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अधिकतर जगह गलत लगाए जा रहे इंजेक्शन, पशुओं में बीमारियों का खतरा
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। पशुओं को खतरनाक बीमारी गलघोंटू से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है। मगर अभियान में खानापूर्ति की जा रही है। नियमानुसार पशु चिकित्सक, वीएलडीए या अन्य कोई ट्रेड गोपाल ही इंजेक्शन लगा सकते हैं। मगर गांवों में अभियान के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पशुओं को इंजेक्शन लगा रहे हैं। इससे ना केवल पशुओं के स्वास्थ्य को खतरा है बल्कि अभियान की सफलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पशुपालन विभाग की ओर से जिले के पालतू पशुओं खासकर दुधारू भैंसों को गलघोंटू जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए वैक्सिनेशन का अभियान शुरू किया हुआ है। अभियान एक जून से शुरू किया गया था। पहले एक माह तक अभियान चलाना था, मगर अब विभाग के उच्च अधिकारियों ने सभी पशुओं को यह वैक्सिन लगाने का निर्णय लिया है। इसी कारण लगातार दूसरे महीने यह अभियान चल रहा है। जिला अधिकारियों की मानें तो 80 फीसदी तक पशुओं को गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
मगर अब अभियान पर सवाल खड़े होने लगे हैं। दरअसल नियमानुसार सिर्फ पशु चिकित्सक, वीएलडीए या ट्रेंड गोपाल ही वैक्सीनेशन कर सकते हैं। मगर कुछ गांवों में इनकी बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, स्वीपर पशुओं को इंजेक्शन लगा रहे हैं जिससे न केवल अभियान की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है।
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क्यों जरूरी है वैक्सीनेशन
गलघोंटू एक खतरनाक बीमारी है जो ज्यादातर जानलेवा साबित होती है। यह एक बैक्टिरियल बीमारी है जो एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। पशुओं को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है। विभाग की ओर से साल में दो बार गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेेशन अभियान चलाया जाता है। बरसाती मौसम से पहले यह अभियान चलाया जाता है।
पशुओं में टीकाकरण के प्रति संशय
पशु पालक गलघोंटू बीमारी की वैक्सीनेशन को लेकर असमंजस में है। दरअसल उनके मन में डर है कि इंजेक्शन के बाद पशु बीमार होते हैं। इस बारे में उप निदेशक डॉ. जय सिंह ने बताया कि पशु का बीमार होना मतलब दवाई ने असर किया है। वह एक-दो दिन में स्वयं ही ठीक हो जाएगा। घबराने की जरूरत नहीं। मगर वैक्सीन के बाद पशु गलघोंटू जैसी खतरनाक बीमारी से सुरक्षित हो जाता है।
बीमारी के लक्षण:
* पशु को 107 डिग्री तक बुखार होना
* मुंह से झाग आना
* चारा चरना छोड़ना
* सुस्त रहना
वर्जन ::::
गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन का अभियान चल रहा है और 80 प्रतिशत पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। विभाग की ओर से यह नि:शुल्क लगवाई जा रही है और सभी पशुपालकों को यह लगवानी चाहिए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, स्वीपर वैक्सीन नहीं लगा सकते। अगर ऐसा है तो उस क्षेत्र से संबंधित चिकित्सक जिम्मेवार है। संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी।
-डा. जय सिंह, उप निदेशक पशु पालन विभाग
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भिवानी। पशुओं को खतरनाक बीमारी गलघोंटू से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है। मगर अभियान में खानापूर्ति की जा रही है। नियमानुसार पशु चिकित्सक, वीएलडीए या अन्य कोई ट्रेड गोपाल ही इंजेक्शन लगा सकते हैं। मगर गांवों में अभियान के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पशुओं को इंजेक्शन लगा रहे हैं। इससे ना केवल पशुओं के स्वास्थ्य को खतरा है बल्कि अभियान की सफलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पशुपालन विभाग की ओर से जिले के पालतू पशुओं खासकर दुधारू भैंसों को गलघोंटू जैसी खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए वैक्सिनेशन का अभियान शुरू किया हुआ है। अभियान एक जून से शुरू किया गया था। पहले एक माह तक अभियान चलाना था, मगर अब विभाग के उच्च अधिकारियों ने सभी पशुओं को यह वैक्सिन लगाने का निर्णय लिया है। इसी कारण लगातार दूसरे महीने यह अभियान चल रहा है। जिला अधिकारियों की मानें तो 80 फीसदी तक पशुओं को गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
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मगर अब अभियान पर सवाल खड़े होने लगे हैं। दरअसल नियमानुसार सिर्फ पशु चिकित्सक, वीएलडीए या ट्रेंड गोपाल ही वैक्सीनेशन कर सकते हैं। मगर कुछ गांवों में इनकी बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, स्वीपर पशुओं को इंजेक्शन लगा रहे हैं जिससे न केवल अभियान की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है।
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क्यों जरूरी है वैक्सीनेशन
गलघोंटू एक खतरनाक बीमारी है जो ज्यादातर जानलेवा साबित होती है। यह एक बैक्टिरियल बीमारी है जो एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। पशुओं को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है। विभाग की ओर से साल में दो बार गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेेशन अभियान चलाया जाता है। बरसाती मौसम से पहले यह अभियान चलाया जाता है।
पशुओं में टीकाकरण के प्रति संशय
पशु पालक गलघोंटू बीमारी की वैक्सीनेशन को लेकर असमंजस में है। दरअसल उनके मन में डर है कि इंजेक्शन के बाद पशु बीमार होते हैं। इस बारे में उप निदेशक डॉ. जय सिंह ने बताया कि पशु का बीमार होना मतलब दवाई ने असर किया है। वह एक-दो दिन में स्वयं ही ठीक हो जाएगा। घबराने की जरूरत नहीं। मगर वैक्सीन के बाद पशु गलघोंटू जैसी खतरनाक बीमारी से सुरक्षित हो जाता है।
बीमारी के लक्षण:
* पशु को 107 डिग्री तक बुखार होना
* मुंह से झाग आना
* चारा चरना छोड़ना
* सुस्त रहना
वर्जन ::::
गलघोंटू बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन का अभियान चल रहा है और 80 प्रतिशत पशुओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। विभाग की ओर से यह नि:शुल्क लगवाई जा रही है और सभी पशुपालकों को यह लगवानी चाहिए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, स्वीपर वैक्सीन नहीं लगा सकते। अगर ऐसा है तो उस क्षेत्र से संबंधित चिकित्सक जिम्मेवार है। संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी।
-डा. जय सिंह, उप निदेशक पशु पालन विभाग