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15 साल से दिव्यांगों को पैरों पर खड़ा कर रहा आदर्श पुनर्वास केंद्र
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आदर्श शिक्षक संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देते दिव्यांग बच्चे। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। शहर के लोहारू रोड पर स्थित एक संस्था एसी है जो समाज के उस हिस्से के लिए काम करती है जो सामान्य समाज से कटा हुआ है। दिव्यांगों के लिए काम करने वाली यह संस्था पिछले 15 साल से काम कर रही है। बच्चों को औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की ही शिक्षा यहां पर दी जाती है। यह पूरी तरह निशुल्क है और इस समय संस्था में 187 बच्चे हैं।
वर्तमान समय में लोगों के पास इतना समय नहीं होता है कि वो दूसरों के जीवन के बारे में कुछ सोच सकें। खासकर शहरों में तो लोगों को तो यह भी नहीं पता होता कि उनका पड़ोसी कौन है। अगर कोई दिव्यांग दिख जाए तो लोग दूर से निकलते हैं कि कहीं कोई मदद न मांग ले। मगर आदर्श पैरामेडिकल वेलफेयर एसोसिएशन इस धारणा के विपरीत काम कर रही है। इस संस्था ने लोहारू रोड पर एक स्पेशल स्कूल बनाया है, जहां दिव्यांगों को पढ़ाई से लेकर रोजगार तक के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां उन्हें निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इतना ही नहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके अंदर की प्रतिभा को भी निखारा जाता है।
दिव्यांगों की हालत देख बदलाव का लिया था फैसला
आदर्श पैरामेडिकल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश श्योराण ने कहा कि दिव्यांगों की समाज में उपेक्षा की जाती है। इस बात से मन बहुत दुखी हुआ। मन में दिव्यांगों के लिए कुछ करने की इच्छा थी तो वर्ष 2004 में संस्था बनाई और मदद करने में जुट गए। उसके बाद लोगों का सहयोग मिला और 2006 में एक स्कूल की शुरुआत की, जिसमें दिव्यांगों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। वहां उन्हें अन्य कई प्रकार की सुविधाएं भी दी जाती हैं।
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ये सुविधाएं भी दी जाती हैं दिव्यांगो को
आदर्श पुनर्वास केंद्र एवं स्पेशल स्कूल में दिव्यांग बच्चों को फिजियोथेरेपी, ओक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, ग्रुप हीयरिंग, काउंसलिंग और व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है। डॉ. राजेश श्योराण ने बताया कि कई बार दिव्यांग जीवन से हताश हो जाते हैं तो काउंसलिंग कर उनकी मदद की जाती है।
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वर्तमान समय में लोगों के पास इतना समय नहीं होता है कि वो दूसरों के जीवन के बारे में कुछ सोच सकें। खासकर शहरों में तो लोगों को तो यह भी नहीं पता होता कि उनका पड़ोसी कौन है। अगर कोई दिव्यांग दिख जाए तो लोग दूर से निकलते हैं कि कहीं कोई मदद न मांग ले। मगर आदर्श पैरामेडिकल वेलफेयर एसोसिएशन इस धारणा के विपरीत काम कर रही है। इस संस्था ने लोहारू रोड पर एक स्पेशल स्कूल बनाया है, जहां दिव्यांगों को पढ़ाई से लेकर रोजगार तक के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां उन्हें निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इतना ही नहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके अंदर की प्रतिभा को भी निखारा जाता है।
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दिव्यांगों की हालत देख बदलाव का लिया था फैसला
आदर्श पैरामेडिकल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश श्योराण ने कहा कि दिव्यांगों की समाज में उपेक्षा की जाती है। इस बात से मन बहुत दुखी हुआ। मन में दिव्यांगों के लिए कुछ करने की इच्छा थी तो वर्ष 2004 में संस्था बनाई और मदद करने में जुट गए। उसके बाद लोगों का सहयोग मिला और 2006 में एक स्कूल की शुरुआत की, जिसमें दिव्यांगों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। वहां उन्हें अन्य कई प्रकार की सुविधाएं भी दी जाती हैं।
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ये सुविधाएं भी दी जाती हैं दिव्यांगो को
आदर्श पुनर्वास केंद्र एवं स्पेशल स्कूल में दिव्यांग बच्चों को फिजियोथेरेपी, ओक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, ग्रुप हीयरिंग, काउंसलिंग और व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है। डॉ. राजेश श्योराण ने बताया कि कई बार दिव्यांग जीवन से हताश हो जाते हैं तो काउंसलिंग कर उनकी मदद की जाती है।