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एस्मा सहित अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी बैठे हैं भूख हड़ताल पर
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:07 AM IST
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भिवानी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ, रोडवेज कर्मचारी यूनियन संबंधित महासंघ की संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार की दमनकारी नीतियों व रोडवेज के निजीकरण के खिलाफ 24 घंटे की भूख हड़ताल की। जिसकी अध्यक्षता डिपो प्रधान हरज्ञान घनघस व राजकुमार दलाल ने संयुक्त रूप से की तथा संचालन डिपो सचिव राजेश शर्मा व बलजीत सिंह ने किया।
संयुक्त संघर्ष समिति के नेता नरेंद्र दिनोद व ओमप्रकाश ग्रेवाल ने फूलमालाएं पहनाकर कर्मचारियों को भूख हड़ताल पर बिठाया। डिपो प्रधान राजकुमार दलाल, हरज्ञान घणघस व राज्य कमेटी के नेता नरेंद्र दिनोद पवन शर्मा ईश्वर तालु व जगदीश सांगवान ने कहा की सरकार बार-बार रोडवेज कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा की आंदोलन करना रोडवेज कर्मचारियों का कोई शौक नहीं है किंतु हरियाणा सरकार 720 बसें ठेके पर लेकर किलोमीटर स्कीम के तहत चलाना चाहती है। जबकि प्रदेश की जनता, छात्र और छात्राएं प्रदेश की कोई भी पंचायत निजी बसों की मांग नहीं कर रही है। सभी सरकारी बसों की मांग कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी सरकार हठधर्मिता अपनाते हुए निजीकरण पर जोर दे रही है। जिसका रोडवेज के कर्मचारी पिछले लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।
रोडवेज विभाग को बचाने के लिए कर्मचारी आंदोलन पर हैं लेकिन प्रदेश सरकार कर्मचारियों से बात करने की बजाए कर्मचारियों पर लाठी-डंडे बरसा रही है। आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। आंदोलन करने वाले कर्मचारियों को जेल में डाला जा रहा है। एस्मा जैसे काले कानून के तहत कर्मचारियों को निलंबित व प्रताड़ित किया जा रहा है।
संयुक्त संघर्ष समिति के नेता नरेंद्र दिनोद व ओमप्रकाश ग्रेवाल ने फूलमालाएं पहनाकर कर्मचारियों को भूख हड़ताल पर बिठाया। डिपो प्रधान राजकुमार दलाल, हरज्ञान घणघस व राज्य कमेटी के नेता नरेंद्र दिनोद पवन शर्मा ईश्वर तालु व जगदीश सांगवान ने कहा की सरकार बार-बार रोडवेज कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा की आंदोलन करना रोडवेज कर्मचारियों का कोई शौक नहीं है किंतु हरियाणा सरकार 720 बसें ठेके पर लेकर किलोमीटर स्कीम के तहत चलाना चाहती है। जबकि प्रदेश की जनता, छात्र और छात्राएं प्रदेश की कोई भी पंचायत निजी बसों की मांग नहीं कर रही है। सभी सरकारी बसों की मांग कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी सरकार हठधर्मिता अपनाते हुए निजीकरण पर जोर दे रही है। जिसका रोडवेज के कर्मचारी पिछले लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।
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रोडवेज विभाग को बचाने के लिए कर्मचारी आंदोलन पर हैं लेकिन प्रदेश सरकार कर्मचारियों से बात करने की बजाए कर्मचारियों पर लाठी-डंडे बरसा रही है। आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। आंदोलन करने वाले कर्मचारियों को जेल में डाला जा रहा है। एस्मा जैसे काले कानून के तहत कर्मचारियों को निलंबित व प्रताड़ित किया जा रहा है।
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