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28 किलोमीटर लंबी सीवर और 46 किलोमीटर पेयजल लाइन का काम जल्द होगा पूरा
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घोसियान चौक क्षेत्र में नई सीवर लाइन डालने के लिए जेसीबी से खुदाई करते कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। शहर के अंदर 28 किलोमीटर लंबी नई सीवर की लाइन और करीब 46 किलोमीटर लंबी नई पेयजल लाइन डालने का काम अब जल्द पूरा होगा। अधिकतर कॉलोनियों में सीवर और पानी की लाइन डाली जा चुकी है।
इन लाइनों ने अपना काम भी करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं शहर की करीब 52 से अधिक बाहरी कॉलोनियों के साथ-साथ करीब 40 फीसदी शहर को बरसाती पानी की निकासी से भी निजात मिलेगी। अमरूत योजना के तहत शहर में 77.63 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कार्यों को अक्तूबर 2021 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से काम की रफ्तार भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से अब 31 मार्च 2022 तक प्रोजेक्ट के काम पूरा करने की मियाद बढ़ाई गई है। हालांकि अमरूत के तहत चल रहे कार्य करीब 85 से 90 फीसदी तक पूरे हो चुके हैं, मात्र दस फीसदी काम ही बचा है, जिसे पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट के कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर में बरसाती पानी की निकासी का काम पूरा हो चुका है। ड्रेनेज सिस्टम ने भी काम करना चालू कर दिया है, जबकि शहर के अंदर नया टैंक बनकर भी तैयार हो चुका है, जिसे अब पानी से भरा जा रहा है।
पिछले एक दशक से शहर का दायरा काफी बढ़ गया है। पुराने शहर की जरूरतें भी समय के साथ बढ़ने लगी, क्योंकि शहर के अंदर घनी आबादी का दबाव बढ़ा तो सीवर और पेयजल लाइनों का दायरा भी बढ़ाना पड़ा। इसी के साथ शहर के अंदर करीब 52 से अधिक कॉलोनियां भी विकसित हो गई। इनमें अधिकृत कॉलोनियों के अंदर नई सीवर और पेयजल लाइनें डालने का काम भी शुरू हुआ। हरियाणा सरकार ने नई सीवर व पेयजल लाइनें डालने का काम नगर परिषद के तहत अमरूत योजना में कराया है। इसमें सरकार ने सीधे एजेंसी के माध्यम से ही 77 करोड़ 63 लाख रुपये का भारी भरकम बजट भी खर्च किया है। एजेंसी ने शहर के अंदर नई सीवर लाइन डालने का काम करीब 75 से 80 फीसदी तक पूरा कर लिया है। नई पेयजल लाइन पर भी 72 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। करीब 46 किलोमीटर नई पेयजल लाइन भी बाहरी कॉलोनियों में डाली गई है। इनमें मुख्य पेयजल लाइन से लेकर छोटी पेयजल लाइनें भी शामिल हैं।
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दिसंबर 2018 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट का काम
नगर परिषद के तहत दिसंबर 2018 में अमरूत योजना में सीवर व पेयजल लाइन डालने का काम शुरू हुआ था। धीरे-धीरे प्रोजेक्ट में नए वाटर टैंक निर्माण का मसौदा भी शामिल किया गया। इसी के साथ कई हिस्सों में नई सीवर और पानी की लाइनें भी शामिल कर दी गई। इसी तरह प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ा तो प्रोजेक्ट का बजट भी भारी भरकम होता चला गया। पहले यह बजट 66 करोड़ के आसपास था, मगर कार्य का दायरा बढ़ा तो प्रोजेक्ट की लागत भी 77 करोड़ 63 लाख तक जा पहुंची। नया वाटर टैंक बनाने में ही करीब 18 करोड़ से अधिक का बजट खर्च हो गया। कुल बजट का आधा स्टोन वाटर प्रोजेक्ट में ही खप गया। करीब तीन साल में प्रोजेक्ट का अधिकतर काम पूरा हो गया।
अब पांच दशक तक नहीं होगी बाहरी कॉलोनियों में पानी व सीवर की दिक्कत
प्रोजेक्ट में शामिल नई सीवर व पानी की लाइनों का काम पूरा होने के बाद बाहरी कॉलोनियों में अगले पांच दशकों तक सीवर और पानी की किल्लत नहीं होगी। क्योंकि इन लाइनों को यहां की भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए डाला गया है। यहां कॉलोनी पूरी तरह से विकसित होंगी तब भी पानी की दिक्कत नहीं बनेगी, न ही सीवर ठप होंगे।
गुणवत्ता पर गंभीरता से काम करेंगे
अमरूत योजना के तहत चल रहे कार्य अब अंतिम चरण में है। मार्च तक सीवर और पेयजल लाइन डालने का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। लगातार कार्य की निगरानी की जा रही है, गुणवत्ता पर भी गंभीरता से काम कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि तय समय में काम पूरा करा इसका लोगों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
-सुरेंद्र सांगवान, म्यूनिसिपल इंजीनियर, नगर परिषद भिवानी।
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भिवानी। शहर के अंदर 28 किलोमीटर लंबी नई सीवर की लाइन और करीब 46 किलोमीटर लंबी नई पेयजल लाइन डालने का काम अब जल्द पूरा होगा। अधिकतर कॉलोनियों में सीवर और पानी की लाइन डाली जा चुकी है।
इन लाइनों ने अपना काम भी करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं शहर की करीब 52 से अधिक बाहरी कॉलोनियों के साथ-साथ करीब 40 फीसदी शहर को बरसाती पानी की निकासी से भी निजात मिलेगी। अमरूत योजना के तहत शहर में 77.63 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। प्रोजेक्ट के तहत चल रहे कार्यों को अक्तूबर 2021 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से काम की रफ्तार भी धीमी हो गई। जिसकी वजह से अब 31 मार्च 2022 तक प्रोजेक्ट के काम पूरा करने की मियाद बढ़ाई गई है। हालांकि अमरूत के तहत चल रहे कार्य करीब 85 से 90 फीसदी तक पूरे हो चुके हैं, मात्र दस फीसदी काम ही बचा है, जिसे पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट के कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर में बरसाती पानी की निकासी का काम पूरा हो चुका है। ड्रेनेज सिस्टम ने भी काम करना चालू कर दिया है, जबकि शहर के अंदर नया टैंक बनकर भी तैयार हो चुका है, जिसे अब पानी से भरा जा रहा है।
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पिछले एक दशक से शहर का दायरा काफी बढ़ गया है। पुराने शहर की जरूरतें भी समय के साथ बढ़ने लगी, क्योंकि शहर के अंदर घनी आबादी का दबाव बढ़ा तो सीवर और पेयजल लाइनों का दायरा भी बढ़ाना पड़ा। इसी के साथ शहर के अंदर करीब 52 से अधिक कॉलोनियां भी विकसित हो गई। इनमें अधिकृत कॉलोनियों के अंदर नई सीवर और पेयजल लाइनें डालने का काम भी शुरू हुआ। हरियाणा सरकार ने नई सीवर व पेयजल लाइनें डालने का काम नगर परिषद के तहत अमरूत योजना में कराया है। इसमें सरकार ने सीधे एजेंसी के माध्यम से ही 77 करोड़ 63 लाख रुपये का भारी भरकम बजट भी खर्च किया है। एजेंसी ने शहर के अंदर नई सीवर लाइन डालने का काम करीब 75 से 80 फीसदी तक पूरा कर लिया है। नई पेयजल लाइन पर भी 72 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। करीब 46 किलोमीटर नई पेयजल लाइन भी बाहरी कॉलोनियों में डाली गई है। इनमें मुख्य पेयजल लाइन से लेकर छोटी पेयजल लाइनें भी शामिल हैं।
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दिसंबर 2018 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट का काम
नगर परिषद के तहत दिसंबर 2018 में अमरूत योजना में सीवर व पेयजल लाइन डालने का काम शुरू हुआ था। धीरे-धीरे प्रोजेक्ट में नए वाटर टैंक निर्माण का मसौदा भी शामिल किया गया। इसी के साथ कई हिस्सों में नई सीवर और पानी की लाइनें भी शामिल कर दी गई। इसी तरह प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ा तो प्रोजेक्ट का बजट भी भारी भरकम होता चला गया। पहले यह बजट 66 करोड़ के आसपास था, मगर कार्य का दायरा बढ़ा तो प्रोजेक्ट की लागत भी 77 करोड़ 63 लाख तक जा पहुंची। नया वाटर टैंक बनाने में ही करीब 18 करोड़ से अधिक का बजट खर्च हो गया। कुल बजट का आधा स्टोन वाटर प्रोजेक्ट में ही खप गया। करीब तीन साल में प्रोजेक्ट का अधिकतर काम पूरा हो गया।
अब पांच दशक तक नहीं होगी बाहरी कॉलोनियों में पानी व सीवर की दिक्कत
प्रोजेक्ट में शामिल नई सीवर व पानी की लाइनों का काम पूरा होने के बाद बाहरी कॉलोनियों में अगले पांच दशकों तक सीवर और पानी की किल्लत नहीं होगी। क्योंकि इन लाइनों को यहां की भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए डाला गया है। यहां कॉलोनी पूरी तरह से विकसित होंगी तब भी पानी की दिक्कत नहीं बनेगी, न ही सीवर ठप होंगे।
गुणवत्ता पर गंभीरता से काम करेंगे
अमरूत योजना के तहत चल रहे कार्य अब अंतिम चरण में है। मार्च तक सीवर और पेयजल लाइन डालने का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। लगातार कार्य की निगरानी की जा रही है, गुणवत्ता पर भी गंभीरता से काम कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि तय समय में काम पूरा करा इसका लोगों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
-सुरेंद्र सांगवान, म्यूनिसिपल इंजीनियर, नगर परिषद भिवानी।