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Bhiwani News: फूल से मासूम को टहनी पर टांग गई पत्थर दिल मां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:24 AM IST
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A stone-hearted mother left her innocent, flower-like child hanging from a branch.
पेड़ की टहनी पर पॉलिथीन में बरामद हुआ नवजात ​शिशु।
भिवानी। जन्म देते ही फूल से मासूम को पाॅलीथीन में डालकर मरने के लिए पेड़ की टहनी पर टांगकर छोड़ देने वाली मां का दिल ऐसा करते जरा भी नहीं पसीजा...। सुबह जब इस घटना का पता चला तो सभी के मुंह पर यही सवाल था। शहर में पहले भी नवजात शिशु लावारिस हालत में मिले हैं लेकिन ऐसा पहली बार देखा। लोकलाज के लिहाज से रात के अंधेरे में ऐसा करने वाली महिला की तलाश के लिए पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले लेकिन सुराग नहीं लगा।
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बिजलीकर्मी दिनोद निवासी रामचंद्र ने बताया कि वह सुबह सैर के लिए निकले तो पेड़ की टहनी पर लटकी काले रंग की पॉलीथीन दूर से ही दिख गई। इतनी बड़ी थैली देख कौतुहल जागा कि इसमें क्या होगा। नजदीक गया तो उसमें से रोने की बहुत मद्धम आवाज आ रही थी। तुरंत थैली को नीचे उतारा तो देखा अंदर नवजात शिशु था। उसकी धड़कन चल रही थी। तत्काल डायल 112 को सूचना दी। गाड़ी आते ही आसपास के लोग भी इकट्ठे हो गए। सभी हैरान थे कि कोई महिला ऐसा भी कर सकती है। बच्चे को पॉलीथीन में डालने से पहले तौलिये में लपेटा गया था। पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर बच्चे को तत्काल जिला नागरिक अस्पताल पहुंचया। नीकू वार्ड प्रभारी डॉ. विनय ने बताया कि शुरुआत में बच्चे को सांस अटक-अटक कर आ रही थी। वजन सामान्य शिशु से कम था। उसका जन्म रात करीब डेढ़ बजे के आसपास हुआ और आठ माह का हो सकता है। गर्भनाल कटी नहीं थी। इससे जाहिर है कि डिलीवरी किसी अस्पताल में नहीं हुई।
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शहर थाना पुलिस से जांच अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि रामचंद्र की शिकायत पर अज्ञात महिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। बच्चा जहां मिला उस ओर आने-जाने वाले रास्तों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी है लेकिन देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिला। बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने बताया कि जिस भी महिला ने ऐसा किया है शर्मनाक है। पुलिस को उसका जल्द पता लगाना चाहिए। बच्चे की सेहत पर पूरी निगरानी रखेंगे।
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घर पर डिलीवरी का अंदेशा
नवजात को देखने के बाद उसकी डिलीवरी घर पर ही होने का अंदेशा जताया जा रहा है। जन्म के बाद उसकी गर्भनाल बंधी थी। डिलीवरी अस्पताल में हुई होती तो शायद उसे इस तरह फेंक पाना संभव नहीं होता। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि किस महिला का डिलीवरी से पहले टीकाकरण हुआ और प्रसव घर पर कराया गया है।
ठंडा पड़ गया था नवजात का शरीर
प्रत्यक्षदर्शी एवं बिजली कर्मचारी संघ के प्रधान धर्मवीर भाटी ने बताया कि नवजात के लावारिस हालत में मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठे हो गए। बच्चे को जब थैली से बाहर निकाला गया तो उसका शरीर ठंडा पड़ गया था। गनीमत रही कि रामचंद्र की उस पर नजर पड़ गई और समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया।

नागरिक अस्पताल में बना है पालना घर
बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने बताया कि किसी महिला को बच्चा नहीं चाहिए या वह उसका पालन-पोषण नहीं करना चाहती तो जिला नागरिक अस्पताल में पालना गृह बनाया गया है। वहां बच्चा छोड़ा जा सकता है और महिला का नाम भी गोपनीय रखा जाता है। बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है ताकि उसका भविष्य बेहतर बन सके। बाल कल्याण समिति की ओर से भी ऐसे बच्चों के लिए सरकार ने योजनाएं बनाई हैं। फिलहाल बच्चे की निगरानी जिला बाल कल्याण समिति को भी सौंपी गई है।
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