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पशु क्रूरता के आरोपी व साथियों को पीटा
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:20 AM IST
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पुलिस की मौजूदगी में पशु क्रूरता के आरोपी और उनके साथियों को लोगों ने पीटा
भिवानी। करीब दो महीने पहले 19 ऊंटों के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपी और उनके सहयोगियों को कुछ लोगों ने बुरी तरीके से पीटा। शनिवार रात को खरक गोशाला के पास हुई पिटाई की घटना के बाद रविवार सुबह सभी इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन हमलावरों के खौफ से बिना इलाज कराए चले गए।
गौरतलब है कि सभी आरोपी और उनके कुछ सहयोगी 15 सितंबर से पुलिस कस्टडी में रखे अपने 19 ऊंट सुपुर्ददारी पर छुड़वाने के लिए बागपत (उत्तर प्रदेश) से भिवानी आए हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर भिवानी पुलिस से तो ऊंटों की सुपुर्ददारी की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन इसके फौरन बाद राजस्थान पुलिस ने यह कहते हुए ऊंट अपने कब्जे में ले लिये कि 13 नवंबर को इन लोगों के खिलाफ नवलगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज है।
यह मामला उस वक्त पेचीदा बन गया, जब बीती रात कुछ लोगों ने आरोपियों व उनके सहयोगियों के साथ मारपीट की। यासीन ने बताया कि रात को पुलिस की मौजूदगी में उन्हें डंडों से पीटा गया। इस दौरान पुलिस ने कुछ नहीं किया। जान बचाकर बड़ी मुश्किल भागे। मेरे चार-पांच साथियों को चोट भी लगी है। इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन इसी दौरान सूचना मिली कि हमलावर अस्पताल में भी आ सकते हैं, इसके बाद वे लोग बिना इलाज कराए ही लौट आए।
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आरोपियों के वकील ने पुलिस पर उठाए सवाल
आरोपी पक्ष के वकील केके भाटिया का कहना है कि ऊंटों की सुपुर्ददारी राजस्थान पुलिस की अर्जी कोर्ट में विचाराधीन है, इससे पहले पुलिस ने ऊंट अपने कब्जे में क्यों लिये। सोमवार तक पुलिस को इंतजार करना चाहिए था। जबकि, इस मामले में गऊ ज्ञान फाउंडेशन की एप्लीकेशन भी कोर्ट खारिज कर चुकी है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भिवानी में दर्ज मामले में हाई कोर्ट पशु क्रूरता का केस मानने से इनकार कर चुका है। उनके मुवक्किल के पास राजस्थान के मेला प्रशासन की ओर से काटी रसीद भी है। मेला प्रशासन को 2015 के एक्ट के बारे में उस वक्त स्पष्ट करना चाहिए था कि ऊंटों को राजस्थान की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जा सकता है। उनके मुवक्किल को एक्ट के बारे में जानकारी नहीं थी।
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राजस्थान पुलिस की सफाई, ऊंटों को रास्ते से जब्त किया
राजस्थान के झुंझनू जिले के नलवगढ़ थाना के जांच अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने ऊंटों को रास्ते से ले जाते हुए जब्त किया है, सुपुर्ददारी पर नहीं लिया है। 13 नवंबर को उनके थाने में दर्ज मामले में ऊंटों को जब्त किया है। यह मामला गउ ज्ञान फाउंडेशन संस्था की ओर से दर्ज कराया गया है। इस सिलसिले में वांछित 13 में से चार को गिरफ्तार भी किया है। बाकी की पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों व उनके सहयोगियों को पीटने के आरोप बेबुनियाद हैं।
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भिवानी। करीब दो महीने पहले 19 ऊंटों के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपी और उनके सहयोगियों को कुछ लोगों ने बुरी तरीके से पीटा। शनिवार रात को खरक गोशाला के पास हुई पिटाई की घटना के बाद रविवार सुबह सभी इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन हमलावरों के खौफ से बिना इलाज कराए चले गए।
गौरतलब है कि सभी आरोपी और उनके कुछ सहयोगी 15 सितंबर से पुलिस कस्टडी में रखे अपने 19 ऊंट सुपुर्ददारी पर छुड़वाने के लिए बागपत (उत्तर प्रदेश) से भिवानी आए हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर भिवानी पुलिस से तो ऊंटों की सुपुर्ददारी की प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन इसके फौरन बाद राजस्थान पुलिस ने यह कहते हुए ऊंट अपने कब्जे में ले लिये कि 13 नवंबर को इन लोगों के खिलाफ नवलगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज है।
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यह मामला उस वक्त पेचीदा बन गया, जब बीती रात कुछ लोगों ने आरोपियों व उनके सहयोगियों के साथ मारपीट की। यासीन ने बताया कि रात को पुलिस की मौजूदगी में उन्हें डंडों से पीटा गया। इस दौरान पुलिस ने कुछ नहीं किया। जान बचाकर बड़ी मुश्किल भागे। मेरे चार-पांच साथियों को चोट भी लगी है। इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन इसी दौरान सूचना मिली कि हमलावर अस्पताल में भी आ सकते हैं, इसके बाद वे लोग बिना इलाज कराए ही लौट आए।
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आरोपियों के वकील ने पुलिस पर उठाए सवाल
आरोपी पक्ष के वकील केके भाटिया का कहना है कि ऊंटों की सुपुर्ददारी राजस्थान पुलिस की अर्जी कोर्ट में विचाराधीन है, इससे पहले पुलिस ने ऊंट अपने कब्जे में क्यों लिये। सोमवार तक पुलिस को इंतजार करना चाहिए था। जबकि, इस मामले में गऊ ज्ञान फाउंडेशन की एप्लीकेशन भी कोर्ट खारिज कर चुकी है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भिवानी में दर्ज मामले में हाई कोर्ट पशु क्रूरता का केस मानने से इनकार कर चुका है। उनके मुवक्किल के पास राजस्थान के मेला प्रशासन की ओर से काटी रसीद भी है। मेला प्रशासन को 2015 के एक्ट के बारे में उस वक्त स्पष्ट करना चाहिए था कि ऊंटों को राजस्थान की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जा सकता है। उनके मुवक्किल को एक्ट के बारे में जानकारी नहीं थी।
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राजस्थान पुलिस की सफाई, ऊंटों को रास्ते से जब्त किया
राजस्थान के झुंझनू जिले के नलवगढ़ थाना के जांच अधिकारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने ऊंटों को रास्ते से ले जाते हुए जब्त किया है, सुपुर्ददारी पर नहीं लिया है। 13 नवंबर को उनके थाने में दर्ज मामले में ऊंटों को जब्त किया है। यह मामला गउ ज्ञान फाउंडेशन संस्था की ओर से दर्ज कराया गया है। इस सिलसिले में वांछित 13 में से चार को गिरफ्तार भी किया है। बाकी की पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों व उनके सहयोगियों को पीटने के आरोप बेबुनियाद हैं।