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न कार्रवाई का डर, न जमीन की चिंता बेखौफ होकर जला रहे फसलों के अवशेष
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Sun, 30 Apr 2017 01:30 AM IST
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फसल कटाई के बाद खेतों में पड़े फाने आदि फसलों के अवशेषों को क्षेत्र के किसान बेखौफ होकर जला रहे हैं। इन किसानों को न तो प्रशासनिक कार्रवाई का डर है और न ही अपने जमीन की चिंता। प्रशासन और सरकारी दावे भी यहां धुओं में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। कमेटियां बनाई जा रही है, जागरूकता वैन में गांवों में भेजने का तर्क है लेकिन धरातल पर सरकारी दावे धराशायी होते दिखाई दे रहें हैं।
जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म होने के साथ-साथ आसपास की आबोहवा में जहरीला धुआं घुल रहा है। इन सबके बावजूद जिला प्रशासन की कार्रवाई अब तक महज टीम गठन व किसानों को चेतावनी देने तक ही सिमटी हुई है। प्रशासन के सुस्त रवैये से किसान बेखौफ होकर फसलों के अवशेषों को माचिस की तीली दिखा रहे हैं।
वहीं, इनकी चपेट में हरे-भरे पेड़ भी आ रहे हैं लेकिन वन विभाग भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। शनिवार को भी शहर के भिवानी रोड स्थित खेतों में बचे अवशेषों में आगजनी की घटना देखने को मिली। हवा के झोके के साथ साथ लगते खेत में भी आग फैल गई। इस दौरान कुछेक पेड़ों को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया।
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वहीं, आगजनी की घटना से चंद दूरी पर शिक्षण संस्थाएं भी है। अब अगर जिला प्रशासन के पुख्ता प्रबंधों की बात करें तो जिला उपायुक्त विजय कुमार सिधप्पा ने दो दिन पहले ही किसानों को जागरूक करने के लिए एक स्पेशल वैन को रवाना किया था। कृषि विभाग द्वारा शुरू चलाई गई यह वैन गांव-गांव जाकर किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने बारे जागरूक कर रही है।
इसके बाद भी किसान लगातार खेतों में फाने को आग लगाकर प्रशासन के नियमों को दरकिनार कर रहे है। कृषि विभाग की तरफ से भी ऐसे लोगों के खिलाफ सजा व जुर्माना लगाने को प्रावधान हैं, मगर लोग जागरूक होने की बजाय लगातार अपने खेतों में आग लगा रहे। खेतों में लगाई गई आग के कारण जिले के विभिन्न गांवों में अनेकों हरे पेड़ आग की भेंट चढ़ चुके है।
डीसी ने गठित की थी ज्वाइंट टीम, दो दिन बाद करेंगे समीक्षा
कोर्ट के आदेशों को जहन में रखते हुए जिला प्रशासन ने ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने की प्लानिंग भी तैयार की थी। कुछ दिन पहले ही जिला उपायुक्त ने कृषि विभाग, प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड व तहसीलदार की ज्वाइंट टीम इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बनाई थी। इस बार की अगर बात करे तो प्रशासन ने अब तक न तो किसी को नोटिस थमाया है और न ही कोई मामला दर्ज हुआ है। वहीं, डीसी का कहना है कि इस ज्वाइंट कमेटी के कार्य की समीक्षा के लिए वो दो दिन बाद इनकी बैठक लेंगे।
शरीर पर डालते है बुरा प्रभाव : एसएमओ
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि खेतों में फाने जलाने से सभी प्राणियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जहरीले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो जाता है। जिससे दमा, एलर्जी व आंखों में जलन होने लगती है। फसलों के अवशेष जलाना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
किसान नेताओं ने की अवशेष न जलाने की अपील
भारतीय किसान यूनियन के कोषाध्यक्ष राजकुमार हड़ौदी ने बताया कि फसलों के अवशेष जलाना किसी भी तरह से फयदेमंद नहीं है। इससे वातावरण प्रदूषित होता है जिससे सेहत को भी नुकसान होने की संभावना है। भूसा जलाने की बजाय इसे गलाना चाहिए। जिससे खाद बनकर तैयार होती है।
किसान जनहित संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुनील पहलवान ने बताया कि कुछ लोग खाद के वहम में भूसा जला रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि फाने जलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है। फसलों के अवशेष जलाने से लाभ की बजाय बहुत बड़ा नुकसान है।
वर्जन::
मैंने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड, कृषि विभाग व तहसीलदार की एक ज्वाइंट टीम गठित की हुई है। इसके अलावा हमने एक जागरूकता वैन भी चला रखी है जो गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रही है। दो दिन बाद में ज्वाइंट टीम की बैठक लूंगा और जो भी सामने आएगा उस आधार पर प्रशासन कार्रवाई करेगा। किसानों से अपील है कि फसलों के अवशेषों को न जलाएं।
विजय कुमार सिधप्पा, डीसी
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जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म होने के साथ-साथ आसपास की आबोहवा में जहरीला धुआं घुल रहा है। इन सबके बावजूद जिला प्रशासन की कार्रवाई अब तक महज टीम गठन व किसानों को चेतावनी देने तक ही सिमटी हुई है। प्रशासन के सुस्त रवैये से किसान बेखौफ होकर फसलों के अवशेषों को माचिस की तीली दिखा रहे हैं।
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वहीं, इनकी चपेट में हरे-भरे पेड़ भी आ रहे हैं लेकिन वन विभाग भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। शनिवार को भी शहर के भिवानी रोड स्थित खेतों में बचे अवशेषों में आगजनी की घटना देखने को मिली। हवा के झोके के साथ साथ लगते खेत में भी आग फैल गई। इस दौरान कुछेक पेड़ों को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया।
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वहीं, आगजनी की घटना से चंद दूरी पर शिक्षण संस्थाएं भी है। अब अगर जिला प्रशासन के पुख्ता प्रबंधों की बात करें तो जिला उपायुक्त विजय कुमार सिधप्पा ने दो दिन पहले ही किसानों को जागरूक करने के लिए एक स्पेशल वैन को रवाना किया था। कृषि विभाग द्वारा शुरू चलाई गई यह वैन गांव-गांव जाकर किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने बारे जागरूक कर रही है।
इसके बाद भी किसान लगातार खेतों में फाने को आग लगाकर प्रशासन के नियमों को दरकिनार कर रहे है। कृषि विभाग की तरफ से भी ऐसे लोगों के खिलाफ सजा व जुर्माना लगाने को प्रावधान हैं, मगर लोग जागरूक होने की बजाय लगातार अपने खेतों में आग लगा रहे। खेतों में लगाई गई आग के कारण जिले के विभिन्न गांवों में अनेकों हरे पेड़ आग की भेंट चढ़ चुके है।
डीसी ने गठित की थी ज्वाइंट टीम, दो दिन बाद करेंगे समीक्षा
कोर्ट के आदेशों को जहन में रखते हुए जिला प्रशासन ने ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने की प्लानिंग भी तैयार की थी। कुछ दिन पहले ही जिला उपायुक्त ने कृषि विभाग, प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड व तहसीलदार की ज्वाइंट टीम इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बनाई थी। इस बार की अगर बात करे तो प्रशासन ने अब तक न तो किसी को नोटिस थमाया है और न ही कोई मामला दर्ज हुआ है। वहीं, डीसी का कहना है कि इस ज्वाइंट कमेटी के कार्य की समीक्षा के लिए वो दो दिन बाद इनकी बैठक लेंगे।
शरीर पर डालते है बुरा प्रभाव : एसएमओ
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि खेतों में फाने जलाने से सभी प्राणियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जहरीले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो जाता है। जिससे दमा, एलर्जी व आंखों में जलन होने लगती है। फसलों के अवशेष जलाना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
किसान नेताओं ने की अवशेष न जलाने की अपील
भारतीय किसान यूनियन के कोषाध्यक्ष राजकुमार हड़ौदी ने बताया कि फसलों के अवशेष जलाना किसी भी तरह से फयदेमंद नहीं है। इससे वातावरण प्रदूषित होता है जिससे सेहत को भी नुकसान होने की संभावना है। भूसा जलाने की बजाय इसे गलाना चाहिए। जिससे खाद बनकर तैयार होती है।
किसान जनहित संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुनील पहलवान ने बताया कि कुछ लोग खाद के वहम में भूसा जला रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि फाने जलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है। फसलों के अवशेष जलाने से लाभ की बजाय बहुत बड़ा नुकसान है।
वर्जन::
मैंने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड, कृषि विभाग व तहसीलदार की एक ज्वाइंट टीम गठित की हुई है। इसके अलावा हमने एक जागरूकता वैन भी चला रखी है जो गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रही है। दो दिन बाद में ज्वाइंट टीम की बैठक लूंगा और जो भी सामने आएगा उस आधार पर प्रशासन कार्रवाई करेगा। किसानों से अपील है कि फसलों के अवशेषों को न जलाएं।
विजय कुमार सिधप्पा, डीसी