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स्वच्छता सर्वे : 66 रैंक सुधार के साथ 166वें स्थान पर भिवानी
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रामबाग के पास लगे कूड़े के ढेर में बैठे लावारिस पशु। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : Bhiwani
शहर वासियों के लिए अच्छी खबर है। स्वच्छता में साल दर साल भिवानी की रैंकिंग में सुधार हो रहा है यानी शहर अब स्वच्छता होता जा रहा है। इस बार तो भिवानी शहर ने स्वच्छता में लंबी छलांग लगाई है। 66 रैंकिंग के सुधार के साथ भिवानी देशभर के 382 शहरों पर हुए सर्वे में 166वें स्थान पर रहा। इसका श्रेय जिला प्रशासन, नप चेयरमैन, अधिकारियों, कर्मचारियों, पार्षदों के साथ-साथ आमजन का स्वयं स्वच्छता के प्रति जागरूक होने को जाता है। इस बार भिवानी को छह हजार में से 2728.86 अंक मिले हैं। 2020 के सर्वे की रैंकिंग में भले ही बड़ा सुधार हुआ है मगर वर्तमान स्थिति खराब है। शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है और जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं।
वर्ष 2017 में पिछड़ने के बाद से स्वच्छता के मामले में भिवानी लगातार सुधार की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 2017 में हुए पहले स्वच्छता सर्वे में भिवानी 345वें स्थान के साथ सबसे गंदे शहरों में शुमार था। मगर उसके बाद से लगातार सुधार जारी है। इस बार तो 66 रैंकिंग की छलांग लगाई है। यानी 232 से सीधे 166वें स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में 105 रैंकिंग की छलांग लगाई थी जब 345 से सीधे 240वें स्थान पर पहुंचा था। इस बार हरियाणा के स्वच्छ शहरों में भिवानी की रैंकिंग में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष आठवें से 13वें स्थान पर खिसकने वाले भिवानी शहर ने इस बार दो अंक के सुधार के साथ 11वां स्थान हासिल किया है।
पिछले वर्ष खर्च हुआ मोटा बजट, इस बार मिला परिणाम
पिछले वर्ष तत्कालीन उपायुक्त डॉ. अंशज सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन और नगर परिषद अधिकारियों, पदाधिकारियों ने स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने के लिए खूब प्रयास किए। टॉप-100 में आने के लिए 25 से 30 लाख खर्च किए। सभी शौचालयों की सफाई करवाने के अलावा शहर में जगह-जगह छोटे-बड़े नए डस्टबिन रखवाए। शहर के सभी सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भवनों, ओवरब्रिज आदि पर स्वच्छता का संदेश देते स्लोगन लिखवाए। शहरभर में होर्डिंग-बैनर लगवा स्वच्छता का संदेश दिया। उस समय तो स्वच्छता रैंकिंग में ज्यादा सुधार नहीं हुआ और देशभर में 232वें स्थान पर भिवानी रहा। मगर पिछले वर्ष किए प्रयासों का फायदा 2020 सर्वेक्षण में मिला।
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6000 अंकों के आधार पर हुआ सर्वेक्षण
देश के एक से 10 लाख तक की आबादी के 382 शहरों पर सर्वेक्षण हुआ था। जिनमें कुल अंक छह हजार निर्धारित किए गए थे। इसमें 1500 अंक आमजन की फीडबैक पर निर्भर थे तो 1500 अंक नगर परिषद की ओर से शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं डोर-टू डोर कचरा उठान जैसी सेवाओं के। 1500 अंक स्वच्छता सर्वे तहत आने वाली केंद्रीय टीम के निरीक्षण के निर्धारित किए गए थे। इसके अलावा 1500 अंक कचरा निस्तारण, ओडीएफ, ओडीएफ प्लस जैसी सुविधाओं के थे।
रैंकिंग में सुधार मगर व्यवस्था बिगड़ी
स्वच्छता रैंकिंग में भले ही बड़ा सुधार हुआ हो मगर शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। इसका कारण है नप में सफाई कर्मियों की कमी और सफाई का ठेका नहीं हुआ। मुख्यालय की ओर से रोक के बाद आधे शहर की सफाई का ठेका खत्म होने के बाद दोबारा नहीं हुआ। नप के कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं और नई भर्ती नहीं हो रही। ऐसे में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। शहर के पॉश क्षेत्र कहे जाने वाले सेक्टर 13, 23, मंडी टाउनशिप, विकास नगर, विजय नगर में ही कचरे के ढेर लगे हैं। बाकी जगह भी हालत खराब है।
अब तक की रैंकिंग
वर्ष रैंकिंग
2017 345
2018 240
2019 232
2020 166
वर्जन-
यह खुशी की बात है कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है। अब इसे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। शहर के लिए जल्द ही 15 टिपर और खरीदे जाएंगे। जिसके बाद 31 टिपर हो जाएंगे जो डोर-टू डोर जाकर कचरा एकत्रित करेंगे। इसके अलावा शहर को छह से आठ जोन में बांटकर सफाई का ठेका दिया जाएगा। शहर को पहले टॉप 100 और फिर टॉप 10 में लाने का प्रयास किया जाएगा।
- रण सिंह यादव, चेयरमैन नगर परिषद
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वर्ष 2017 में पिछड़ने के बाद से स्वच्छता के मामले में भिवानी लगातार सुधार की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 2017 में हुए पहले स्वच्छता सर्वे में भिवानी 345वें स्थान के साथ सबसे गंदे शहरों में शुमार था। मगर उसके बाद से लगातार सुधार जारी है। इस बार तो 66 रैंकिंग की छलांग लगाई है। यानी 232 से सीधे 166वें स्थान पर पहुंच गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में 105 रैंकिंग की छलांग लगाई थी जब 345 से सीधे 240वें स्थान पर पहुंचा था। इस बार हरियाणा के स्वच्छ शहरों में भिवानी की रैंकिंग में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष आठवें से 13वें स्थान पर खिसकने वाले भिवानी शहर ने इस बार दो अंक के सुधार के साथ 11वां स्थान हासिल किया है।
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पिछले वर्ष खर्च हुआ मोटा बजट, इस बार मिला परिणाम
पिछले वर्ष तत्कालीन उपायुक्त डॉ. अंशज सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन और नगर परिषद अधिकारियों, पदाधिकारियों ने स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने के लिए खूब प्रयास किए। टॉप-100 में आने के लिए 25 से 30 लाख खर्च किए। सभी शौचालयों की सफाई करवाने के अलावा शहर में जगह-जगह छोटे-बड़े नए डस्टबिन रखवाए। शहर के सभी सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भवनों, ओवरब्रिज आदि पर स्वच्छता का संदेश देते स्लोगन लिखवाए। शहरभर में होर्डिंग-बैनर लगवा स्वच्छता का संदेश दिया। उस समय तो स्वच्छता रैंकिंग में ज्यादा सुधार नहीं हुआ और देशभर में 232वें स्थान पर भिवानी रहा। मगर पिछले वर्ष किए प्रयासों का फायदा 2020 सर्वेक्षण में मिला।
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6000 अंकों के आधार पर हुआ सर्वेक्षण
देश के एक से 10 लाख तक की आबादी के 382 शहरों पर सर्वेक्षण हुआ था। जिनमें कुल अंक छह हजार निर्धारित किए गए थे। इसमें 1500 अंक आमजन की फीडबैक पर निर्भर थे तो 1500 अंक नगर परिषद की ओर से शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं डोर-टू डोर कचरा उठान जैसी सेवाओं के। 1500 अंक स्वच्छता सर्वे तहत आने वाली केंद्रीय टीम के निरीक्षण के निर्धारित किए गए थे। इसके अलावा 1500 अंक कचरा निस्तारण, ओडीएफ, ओडीएफ प्लस जैसी सुविधाओं के थे।
रैंकिंग में सुधार मगर व्यवस्था बिगड़ी
स्वच्छता रैंकिंग में भले ही बड़ा सुधार हुआ हो मगर शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। इसका कारण है नप में सफाई कर्मियों की कमी और सफाई का ठेका नहीं हुआ। मुख्यालय की ओर से रोक के बाद आधे शहर की सफाई का ठेका खत्म होने के बाद दोबारा नहीं हुआ। नप के कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं और नई भर्ती नहीं हो रही। ऐसे में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। शहर के पॉश क्षेत्र कहे जाने वाले सेक्टर 13, 23, मंडी टाउनशिप, विकास नगर, विजय नगर में ही कचरे के ढेर लगे हैं। बाकी जगह भी हालत खराब है।
अब तक की रैंकिंग
वर्ष रैंकिंग
2017 345
2018 240
2019 232
2020 166
वर्जन-
यह खुशी की बात है कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है। अब इसे और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। शहर के लिए जल्द ही 15 टिपर और खरीदे जाएंगे। जिसके बाद 31 टिपर हो जाएंगे जो डोर-टू डोर जाकर कचरा एकत्रित करेंगे। इसके अलावा शहर को छह से आठ जोन में बांटकर सफाई का ठेका दिया जाएगा। शहर को पहले टॉप 100 और फिर टॉप 10 में लाने का प्रयास किया जाएगा।
- रण सिंह यादव, चेयरमैन नगर परिषद