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Bhiwani News: एडीसी के प्रशासक बनते ही 1000 रुपये से भी कम में सिमटा पुस्तकों का खर्च
Fri, 03 Apr 2026 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:13 AM IST
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शहर के हांसी गेट पर पुस्तकाें की दुकानों पर लगी बच्चों की भीड़।
भिवानी। शहर के हांसी गेट स्थित केएम पब्लिक स्कूल में प्रबंधकारिणी के चुनावों की वजह से अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी दीपक बाबूलाल कारवा को बतौर प्रशासक नियुक्त किया हुआ है। अतिरिक्त उपायुक्त ने प्रवेश उत्सव के दौरान ही विद्यालय की सभी कक्षाओं में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें लगाने के आदेश दिए हैं। जहां प्रत्येक कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थी की पाठ्यक्रम की पुस्तकों का खर्च एक हजार रुपये से भी कम हो गया है।
इन आदेशों से अभिभावकों की जेब को तो राहत मिली ही है, बल्कि बच्चों के चेहरे पर भी बस्ते का बोझ कम होने से मुस्कान खिल उठी है। अभिभावकों का कहना है कि इस विजन को अगर दूसरे निजी स्कूल भी समझे तो ना केवल अभिभावकों को फायदा होगा बल्कि बच्चे भी महंगी किताबों के बोझ तले नहीं दबेंगे। वहीं अधिकांश निजी विद्यालयों में प्राइवेट प्रकाशकों की महंगी किताबें बच्चों और अभिभावकों पर थोपी जा रही हैं जिसे खरीदने में ही अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है।
स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच निजी स्कूलों में भी प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थी को प्रबंधन की तरफ से पाठ्यक्रम पुस्तकों की सूची थमाई जा रही है। जिसमें अधिकांश पुस्तकें निजी प्रकाशकों की लगाई गई हैं। ये पुस्तकें ना केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुकाबले काफी महंगी हैं, बल्कि बच्चे की पीठ पर बस्ते के वजन के लिहाज से भी भारी पड़ रही हैं। जिन्हें खरीदने में भी अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है।
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ये है कक्षा वार बस्ते का वजन
कक्षा-1 और 2 के लिए 1.6 से 2.2 किलोग्राम
कक्षा-3 से 5 के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम
कक्षा 6 और 7 के लिए दो से तीन किलोग्राम
कक्षा- 8 के लिए 2.5 से चार किलोग्राम
कक्षा 9 एवं 10 के लिए 2.5 से 4.5 किलोग्राम
कक्षा 11 एवं 12 के लिए 3.5 से पांच किलोग्राम
प्राइमरी की पांच से दस तो अपर प्राइमरी की 12 से 15 हजार में मिल रही पुस्तकें
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उनका संगठन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहा है। निजी स्कूलों में प्राइवरी स्तर पर निजी प्रकाशकों की किताबें लागू की हैं जिन्हें खरीदने के लिए अभिभावकों को पांच से दस हजार रुपये का बोझ झेलना पड़ रहा है, जबकि अपर प्राइमरी की कक्षाओं के लिए 12 से 15 हजार रुपये में पुस्तकें आ रही हैं। सभी कक्षाओं में अगर एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाई जाएं तो मात्र एक हजार से 1200 रुपये में सभी पुस्तकें आसानी से आ जाती हैं। शिक्षा विभाग की कार्रवाई का भी निजी विद्यालयों को कोई डर नहीं है। इसलिए वे मनमर्जी से मोटे कमीशन के चक्कर में मनमर्जी से पुस्तकें लगा लाभ उठा रहे हैं। प्रत्येक कक्षा में बच्चे की किताब का वजन भी तय किया हुआ है।
उपायुक्त के मार्गदर्शन में मैंने केएम पब्लिक स्कूल में प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में ये कदम उठाया है। उपायुक्त के निर्देश पर विद्यालय में इस सत्र से किसी तरह की कोई भी फीस बढ़ोत्तरी नहीं की गई है जबकि शिक्षार्थी आए और सेवार्थी जाए विजन के साथ काम किया जा रहा है। फिलहाल विद्यालय में पुरानी नियमों के हिसाब से छात्र हित में काम कर रहे हैं जिससे सभी बच्चों का बेहतर शिक्षा का माहौल मिलेगा।
-दीपक बाबूलाल कारवा, अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी।
सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित पुस्तकों को लागू किया जाना अनिवार्य है। किसी भी निजी विद्यालय में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को अभिभावकों पर नहीं थोपा जाएगा। इस संबंध में अगर कोई शिकायत मिलती है तो इस पर कार्रवाई होगी। वहीं सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी सख्त हिदायतें हैं कि सत्र आरंभ होने के साथ ही निजी स्कूलों में पाठ्यक्रम की पुस्तकों की निरीक्षण के दौरान जांच करेंगे।
-डॉ निर्मल दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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इन आदेशों से अभिभावकों की जेब को तो राहत मिली ही है, बल्कि बच्चों के चेहरे पर भी बस्ते का बोझ कम होने से मुस्कान खिल उठी है। अभिभावकों का कहना है कि इस विजन को अगर दूसरे निजी स्कूल भी समझे तो ना केवल अभिभावकों को फायदा होगा बल्कि बच्चे भी महंगी किताबों के बोझ तले नहीं दबेंगे। वहीं अधिकांश निजी विद्यालयों में प्राइवेट प्रकाशकों की महंगी किताबें बच्चों और अभिभावकों पर थोपी जा रही हैं जिसे खरीदने में ही अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है।
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स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच निजी स्कूलों में भी प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थी को प्रबंधन की तरफ से पाठ्यक्रम पुस्तकों की सूची थमाई जा रही है। जिसमें अधिकांश पुस्तकें निजी प्रकाशकों की लगाई गई हैं। ये पुस्तकें ना केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुकाबले काफी महंगी हैं, बल्कि बच्चे की पीठ पर बस्ते के वजन के लिहाज से भी भारी पड़ रही हैं। जिन्हें खरीदने में भी अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है।
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ये है कक्षा वार बस्ते का वजन
कक्षा-1 और 2 के लिए 1.6 से 2.2 किलोग्राम
कक्षा-3 से 5 के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम
कक्षा 6 और 7 के लिए दो से तीन किलोग्राम
कक्षा- 8 के लिए 2.5 से चार किलोग्राम
कक्षा 9 एवं 10 के लिए 2.5 से 4.5 किलोग्राम
कक्षा 11 एवं 12 के लिए 3.5 से पांच किलोग्राम
प्राइमरी की पांच से दस तो अपर प्राइमरी की 12 से 15 हजार में मिल रही पुस्तकें
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि उनका संगठन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहा है। निजी स्कूलों में प्राइवरी स्तर पर निजी प्रकाशकों की किताबें लागू की हैं जिन्हें खरीदने के लिए अभिभावकों को पांच से दस हजार रुपये का बोझ झेलना पड़ रहा है, जबकि अपर प्राइमरी की कक्षाओं के लिए 12 से 15 हजार रुपये में पुस्तकें आ रही हैं। सभी कक्षाओं में अगर एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाई जाएं तो मात्र एक हजार से 1200 रुपये में सभी पुस्तकें आसानी से आ जाती हैं। शिक्षा विभाग की कार्रवाई का भी निजी विद्यालयों को कोई डर नहीं है। इसलिए वे मनमर्जी से मोटे कमीशन के चक्कर में मनमर्जी से पुस्तकें लगा लाभ उठा रहे हैं। प्रत्येक कक्षा में बच्चे की किताब का वजन भी तय किया हुआ है।
उपायुक्त के मार्गदर्शन में मैंने केएम पब्लिक स्कूल में प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में ये कदम उठाया है। उपायुक्त के निर्देश पर विद्यालय में इस सत्र से किसी तरह की कोई भी फीस बढ़ोत्तरी नहीं की गई है जबकि शिक्षार्थी आए और सेवार्थी जाए विजन के साथ काम किया जा रहा है। फिलहाल विद्यालय में पुरानी नियमों के हिसाब से छात्र हित में काम कर रहे हैं जिससे सभी बच्चों का बेहतर शिक्षा का माहौल मिलेगा।
-दीपक बाबूलाल कारवा, अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी।
सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित पुस्तकों को लागू किया जाना अनिवार्य है। किसी भी निजी विद्यालय में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को अभिभावकों पर नहीं थोपा जाएगा। इस संबंध में अगर कोई शिकायत मिलती है तो इस पर कार्रवाई होगी। वहीं सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी सख्त हिदायतें हैं कि सत्र आरंभ होने के साथ ही निजी स्कूलों में पाठ्यक्रम की पुस्तकों की निरीक्षण के दौरान जांच करेंगे।
-डॉ निर्मल दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।