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Bhiwani News: ढांगर गांव में नंदी और गाय की अनोखी शादी, वृषोत्सर्ग रस्म के तहत कराया विवाह
Tue, 18 Nov 2025 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:02 AM IST
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गांव ढांगर में राजेश शर्मा व पत्नी सुदेश की मौजूदगी में नंदी की शादी कराते शास्त्री। स्वयं
कैरू (भिवानी) । गांव ढांगर में नंदी और गाय का अनोखा विवाह वृषोत्सर्ग की प्राचीन रस्म के तहत संपन्न कराया गया। यह अनुष्ठान आचार्य रविंद्र शास्त्री ने गांव निवासी राजेश शर्मा और उनकी पत्नी सुदेश के घर सम्पन्न कराया। मान्यता है कि वृषोत्सर्ग से पितर प्रसन्न होते हैं और इससे दस पीढ़ियों तक के पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है।
आचार्य रविंद्र शास्त्री ने बताया कि यह रस्म बिल्कुल पारंपरिक विवाह की तरह निभाई जाती है। इसमें मंडप सजाकर हल्दी की रस्म, पूजा-अर्चना और सात फेरों की विधि पूरी की जाती है। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान का उल्लेख महाभारत के अनुशासन पर्व, दान धर्म पर्व के अध्याय 125 में भी मिलता है जिसमें देवताओं, ऋषियों और पितरों के संवाद में वृषोत्सर्ग के महत्व का वर्णन है।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि घर में देसी गाय का होना अत्यंत शुभ माना जाता है। जिन घरों में गाय नहीं है उन्हें हर साल सवा मण अनाज गोशाला में दान करना चाहिए जिससे गृहदोष और क्लेश दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि शनि की साढ़ेसाती, ढैया या राहू-केतू की दशा होने पर व्यक्ति अपने वजन के बराबर अनाज में शक्कर या गुड़ मिलाकर गोशाला में दान करे। इसे तुला दान कहा जाता है जो अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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आचार्य रविंद्र शास्त्री ने बताया कि यह रस्म बिल्कुल पारंपरिक विवाह की तरह निभाई जाती है। इसमें मंडप सजाकर हल्दी की रस्म, पूजा-अर्चना और सात फेरों की विधि पूरी की जाती है। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान का उल्लेख महाभारत के अनुशासन पर्व, दान धर्म पर्व के अध्याय 125 में भी मिलता है जिसमें देवताओं, ऋषियों और पितरों के संवाद में वृषोत्सर्ग के महत्व का वर्णन है।
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आचार्य शास्त्री ने कहा कि घर में देसी गाय का होना अत्यंत शुभ माना जाता है। जिन घरों में गाय नहीं है उन्हें हर साल सवा मण अनाज गोशाला में दान करना चाहिए जिससे गृहदोष और क्लेश दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि शनि की साढ़ेसाती, ढैया या राहू-केतू की दशा होने पर व्यक्ति अपने वजन के बराबर अनाज में शक्कर या गुड़ मिलाकर गोशाला में दान करे। इसे तुला दान कहा जाता है जो अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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