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Bhiwani News: जिले के 20 गांवों में जलभराव, पांच गांवों के जलघर और टैंक पानी में डूबे
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बरसाती जलभराव में डूबा दांग खुर्द का मुख्य जलघर।
भिवानी। पिछले करीब एक माह से जिले के 20 गांवों में बरसाती जलभराव बना हुआ है। करीब पांच गांवों के जलघर पानी में डूबे हैं और टैंकों के अंदर भी प्रदूषित पानी जमा हो गया है। प्रभावित गांवों के जोहड़ों का गंदा पानी भी टैंकों तक पहुंच चुका है जिससे पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बरसाती पानी की निकासी ड्रेनों की जगह नहरों में कराई जा रही है।
गांव धनाना, दांग खुर्द, बीरन, सागवान सहित कई गांवों में बारिश का पानी सार्वजनिक स्थलों और आबादी क्षेत्र में जमा है। जलघर परिसर में ढाई से तीन फीट पानी भरा हुआ है जिसके चलते टैंकों का पानी प्रदूषित हो चुका है। टैंकों के पानी का रंग काला व बदबूदार हो गया है। फिलहाल इन गांवों में जलघर व बूस्टर टैंक डूबने की वजह से पिछले एक पखवाड़े से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है और टैंकरों के सहारे ही पेयजल आपूर्ति का काम चल रहा है। वहीं आबादी क्षेत्र में हैंडपंप का पानी भी स्वाद बदल चुका है।
टैंकों के अंदर दूषित पानी के साथ पहुंच रही मिट्टी
ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों के टैंकों की लंबे अरसे से सफाई नहीं कराई गई थी। जलभराव के बाद प्रदूषित पानी के साथ काफी मात्रा में मिट्टी भी टैंकों तक पहुंच गई जिससे टैंकों की हालत और भी खराब हो गई है। इन टैंकों की भंडारण क्षमता घट गई है जबकि नहरी चैनलों से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का पानी टैंकों तक पहुंच रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बरसाती पानी की निकासी लगातार ड्रेनों में कराई जा रही है। जिन क्षेत्रों में नहर के अंदर जलभराव का पानी डाला जा रहा है उनके जलघर तक जाने वाले आउटलेट बंद कराए गए हैं। जलघरों तक स्वच्छ नहरी पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है। - जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
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गांव धनाना, दांग खुर्द, बीरन, सागवान सहित कई गांवों में बारिश का पानी सार्वजनिक स्थलों और आबादी क्षेत्र में जमा है। जलघर परिसर में ढाई से तीन फीट पानी भरा हुआ है जिसके चलते टैंकों का पानी प्रदूषित हो चुका है। टैंकों के पानी का रंग काला व बदबूदार हो गया है। फिलहाल इन गांवों में जलघर व बूस्टर टैंक डूबने की वजह से पिछले एक पखवाड़े से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है और टैंकरों के सहारे ही पेयजल आपूर्ति का काम चल रहा है। वहीं आबादी क्षेत्र में हैंडपंप का पानी भी स्वाद बदल चुका है।
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टैंकों के अंदर दूषित पानी के साथ पहुंच रही मिट्टी
ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों के टैंकों की लंबे अरसे से सफाई नहीं कराई गई थी। जलभराव के बाद प्रदूषित पानी के साथ काफी मात्रा में मिट्टी भी टैंकों तक पहुंच गई जिससे टैंकों की हालत और भी खराब हो गई है। इन टैंकों की भंडारण क्षमता घट गई है जबकि नहरी चैनलों से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का पानी टैंकों तक पहुंच रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बरसाती पानी की निकासी लगातार ड्रेनों में कराई जा रही है। जिन क्षेत्रों में नहर के अंदर जलभराव का पानी डाला जा रहा है उनके जलघर तक जाने वाले आउटलेट बंद कराए गए हैं। जलघरों तक स्वच्छ नहरी पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है। - जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग