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Bhiwani News: मंडी में रोजाना पहुंच रहे 20 से 25 किसान, दो हजार लग रहे बाजरे के दाम
Sat, 16 Sep 2023 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 16 Sep 2023 12:00 AM IST
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मंडी में रोजाना पहुंच रहे 20 से 25 किसान, दो हजार लग रहे बाजरे के दाम
ग्राउंड रिपोर्ट
- सरकार के खरीद का शेड्यूल नहीं हुआ जारी, अगली फसल की बिजाई की किसान कर रहे तैयारी
- एमएसपी से काफी कम भाव की प्राइवेट लगा रहे बोली, रोजाना 250 क्विंटल से अधिक की आवक
संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी। जिला मुख्यालय की मंडी में किसानों के बाजरे की आवक शुरू हो गई है। रोजाना ही मंडी में 20 से 25 किसान बाजरा की फसल लेकर आ रहे हैं, मगर अभी तक सरकार की तरफ से एमएसपी पर खरीद का कोई शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। किसान बाजरा की फसल बेचकर खेत में अगली फसल के लिए बीज, खाद खरीद की तैयारी में जुटे हैं। मंडी में आने वाले किसानों को दो हजार से ज्यादा बाजरे का भाव नहीं मिल रहा है जबकि सरकार की तरफ से इस बार बाजरे का एमएसपी करीब 2500 रुपये जारी किया है।
मंडी में खरीद को लेकर भी अभी कोई पुख्ता तैयारी तक नहीं हैं वहीं खरीद एजेंसियों का भी कोई अता पता नहीं है। भिवानी जिले में एक लाख 62 हजार किसानों ने अपनी खरीफ फसल का रजिस्ट्रेशन मेरी फसल मेरा ब्योरा पर कराया हुआ है। जिले में एक लाख एकड़ में बाजरा बिजाई किया गया है, जबकि डेढ़ लाख एकड़ में कपास की बिजाई भी इस बार किसान कर चुके हैं। लेकिन मौसम की बेरुखी और मानसून की कमी से किसानों को फसल उत्पादन में भी दिक्कतें आ रही हैं। जिन किसानों ने बाजरा की अगेती बिजाई की थी, वे किसान अब मंडी का रुख कर रहे हैं। लेकिन एमएसपी के बावजूद किसानों की मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो रही है।
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मैं शुक्रवार सुबह ट्रैक्टर-ट्राॅली में 60 क्विंटल बाजरा लेकर मंडी में आया हूं। आढ़ती से बात हुई तो उसने बताया कि दो हजार रुपये प्रति क्विंटल बाजरा बिकेगा। मैंने अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन भी कराया था। मुझे अगली फसल बिजाई और पैसों की जरूरत है। इसलिए फसल बेचने पर मजबूर हूं। मुझे नहीं लगता कि सरकार खरीद शुरू कर देगी तो भी बाजरा सरकारी भाव बिक पाएगा।
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- ओमबीर सिंह कुहाड़, किसान।
फोटो: 03
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हमारे भाइयों का साझे में खेत है। बाजरे की अच्छी फसल थी, मगर मंडी आने के बाद पता चला कि यहां तो बाजरे का भाव ही दो हजार से ऊपर नहीं है। जबकि एमएसपी 2500 होने की बात कही जा रही है। प्रति क्विंटल पांच सौ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। प्राइवेट बोली में भी बाजरे का ज्यादा भाव नहीं मिल रहा है। कब तक सरकारी खरीद होगी कब तक फसल बिकेगी, यह भी निश्चित नहीं है। मुझे अगली फसल बिजाई भी करनी है, ज्यादा दिन इंतजार नहीं कर सकते।
-बिजेंद्र सिंह, रेवाड़ीखेड़ा, किसान।
फोटो: 04
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मंडी में अभी तक सरकार की तरफ से बाजरा खरीद का शेड्यूल नहीं आया है। मंडी में जो किसान पहुंच रहे हैं, उनकी फसल की प्राइवेट बोली कराई जा रही है। मंडी में व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं, जैसे ही शेड्यूल आएगा, संबंधित एजेंसियों के माध्यम से बाजरा की खरीद कराई जाएगी।
-हीरालाल, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड, भिवानी।
ग्राउंड रिपोर्ट
- सरकार के खरीद का शेड्यूल नहीं हुआ जारी, अगली फसल की बिजाई की किसान कर रहे तैयारी
- एमएसपी से काफी कम भाव की प्राइवेट लगा रहे बोली, रोजाना 250 क्विंटल से अधिक की आवक
संवाद न्यूज एजेंसी
भिवानी। जिला मुख्यालय की मंडी में किसानों के बाजरे की आवक शुरू हो गई है। रोजाना ही मंडी में 20 से 25 किसान बाजरा की फसल लेकर आ रहे हैं, मगर अभी तक सरकार की तरफ से एमएसपी पर खरीद का कोई शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। किसान बाजरा की फसल बेचकर खेत में अगली फसल के लिए बीज, खाद खरीद की तैयारी में जुटे हैं। मंडी में आने वाले किसानों को दो हजार से ज्यादा बाजरे का भाव नहीं मिल रहा है जबकि सरकार की तरफ से इस बार बाजरे का एमएसपी करीब 2500 रुपये जारी किया है।
मंडी में खरीद को लेकर भी अभी कोई पुख्ता तैयारी तक नहीं हैं वहीं खरीद एजेंसियों का भी कोई अता पता नहीं है। भिवानी जिले में एक लाख 62 हजार किसानों ने अपनी खरीफ फसल का रजिस्ट्रेशन मेरी फसल मेरा ब्योरा पर कराया हुआ है। जिले में एक लाख एकड़ में बाजरा बिजाई किया गया है, जबकि डेढ़ लाख एकड़ में कपास की बिजाई भी इस बार किसान कर चुके हैं। लेकिन मौसम की बेरुखी और मानसून की कमी से किसानों को फसल उत्पादन में भी दिक्कतें आ रही हैं। जिन किसानों ने बाजरा की अगेती बिजाई की थी, वे किसान अब मंडी का रुख कर रहे हैं। लेकिन एमएसपी के बावजूद किसानों की मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो रही है।
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मैं शुक्रवार सुबह ट्रैक्टर-ट्राॅली में 60 क्विंटल बाजरा लेकर मंडी में आया हूं। आढ़ती से बात हुई तो उसने बताया कि दो हजार रुपये प्रति क्विंटल बाजरा बिकेगा। मैंने अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन भी कराया था। मुझे अगली फसल बिजाई और पैसों की जरूरत है। इसलिए फसल बेचने पर मजबूर हूं। मुझे नहीं लगता कि सरकार खरीद शुरू कर देगी तो भी बाजरा सरकारी भाव बिक पाएगा।
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- ओमबीर सिंह कुहाड़, किसान।
फोटो: 03
हमारे भाइयों का साझे में खेत है। बाजरे की अच्छी फसल थी, मगर मंडी आने के बाद पता चला कि यहां तो बाजरे का भाव ही दो हजार से ऊपर नहीं है। जबकि एमएसपी 2500 होने की बात कही जा रही है। प्रति क्विंटल पांच सौ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। प्राइवेट बोली में भी बाजरे का ज्यादा भाव नहीं मिल रहा है। कब तक सरकारी खरीद होगी कब तक फसल बिकेगी, यह भी निश्चित नहीं है। मुझे अगली फसल बिजाई भी करनी है, ज्यादा दिन इंतजार नहीं कर सकते।
-बिजेंद्र सिंह, रेवाड़ीखेड़ा, किसान।
फोटो: 04
मंडी में अभी तक सरकार की तरफ से बाजरा खरीद का शेड्यूल नहीं आया है। मंडी में जो किसान पहुंच रहे हैं, उनकी फसल की प्राइवेट बोली कराई जा रही है। मंडी में व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं, जैसे ही शेड्यूल आएगा, संबंधित एजेंसियों के माध्यम से बाजरा की खरीद कराई जाएगी।
-हीरालाल, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड, भिवानी।