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Bhiwani News: फर्जी यूनिट बनाकर रिकॉर्ड में संपत्ति मालिक बदलने के आरोप में नगर परिषद ईओ, लिपिक सहित चार पर प्राथमिकी दर्ज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 12:47 AM IST
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An FIR has been lodged against the Municipal Council EO and clerk, among four others, for allegedly creating a fake unit and changing the property owner on record.
भिवानी। नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोपियों से मिलीभगत कर फर्जी यूनिट तैयार कर करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक रिकॉर्ड में बदलने के मामले में शहर थाना पुलिस ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी राजाराम, लिपिक नीरज चौहान, कुंडली (सोनीपत) निवासी वासु कुमार मोड़ा और सेक्टर-15 रोहिणी (दिल्ली) निवासी राघवेंद्र कुमार मोड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की शिकायत बाड़ी मोहल्ला पतराम गेट निवासी पूर्व पार्षद आनंद कुमार बासिया ने पुलिस अधीक्षक को दी थी।
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इससे पहले इस मामले की शिकायत नगर परिषद के डीएमसी को भी दी गई थी जिसकी जांच हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में पूर्व पार्षद आनंद बासिया ने बताया कि शहर के हालू बाजार में करीब 80 वर्ष पुरानी दुकान है। नगर परिषद रिकॉर्ड में इसकी यूनिट संख्या आई-321, आई-322 और आई-323 दर्ज है। तीनों यूनिटों में 68 वर्गगज में बनी दुकान की कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है।
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शिकायत के अनुसार नगर परिषद रिकॉर्ड में इस संपत्ति के तीन लोग मालिक और कब्जाधारी दर्ज हैं। नगर परिषद भिवानी के रिकॉर्ड में सोनम, शारदा देवी पत्नी आनंद कुमार 17 वर्गगज की बराबर हिस्सेदार तथा बकाया जायदाद इमरती देवी और संजीव कुमार के नाम दर्ज थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इमरती देवी और संजीव कुमार से उनके हिस्से की जायदाद उसकी पत्नी ने खरीद ली थी जिसकी वसीका पंजीकृत होना शेष था।
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शिकायतकर्ता के अनुसार मार्च 2025 में नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन तीनों यूनिटों की संपत्ति की अलग से नगर परिषद रिकॉर्ड में फर्जी यूनिट ‘ए’ नाम से दर्ज कर दी गई। इसकी जानकारी मिलने पर रिकॉर्ड की जांच की गई तो पाया गया कि बिना किसी अधिकृत अधिकारी की स्वीकृति के फर्जी यूनिट बनाई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यूनिट बनाने संबंधी किसी अधिकारी के आदेश या हस्ताक्षर तक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थे।
शहर थाना प्रभारी जरनैल सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच के बाद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी राजाराम, लिपिक नीरज चौहान सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दो लाख रुपये लेकर बिना अधिकृत अधिकारी के बना दी फर्जी यूनिट
पूर्व पार्षद आनंद बासिया ने शिकायत में आरोप लगाया कि मार्च 2025 में उसकी जानकारी में आया कि आरोपी वासु कुमार मोड़ा और राघवेंद्र मोड़ा ने नगर परिषद भिवानी के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर उक्त जायदाद के संबंध में अपने नाम से नई यूनिट संख्या आई-321-322/323/ए दर्ज करवा ली। नगर परिषद रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि यूनिट संख्या आई-321-322/323 के बाद नई यूनिट ‘ए’ दर्ज कर दी गई जो बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के दर्ज की गई थी। पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया कि आरोपी वासु कुमार मोड़ा और राघवेंद्र कुमार मोड़ा ने नगर परिषद भिवानी में लिपिक के तौर पर तैनात आरोपी नीरज चौहान से मिलीभगत और सांठगांठ कर दो लाख रुपये देकर फर्जी यूनिट बनवाई। आरोप है कि लिपिक ने नगर परिषद के सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और टैंपरिंग कर मालिकाना रिकॉर्ड बदल दिया।

फर्जी यूनिट नहीं हटे इसलिए सिविल कोर्ट में डलवाया मामला
पूर्व पार्षद आनंद बासिया ने शिकायत में आरोप लगाया कि उसने 15 मई 2025 को नगर परिषद रिकॉर्ड से फर्जी यूनिट को डिलीट और रद्द करने के लिए आवेदन दिया था लेकिन नगर परिषद लिपिक नीरज चौहान ने जानबूझकर उसकी दरखास्त दबा दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी यूनिट की एंट्री को डिलीट और रद्द करने के बजाय आरोपी वासु कुमार मोड़ा और राघवेंद्र कुमार मोड़ा से मिलीभगत कर मामला सिविल न्यायालय में दायर करवा दिया गया ताकि फर्जी यूनिट नगर परिषद रिकॉर्ड से तत्काल प्रभाव से डिलीट और रद्द न हो सके। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सिविल मुकदमे में नगर परिषद की ओर से निष्पक्ष पैरवी नहीं की गई। आरोप है कि नगर परिषद लिपिक नीरज चौहान और कार्यकारी अधिकारी राजाराम ने न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए सही तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए। शिकायत के अनुसार इसी कारण न्यायालय ने फर्जी यूनिट डिलीट और रद्द करने के मामले में रोक लगा दी। हालांकि शिकायतकर्ता ने कहा कि नगर परिषद कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर न्यायालय की कोई रोक नहीं है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी वासु कुमार मोड़ा और राघवेंद्र कुमार मोड़ा का संबंधित जायदाद के किसी हिस्से की मलकियत से कोई संबंध नहीं है।


नगर आयुक्त ने दिए थे जांच के आदेश
शिकायतकर्ता आनंद बासिया ने बताया कि उन्होंने 30 जुलाई 2025 को जिला नगर आयुक्त को मामले की शिकायत दी थी। शिकायत की जांच नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी राजाराम को सौंपी गई थी और एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आठ माह बीतने के बाद भी मामले में रिपोर्ट नहीं दी गई और शिकायत को दबाए रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में तीन बार और शिकायत देने के बावजूद मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।
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