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Bhiwani News: वायु प्रदूषण पर प्रहार... भिवानी में ग्रेप-3 लागू, खनन कार्य पर पाबंदी, निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
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गांव गांव खनक में क्रशर जोन। आर्काइव
तोशाम। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच शुक्रवार को ग्रेप-3 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप खानक और खरकड़ी सोहान में खनन कार्य पर पाबंदी लग गई है, जो अगले आदेशों तक जारी रहेगी। ग्रेप-3 लागू होने से खनन कार्य बंद होने के कारण भवन निर्माण सामग्री के दामों में वृद्धि निश्चित मानी जा रही है।
एचएसआईआईडीसी के मैनेजर रविंद्र जाखड़ ने पुष्टि करते हुए कहा कि ग्रेप-3 लागू होने के कारण खनन कार्य पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।खनन कार्य पर पाबंदी तीसरी बार लागू की गई है। इससे पहले 11 नवंबर को भी ग्रेप लागू किया गया था, लेकिन 27 नवंबर को उसे हटा लिया गया था। फिर 14 दिसंबर को ग्रेप लगाया गया था और 2 जनवरी को उसे फिर से हटाया गया। अब 14 दिन बाद फिर से ग्रेप-3 लागू किया गया है।
ग्रेप लागू होने से खानक और खरकड़ी सोहान के पहाड़ों से खनन कार्य रुक गया है, जिससे क्रशर इकाइयां भी बंद हो गई हैं। इससे भवन निर्माण सामग्री के दामों में लगभग 2 रुपये प्रति टन की वृद्धि हो सकती है। शुक्रवार को क्रशर का भाव 750 रुपये प्रति टन और रोड़ी का भाव 700 रुपये प्रति टन था। अब ग्रेप लागू होने के बाद, रोड़ी का दाम करीब 900 रुपये प्रति टन और क्रशर का दाम 950 रुपये प्रति टन हो सकता है।
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आर्थिक संकट और रोजगार की समस्या
पाबंदी लंबी अवधि तक जारी रहने पर भवन निर्माण सामग्री की उपलब्धता में संकट आ सकता है, जिससे मकान निर्माण और विकास कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा लगभग 10,000 लोग खनन कार्य से जुड़े हुए हैं और कार्य बंद होने से उन्हें रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता डंपर मालिकों की है, जिनके लिए किश्तों का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, इस पाबंदी के चलते बाजार में मंदी का दौर भी आ सकता है।
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एचएसआईआईडीसी के मैनेजर रविंद्र जाखड़ ने पुष्टि करते हुए कहा कि ग्रेप-3 लागू होने के कारण खनन कार्य पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।खनन कार्य पर पाबंदी तीसरी बार लागू की गई है। इससे पहले 11 नवंबर को भी ग्रेप लागू किया गया था, लेकिन 27 नवंबर को उसे हटा लिया गया था। फिर 14 दिसंबर को ग्रेप लगाया गया था और 2 जनवरी को उसे फिर से हटाया गया। अब 14 दिन बाद फिर से ग्रेप-3 लागू किया गया है।
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ग्रेप लागू होने से खानक और खरकड़ी सोहान के पहाड़ों से खनन कार्य रुक गया है, जिससे क्रशर इकाइयां भी बंद हो गई हैं। इससे भवन निर्माण सामग्री के दामों में लगभग 2 रुपये प्रति टन की वृद्धि हो सकती है। शुक्रवार को क्रशर का भाव 750 रुपये प्रति टन और रोड़ी का भाव 700 रुपये प्रति टन था। अब ग्रेप लागू होने के बाद, रोड़ी का दाम करीब 900 रुपये प्रति टन और क्रशर का दाम 950 रुपये प्रति टन हो सकता है।
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आर्थिक संकट और रोजगार की समस्या
पाबंदी लंबी अवधि तक जारी रहने पर भवन निर्माण सामग्री की उपलब्धता में संकट आ सकता है, जिससे मकान निर्माण और विकास कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा लगभग 10,000 लोग खनन कार्य से जुड़े हुए हैं और कार्य बंद होने से उन्हें रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता डंपर मालिकों की है, जिनके लिए किश्तों का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, इस पाबंदी के चलते बाजार में मंदी का दौर भी आ सकता है।