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Bhiwani News: ग्रैप के नियमों के लागू होने के बाद एक अक्तूबर से डीजल से संचालित जनरेटर होंगे बंद
Fri, 22 Sep 2023 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 22 Sep 2023 10:38 PM IST
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हांसी गेट स्थित एक निजी अस्पताल संचालक द्वारा फुटपाथ पर लगाया जनरेटर।
फोटो: 44
- एक अक्तूबर से जिले में जहरीला धुआं नहीं उगल पाएंगे जनरेटर
- ड्यूल फ्यूज सिस्टम से संचालित होंगे जनरेटर, घटेगा हवा में प्रदूषण का स्तर
- शहर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा है डीजल से चलने वाले बड़े जनरेटरों का इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी। एनजीटी और ग्रैप के नियमों के लागू होने के बाद अब एक अक्तूबर से भिवानी जिले में जनरेटर जहरीला धुआं नहीं उगल पाएंगे। डीजल से संचालित होने वाले 19 किलोवाट से अधिक क्षमता के जनरेटरों को बंद किया जाएगा। वहीं अब जनरेटर के संचालन पर डीजल के अलावा एलपीजी गैस का भी इस्तेमाल होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में डीजल से संचालित सभी जनरेटरों में बदलाव को लेकर हिदायतें जारी कर दी हैं। इनमें अब 70 फीसदी एलपीजी और 30 फीसदी डीजल ही इस्तेमाल होगा। वहीं शहर भर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पताल भी हैं, जिनके अंदर अब जनरेटर का शोरगुल और धुआं भी थम जाएगा। जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के समक्ष भी ग्रैप की नई हिदायतें पहुंच गई हैं। इसके बाद जनरेटरों को लेकर संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
भिवानी शहर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पताल हैं, जबकि जिला नागरिक अस्पताल परिसर में भी ओटी, ओपीडी व अन्य विभागों में अलग-अलग 19 किलोवाट से अधिक क्षमता के जनरेटर लगे हुए हैं। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी इमरजेंसी वार्डों सहित सामान्य वार्डों के लिए बिजली कट लगने की सूरत में बड़े जनरेटर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ये जनरेटर कई घंटों तक भी चलाए जाते हैं, जिनमें इंधन के तौर पर डीजल की बड़े स्तर पर खपत भी होती है। लगातार चलने की वजह से डीजल संचालित ये जनरेटर हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ाते हैं। लेकिन एनसीआर क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों के लिए ग्रैप के नियम लागू हो गए हैं।
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इसके बाद इन जनरेटरों के संचालन पर एक अक्तूबर से पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। निजी अस्पतालों के साथ सरकारी और अन्य संस्थानों में बड़े जनरेटर संचालन के लिए भी व्यापक बदलाव करना जरूरी होगा। केवल उन्हीं जनरेटरों का संचालन होगा जो एलपीजी और डीजल यानी ड्यूल फ्यूल सिस्टम से संचालित होंगे यानी जिनमें डीजल के साथ एलपीजी गैस का भी एक निश्चित अनुपात में उपयोग किया जाएगा।
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ग्रैप नियमों के लागू होने के चलते जिला नागरिक अस्पताल के अलावा सभी अस्पतालों में हमने हिदायतें जारी कर दी हैं कि वे ड्यूल फ्यूल सिस्टम से चलने वाले जनरेटरों का इस्तेमाल करें। डीजल से संचालित होने वाले जनरेटरों को बंद किया जाएगा। विभाग अस्पताल परिसर में लगे सभी जनरेटरों में ये बदलाव जल्द ही करा देगा।
-डॉ रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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- एक अक्तूबर से जिले में जहरीला धुआं नहीं उगल पाएंगे जनरेटर
- ड्यूल फ्यूज सिस्टम से संचालित होंगे जनरेटर, घटेगा हवा में प्रदूषण का स्तर
- शहर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा है डीजल से चलने वाले बड़े जनरेटरों का इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी। एनजीटी और ग्रैप के नियमों के लागू होने के बाद अब एक अक्तूबर से भिवानी जिले में जनरेटर जहरीला धुआं नहीं उगल पाएंगे। डीजल से संचालित होने वाले 19 किलोवाट से अधिक क्षमता के जनरेटरों को बंद किया जाएगा। वहीं अब जनरेटर के संचालन पर डीजल के अलावा एलपीजी गैस का भी इस्तेमाल होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में डीजल से संचालित सभी जनरेटरों में बदलाव को लेकर हिदायतें जारी कर दी हैं। इनमें अब 70 फीसदी एलपीजी और 30 फीसदी डीजल ही इस्तेमाल होगा। वहीं शहर भर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पताल भी हैं, जिनके अंदर अब जनरेटर का शोरगुल और धुआं भी थम जाएगा। जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के समक्ष भी ग्रैप की नई हिदायतें पहुंच गई हैं। इसके बाद जनरेटरों को लेकर संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
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भिवानी शहर में 48 से अधिक प्राइवेट अस्पताल हैं, जबकि जिला नागरिक अस्पताल परिसर में भी ओटी, ओपीडी व अन्य विभागों में अलग-अलग 19 किलोवाट से अधिक क्षमता के जनरेटर लगे हुए हैं। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी इमरजेंसी वार्डों सहित सामान्य वार्डों के लिए बिजली कट लगने की सूरत में बड़े जनरेटर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ये जनरेटर कई घंटों तक भी चलाए जाते हैं, जिनमें इंधन के तौर पर डीजल की बड़े स्तर पर खपत भी होती है। लगातार चलने की वजह से डीजल संचालित ये जनरेटर हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ाते हैं। लेकिन एनसीआर क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों के लिए ग्रैप के नियम लागू हो गए हैं।
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इसके बाद इन जनरेटरों के संचालन पर एक अक्तूबर से पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। निजी अस्पतालों के साथ सरकारी और अन्य संस्थानों में बड़े जनरेटर संचालन के लिए भी व्यापक बदलाव करना जरूरी होगा। केवल उन्हीं जनरेटरों का संचालन होगा जो एलपीजी और डीजल यानी ड्यूल फ्यूल सिस्टम से संचालित होंगे यानी जिनमें डीजल के साथ एलपीजी गैस का भी एक निश्चित अनुपात में उपयोग किया जाएगा।
ग्रैप नियमों के लागू होने के चलते जिला नागरिक अस्पताल के अलावा सभी अस्पतालों में हमने हिदायतें जारी कर दी हैं कि वे ड्यूल फ्यूल सिस्टम से चलने वाले जनरेटरों का इस्तेमाल करें। डीजल से संचालित होने वाले जनरेटरों को बंद किया जाएगा। विभाग अस्पताल परिसर में लगे सभी जनरेटरों में ये बदलाव जल्द ही करा देगा।
-डॉ रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।