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जीवन को नए सिरे से जीने की कला सिखाती है भगवत गीता : शिक्षामंत्री
Updated Thu, 10 May 2018 12:49 AM IST
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जीवन को नए सिरे से जीने की कला सिखाती है भगवत गीता : शिक्षामंत्री
भिवानी। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि गीता हमें जीवन को नए सिरे से जीने की कला सिखाती है। प्रत्येक भारतवासी के लिए भगवत गीता एक अनमोल ग्रंथ एवं पथ-प्रदर्शक है। हमारी प्राचीन और मौलिक परंपराएं सदैव अनुकरणीय तथा स्मरणीय रहेंगी। हमें इनका पालन अवश्य करना चाहिए।
बुधवार को गोस्वामी चंद्रगिरी कन्या विद्यालय में तीन दिवसीय गीता सत्संग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने
कहा कि पाश्चात्य देश भी यह मान चुके हैं कि भारतीय जीवनशैली और परंपराएं जितनी समृद्ध व वैभवशाली हैं, उतनी पवित्रता एवं कुलीनता और कहीं नहीं हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोपेनहेगन में 136 देशों के पर्यावरणविद एवं विचारक एकत्रित हुए थे कि पृथ्वी को प्रदूषण से कैसे बचाया जाए। अंत में निष्कर्ष यही निकला कि गाय का पालन अधिक से अधिक हो और पीपल, तुलसी के पौधे लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि ब्राजील देश की आबादी बीस करोड़ है और उस देश में भारतीय नस्लों की 17 करोड़ गाय हैं। उन्होंने नस्ल सुधार कर इतनी क्षमता हासिल कर ली है कि वहां की एक गाय औसतन 45 लीटर दूध देती है।
श्री कृष्ण कृपा समिति के संचालक व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में चल रहे इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर विधायक घनश्याम दास सर्राफ, नगराधीश महेश कुमार, शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन जगबीर सिंह, जिलाध्यक्ष नंदराम धानिया, बबीता तंवर, महंत चरण दास, ठाकुर विक्रम सिंह, राजेश शर्मा, अश्वनी बतरा, रितिक वधवा व अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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भिवानी। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि गीता हमें जीवन को नए सिरे से जीने की कला सिखाती है। प्रत्येक भारतवासी के लिए भगवत गीता एक अनमोल ग्रंथ एवं पथ-प्रदर्शक है। हमारी प्राचीन और मौलिक परंपराएं सदैव अनुकरणीय तथा स्मरणीय रहेंगी। हमें इनका पालन अवश्य करना चाहिए।
बुधवार को गोस्वामी चंद्रगिरी कन्या विद्यालय में तीन दिवसीय गीता सत्संग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने
कहा कि पाश्चात्य देश भी यह मान चुके हैं कि भारतीय जीवनशैली और परंपराएं जितनी समृद्ध व वैभवशाली हैं, उतनी पवित्रता एवं कुलीनता और कहीं नहीं हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोपेनहेगन में 136 देशों के पर्यावरणविद एवं विचारक एकत्रित हुए थे कि पृथ्वी को प्रदूषण से कैसे बचाया जाए। अंत में निष्कर्ष यही निकला कि गाय का पालन अधिक से अधिक हो और पीपल, तुलसी के पौधे लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि ब्राजील देश की आबादी बीस करोड़ है और उस देश में भारतीय नस्लों की 17 करोड़ गाय हैं। उन्होंने नस्ल सुधार कर इतनी क्षमता हासिल कर ली है कि वहां की एक गाय औसतन 45 लीटर दूध देती है।
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श्री कृष्ण कृपा समिति के संचालक व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में चल रहे इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर विधायक घनश्याम दास सर्राफ, नगराधीश महेश कुमार, शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन जगबीर सिंह, जिलाध्यक्ष नंदराम धानिया, बबीता तंवर, महंत चरण दास, ठाकुर विक्रम सिंह, राजेश शर्मा, अश्वनी बतरा, रितिक वधवा व अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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