जिन पर काबू पाने के लिए विभाग की गाड़ियां ही जिलेभर में दौड़ लगा रही है। हाल ही में पिछले दिनों हालु बाजार और वीरवार को सराय चौपटा चौक पर आग लगने के मामले सामने आए हैैं, जोकि मुख्य बाजार में ही स्थित थी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग लगने के अक्सर मामले सामने आए हैं।
आग लगने की घटना की सूचना मिलती ही अग्निशमन की गाड़ियों मौके पर भेज दी जाती है। जिले के अधिकतर बड़े संस्थानों के पास फायर एनओसी नहीं है। इसमें स्कूल, कॉलेज, मैरिज पैलेस, अस्पताल सहित बड़ी औद्योगिक इकाइयों भी शामिल है। इन इकाइयों के संचालकों को फायर एनओसी लेनी चाहिए और अग्निशामक यंत्र भी जरूर लगवाने चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थिति में काम आ सकें।
- ताराचंद, जिला दमकल अधिकारी, हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं भिवानी।